प्लग नर्सरी के क्षेत्र में मेहसाणा के माढी गांव ने बनाई विशेष पहचान, हर साल 70 करोड़ से अधिक तैयार होते हैं पौधे
गांधीनगर, 30 जुलाई (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री के तौर पर कृषि महोत्सव, सूक्ष्म सिंचाई, नर्मदा कैनाल नेटवर्क का विस्तार, संरक्षित खेती और आधुनिक नर्सरी आदि पहलों के जरिए राज्य में बागवानी क्षेत्र में मजबूत नींव रखी थी। इन पहलों के चलते राज्य में बागवानी फसलों की खेती को बढ़ावा मिलने के साथ ही किसानों की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में आज बागवानी क्षेत्र का दायरा लगातार बढ़ रहा है, और गुजरात ने बागवानी क्षेत्र में देश के शीर्ष राज्यों में अपना स्थान बना लिया है। इस प्रगति में बागवानी विभाग की हाई-टेक प्लग नर्सरी योजना का भी अहम योगदान रहा है, जिसके परिणामस्वरूप मेहसाणा जिले के माढी गांव के किसान मृदा रहित पौधे उगाकर सालाना 100 करोड़ रुपए से अधिक का कारोबार कर रहे हैं।
विजापुर तहसील के माढी गांव का मुख्य व्यवसाय विभिन्न सब्जियों, फलों और फूलों के पौधे उगाना है। यहां लगभग 300 बीघा जमीन पर 200 से अधिक हाई-टेक नर्सरी यूनिट कार्यरत हैं, जहां सालाना 70 करोड़ से अधिक पौधे तैयार होते हैं। यह पौधे गुजरात के 15 जिलों के अलावा राजस्थान के सिरोही और जालोर तथा महाराष्ट्र के नंदुरबार तक पहुंचते हैं, जो लगभग 6 लाख एकड़ में सब्जियों की खेती का आधार बनते हैं।
माढी गांव में मुख्य रूप से मिर्च और टमाटर के पौधों के अलावा पपीता, शिमला मिर्च, बंदगोभी, फूलगोभी, बैंगन, करेला, ककड़ी, तरबूच, खरबूजा और गेंदे के पौधों का उत्पादन भी किया जाता है। इस नर्सरी व्यवसाय के जरिए सालाना 100 करोड़ रुपए से अधिक का कारोबार होता है, जबकि किसान 50 करोड़ रुपए का अनुमानित मुनाफा कमाते हैं। माढी गांव में 150 से अधिक परिवार इस व्यवसाय से जुड़े हैं, जिससे आसपास के क्षेत्रों की 800 से अधिक महिलाओं को सीधा रोजगार मिल रहा है।
प्लग नर्सरी पद्धति में प्लास्टिक के कप के आकार की खांचे वाली ट्रे का उपयोग किया जाता है। इस पद्धति से कम बीज लागत पर स्वस्थ एवं उच्च गुणवत्ता युक्त पौधे तैयार होते हैं। साथ ही, इससे रोपाई के बाद तेज विकास होता है, स्थान की बचत होती है और निराई-गुड़ाई के साथ-साथ श्रम की जरूरत भी कम पड़ती है। प्लग ट्रे में पौधा उगाने के कारण 80 फीसदी से अधिक अंकुरण होता है, उनकी जड़ें मजबूत होती हैं और वे लगभग 25 दिनों में रोपाई के लिए तैयार हो जाते हैं।
इस पद्धति का फायदा यह है कि पौधे मृदाजनित रोगों से सुरक्षित रहते हैं और फसल की उत्पादकता में भी वृद्धि होती है। प्लग ट्रे में पौधों को आसान और सुरक्षित तरीके से लंबी दूरी तक ले जाया जा सकता है। इसके अलावा, स्प्रिंकलर सिंचाई यानी बौछारी सिंचाई प्रणाली के माध्यम से सभी पौधों को एकसमान पानी मिलने से पौधों का समान और स्वस्थ विकास सुनिश्चित होता है।
बागवानी क्षेत्र में आधुनिक टेक्नोलॉजी को प्रोत्साहन देने और गुणवत्ता युक्त पौधों के उत्पादन के लिए बागवानी विभाग ने हाई-टेक प्लग नर्सरी योजना लागू की है। इस योजना के तहत 500 से 4000 वर्ग मीटर क्षेत्र की संरक्षित नर्सरी (नेट हाउस, ग्रीन हाउस और फेन एंड पेड ग्रीन हाउस) स्थापित करने के लिए 65 फीसदी वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। अब तक इस योजना के अंतर्गत किसानों को 9 करोड़ रुपए से अधिक की सहायता दी जा चुकी है।
साबरकांठा जिले के वदराड़ स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (सीओई) ने माढी गांव को एक अग्रणी प्लग नर्सरी हब के रूप में विकसित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। गुजरात बागवानी विभाग के अंतर्गत कार्यरत यह सेंटर रेगुलर ट्रेनिंग प्रोग्राम्स, एक्सपोजर विजिट्स और ऑन-फील्ड टेक्निकल मार्गदर्शन प्रदान करके नर्सरी संचालकों को प्रोत्साहित करता है।
सेंटर द्वारा संरक्षित खेती, प्रिसिजन इरिगेशन, फर्टिगेशन और जलवायु-नियंत्रित नर्सरी प्रबंधन जैसी आधुनिक तकनीक के बारे में मार्गदर्शन दिया जाता है, जिसके परिणामस्वरूप माढी गांव के नर्सरी संचालक उच्च गुणवत्ता युक्त एवं रोग मुक्त पौधों के उत्पादन में सफल रहे हैं। माढी गांव की सफलता दिखाती है कि आधुनिक टेक्नोलॉजी, बागवानी विभाग का सहयोग और किसानों की मेहनत से बागवानी क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव आ सकता है।
--आईएएनएस
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