पीएलआई योजना से भारत की दवा निर्माण क्षमता मजबूत, एपीआई आयात पर निर्भरता घटी
नई दिल्ली, 25 सितंबर (आईएएनएस)। थोक दवाओं के लिए उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना भारत में महत्वपूर्ण प्रमुख प्रारंभिक सामग्रियों (केएसएम), दवा मध्यवर्ती (डीआई) और सक्रिय औषधीय सामग्री (एपीआई) के विनिर्माण में भारत की घरेलू क्षमताओं को मजबूत कर रही है, आयात पर निर्भरता को कम कर रही है और दवा आपूर्ति श्रृंखला में लचीलापन बढ़ा रही है।
इस योजना के तहत विनिर्माण सुविधाओं को चालू करने वाली पांच ग्रीनफील्ड परियोजनाएं घरेलू उत्पादन के बढ़ते पैमाने और विविधता को दर्शाती हैं, जिसमें एंटीबायोटिक्स, हृदय रोग संबंधी दवाओं और पैरासिटामोल के लिए महत्वपूर्ण घटक शामिल हैं।
ऑरोबिंदो फार्मा लिमिटेड की सहायक कंपनी लाइफियस फार्मा प्राइवेट लिमिटेड ने आंध्र प्रदेश के काकीनाडा एसईजेड में पेनिसिलिन जी के बड़े पैमाने पर उत्पादन की सुविधा स्थापित की है। 2,270.05 करोड़ रुपए के निवेश से बनी इस परियोजना की वार्षिक उत्पादन क्षमता 15,000 मीट्रिक टन है।
इस संयंत्र ने 2,353 प्रत्यक्ष रोजगार सृजित किए हैं और 1,191 करोड़ रुपए का संचयी उत्पादन दर्ज किया है। पेनिसिलिन जी एक महत्वपूर्ण किण्वन-आधारित केएसएम है जिसका उपयोग 6-एपीए जैसे मध्यवर्ती पदार्थों के उत्पादन में किया जाता है, जिनका उपयोग एमोक्सिसिलिन और एम्पीसिलिन सहित व्यापक रूप से निर्धारित एंटीबायोटिक दवाओं के निर्माण में किया जाता है।
90 प्रतिशत से अधिक घरेलू मूल्यवर्धन के साथ, इस परियोजना के परिणामस्वरूप लगभग तीन दशकों के अंतराल के बाद पेनिसिलिन-जी का घरेलू विनिर्माण फिर शुरू हुआ। इससे भारत की एंटीबायोटिक आपूर्ति श्रृंखला में रणनीतिक रूप से केंद्रित एक महत्वपूर्ण कमजोरी को दूर करने में मदद मिली, साथ ही स्वास्थ्य सुरक्षा को मजबूत करने, आपूर्ति श्रृंखला के लचीलेपन में सुधार और बाहरी आपूर्ति व्यवधानों और कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव के जोखिम को कम करने में योगदान दिया।
डीपीबी समूह की कंपनी किनवान प्राइवेट लिमिटेड ने हिमाचल प्रदेश के नालागढ़ में क्लैवुलैनिक एसिड (पोटेशियम क्लैवुलनेट) के लिए 400 मीट्रिक टन प्रति वर्ष की किण्वन-आधारित विनिर्माण सुविधा स्थापित की है।
504.68 करोड़ रुपए के निवेश वाली इस परियोजना ने 465 प्रत्यक्ष रोजगार सृजित किए हैं और 413 करोड़ रुपए का संचयी उत्पादन दर्ज किया है। यह पोटेशियम क्लैवुलनेट के लिए भारत की पहली किण्वन-आधारित विनिर्माण सुविधा है।
क्लैवुलैनिक एसिड एक बीटा-लैक्टामेज अवरोधक है जिसे एमोक्सिसिलिन जैसे पेनिसिलिन-समूह एंटीबायोटिक दवाओं के साथ मिलाकर प्रतिरोधी बैक्टीरिया के खिलाफ उनकी प्रभावशीलता को बढ़ाया जाता है। यह परियोजना एक पहाड़ी राज्य में बड़े पैमाने पर जैव-औषधीय निवेश का प्रतिनिधित्व करती है, जिससे हिमाचल प्रदेश के दवा उत्पादन आधार में वृद्धि होती है और आयात पर निर्भरता कम करते हुए स्वदेशी क्षमताओं को मजबूती मिलती है।
विरचो लेबोरेटरीज लिमिटेड की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी आंध्र ऑर्गेनिक्स लिमिटेड (एओएल) ने आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम जिले के पायदिभीमावरम में सल्फेडियाजिन, टेल्मिसार्टन और ओल्मेसार्टन के उत्पादन संयंत्रों का शुभारंभ किया है। इन परियोजनाओं में कुल 151.47 करोड़ रुपए का निवेश किया गया है और इनसे 221 प्रत्यक्ष रोजगार सृजित हुए हैं। कंपनी ने विनिर्माण तकनीक स्वयं विकसित की है और नए सिरे से उत्पादन संयंत्र स्थापित किए हैं।
सल्फेडियाजिन के घरेलू उत्पादन ने भारत की आयात निर्भरता में उल्लेखनीय कमी लाने में योगदान दिया है, और कंपनी द्वारा 2022 में आपूर्ति शुरू करने के बाद से वित्त वर्ष 2019-20 की तुलना में आयात में लगभग 73 प्रतिशत की गिरावट आई है। टेल्मिसार्टन और ओल्मेसार्टन उच्च रक्तचाप के लिए निर्धारित दवाओं में व्यापक रूप से उपयोग किए जाने वाले एपीआई हैं, जो आवश्यक हृदय संबंधी दवाओं की उपलब्धता में सहायक हैं।
मेघमानी एलएलपी ने गुजरात के दहेज में पैरा अमीनो फिनोल (पीएपी) के लिए 13,500 मीट्रिक टन प्रति वर्ष की विनिर्माण क्षमता वाली एक संयंत्र स्थापित की है, जिसमें 60.46 करोड़ रुपए का निवेश किया गया है।
बुखार और दर्द से राहत के लिए सबसे व्यापक रूप से इस्तेमाल की जाने वाली दवाओं में से एक पैरासिटामोल के लिए पीएपी एक महत्वपूर्ण प्रारंभिक सामग्री है। एलआई द्वारा समर्थित यह सुविधा पीएपी के लिए बड़े पैमाने पर घरेलू उत्पादन क्षमता प्रदान करती है, जिसे पहले बड़े पैमाने पर आयात किया जाता था।
इस परियोजना ने 687 करोड़ रुपए संचयी उत्पादन दर्ज किया है। यह सुविधा पैरासिटामोल विनिर्माण में बैकवर्ड इंटीग्रेशन को मजबूत करती है और देश भर में व्यापक रूप से उपयोग की जाने वाली इस आवश्यक दवा की आपूर्ति की सुरक्षा को बढ़ाती है, साथ ही पैरासिटामोल के एक विश्वसनीय वैश्विक आपूर्तिकर्ता के रूप में भारत की स्थिति को भी मजबूत करती है।
सेंट्रिएंट फार्मास्युटिकल्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने पंजाब के नवांशहर में 206 मीट्रिक टन प्रति वर्ष की स्थापित क्षमता वाली एक ग्रीनफील्ड एटोरवास्टेटिन एपीआई विनिर्माण सुविधा स्थापित की है।
161.13 करोड़ रुपए के निवेश वाली इस परियोजना ने 432 करोड़ रुपए का संचयी उत्पादन दर्ज किया है।
एटोरवास्टेटिन एक व्यापक रूप से निर्धारित हृदय रोग की दवा है जिसका उपयोग कोलेस्ट्रॉल को कम करने और हृदय संबंधी बीमारियों के जोखिम को घटाने के लिए किया जाता है। इस परियोजना ने 80 प्रतिशत से अधिक घरेलू मूल्यवर्धन वाली आपूर्ति श्रृंखला के विकास को संभव बनाया है, जिससे आयातित प्रमुख कच्चे माल पर निर्भरता कम हुई है और भारत की घरेलू आवश्यकताओं को पूरा करने की क्षमता को समर्थन मिला है, साथ ही वैश्विक आपूर्तिकर्ता के रूप में इसकी क्षमता को भी मजबूती मिली है।
थोक औषधियों के लिए पीएलआई योजना के तहत इन सुविधाओं की शुरुआत किण्वन-आधारित और रासायनिक रूप से संश्लेषित औषधीय इनपुट में भारतीय निर्माताओं की बढ़ती क्षमताओं को दर्शाती है।
पेनिसिलिन जी और क्लैवुलैनिक एसिड से लेकर एटोरवास्टेटिन, टेल्मिसार्टन और ओल्मेसार्टन जैसे एपीआई और पैरासिटामोल के प्रमुख प्रारंभिक पदार्थ पीएपी तक, ये परियोजनाएं घरेलू मूल्यवर्धन, आयात प्रतिस्थापन, रोजगार सृजन और आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती में योगदान दे रही हैं।
ये परियोजनाएं यह भी दर्शाती हैं कि लक्षित नीतिगत समर्थन किस प्रकार रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण दवा निर्माण क्षेत्रों में निवेश को प्रोत्साहित कर सकता है, बैकवर्ड इंटीग्रेशन को मजबूत कर सकता है और स्वदेशी तकनीकी क्षमताओं का निर्माण कर सकता है।
--आईएएनएस
एएसएच/डीकेपी
