पितृ पक्ष 2026: पूर्णिमा स्नान के लिए प्रयागराज में संगम घाटों पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
प्रयागराज, 26 सितंबर (आईएएनएस)। सनातन धर्म में पितृपक्ष का विशेष महत्व है। पितृपक्ष को केवल शहद और तर्पण का समय नहीं माना जाता, बल्कि अपने पूर्वजों को याद करने और उनके प्रति कृतज्ञता जताने का अवसर भी है। मान्यता है कि इस दौरान किए गए तर्पण पिंडदान श्राद्ध और दान से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है। और उनका आशीर्वाद परिवार पर सदा बना हुआ रहता है। वही आज से शुरू हो गया है पितृपक्ष और बड़ी संख्या में यात्री अपने पितृरों कातर्पण पिंडदान और श्राद्ध करने के लिए प्रयागराज में भरी भीड़ जुटने लगी है।
हिंदू धर्म में प्रयागराज (त्रिवेणी संगम - गंगा, यमुना और पौराणिक सरस्वती का मिलन स्थल) को पिंडदान और तर्पण के लिए अत्यंत पवित्र तीर्थ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मान्यता है कि त्रिवेणी संगम पर पिंडदान करने से दिवंगत आत्माओं को मोक्ष की प्राप्ति होती है।
तीर्थ पुरोहित अमरनाथ तिवारी ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि तीर्थों के राजा प्रयागराज में श्रद्धालु सर्वप्रथम पिंडदान और तर्पण करते हैं। यहां से श्रद्धालु काशी जाते हैं और फिर गयाजी जाते हैं। प्रयागराज में पिंडदान, श्राद्ध और तर्पण के साथ-साथ मुंडन यहां होता है। आज से पितृ पक्ष की शुरुआत हो रही है।
मध्य प्रदेश के सतना जिले से प्रयागराज पहुंचे एक व्यक्ति ने कहा कि हम पितरों का तर्पण करने के लिए यहां से गयाजी के लिए जाएंगे। अभी हम सभी संगम घाट पर पिंडदान करेंगे। इसके बाद अयोध्या के लिए जाएंगे। उन्होंने प्रयागराज का महत्व बताते हुए कहा कि 'सारे तीर्थ बार-बार और संगम का तीर्थ एक बार' है। यहां गंगा, यमुना और सरस्वती तीनों नदियों का मिलन होता है। जब तीनों
पंचांग के अनुसार, इस साल पितृपक्ष की शुरुआत 26 सितंबर, शनिवार से हो रही है। पितृ पक्ष का समापन 10 अक्टूबर, शनिवार को सर्वपितृ अमावस्या के दिन होगा। 26 सितंबर को पूर्णिमा श्राद्ध, 27 को प्रतिपदा श्राद्ध, 28 को द्वितीया श्राद्ध, 29 को तृतीया श्राद्ध, 30 को चतुर्थी और पंचमी श्राद्ध होगा। वहीं, अक्टूबर में 1 तारीख को षष्ठी श्राद्ध, 2 को सप्तमी श्राद्ध, 3 को अष्टमी श्राद्ध, 4 को नवमी श्राद्ध, 5 को दशमी श्राद्ध, 6 को एकादशी श्राद्ध, 7 को द्वादशी श्राद्ध, 8 त्रयोदशी श्राद्ध और 9 को चतुर्दशी श्राद्ध होगा।
10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या पितृ पक्ष का आखिरी दिन होगा। इस दिन सर्वपितृ अमावस्या या महालय अमावस्या रहेगी। जिन पितरों की श्राद्ध तिथि मालूम नहीं है, उनके लिए इस दिन श्राद्ध करने की परंपरा है। किसी कारण से तय तिथि पर श्राद्ध नहीं हो पाया हो, तब भी सर्वपितृ अमावस्या का दिन महत्वपूर्ण माना जाता है।
--आईएएनएस
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