Aapka Rajasthan

पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण से घटेगी कच्चे तेल पर निर्भरता, अर्थव्यवस्था को मिलेगा बड़ा लाभ : शालिवाहन श्रीवास्तव

विशाखापत्तनम, 28 जुलाई (आईएएनएस)। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम एंड एनर्जी (आईआईपीई), विशाखापत्तनम के निदेशक शालिवाहन श्रीवास्तव ने पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण (ई20) के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पेट्रोल में मिलाया गया एथेनॉल का प्रत्येक लीटर आयातित जीवाश्म ईंधन के एक लीटर की जगह लेता है। यह केवल भारत की कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम नहीं करता, बल्कि देश के भीतर उत्पादित नवीकरणीय ईंधन के उपयोग को बढ़ावा देकर अर्थव्यवस्था को भी मजबूत बनाता है।
 

विशाखापत्तनम, 28 जुलाई (आईएएनएस)। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम एंड एनर्जी (आईआईपीई), विशाखापत्तनम के निदेशक शालिवाहन श्रीवास्तव ने पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण (ई20) के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पेट्रोल में मिलाया गया एथेनॉल का प्रत्येक लीटर आयातित जीवाश्म ईंधन के एक लीटर की जगह लेता है। यह केवल भारत की कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम नहीं करता, बल्कि देश के भीतर उत्पादित नवीकरणीय ईंधन के उपयोग को बढ़ावा देकर अर्थव्यवस्था को भी मजबूत बनाता है।

आईएएनएस से खास बातचीत में शालिवाहन श्रीवास्तव ने कहा कि एथेनॉल मिश्रण से किसानों को नई आर्थिक संभावनाएं मिलती हैं, ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार का सृजन होता है और पर्यावरण संरक्षण को भी बल मिलता है। हर लीटर एथेनॉल भारतीय अर्थव्यवस्था के भीतर अधिक मूल्य बनाए रखता है और देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करता है।

श्रीवास्तव ने यह स्पष्ट किया कि ई20 ईंधन को बिना पर्याप्त परीक्षण के लागू नहीं किया गया है। इसे लागू करने से पहले नीति आयोग, ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एआरएआई), सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (एसआईएएम) और अन्य संबंधित एजेंसियों द्वारा व्यापक तकनीकी मूल्यांकन किया गया। इस दौरान इंजन की टिकाऊ क्षमता, जंग लगने की संभावना, विभिन्न सामग्रियों की अनुकूलता, वाहन की ड्राइवेबिलिटी, उत्सर्जन, ईंधन दक्षता और समग्र प्रदर्शन जैसे सभी महत्वपूर्ण पहलुओं की गहन जांच की गई।

उन्होंने यह भी कहा कि ई20 कोई नया ईंधन नहीं है। दुनिया के कई देशों में इसका लंबे समय से सफलतापूर्वक उपयोग हो रहा है। विशेष रूप से ब्राजील जैसे देशों में दशकों से इससे भी अधिक एथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन का उपयोग किया जा रहा है। भारत में भी एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम की शुरुआत वर्ष 2001 में एक पायलट परियोजना के रूप में की गई थी। इसके बाद वर्ष 2006 में ई5 लागू किया गया, लेकिन 2013-14 तक एथेनॉल मिश्रण का स्तर लगभग 1.5 प्रतिशत ही बना रहा। उत्पादन क्षमता, आवश्यक बुनियादी ढांचे और नियामकीय व्यवस्था विकसित होने के बाद सरकार ने चरणबद्ध और संतुलित तरीके से एथेनॉल मिश्रण का प्रतिशत बढ़ाया। सरकार ने बड़े पैमाने पर वास्तविक परिस्थितियों में मिले अनुभवों को भी ध्यान में रखा है।

उन्होंने बताया कि भारत में प्रतिदिन लगभग 8 करोड़ वाहन पेट्रोल पंपों पर ईंधन भरवाने पहुंचते हैं, जिनमें करीब 80 प्रतिशत पेट्रोल चालित वाहन हैं। पिछले साढ़े तीन वर्षों से ई15 या उससे अधिक एथेनॉल मिश्रित ईंधन का व्यापक रूप से उपयोग किया जा रहा है, जबकि ई19 और ई20 ईंधन भी पिछले ढाई वर्षों से बड़े पैमाने पर इस्तेमाल में हैं। इस अनुभव ने यह साबित किया है कि एथेनॉल मिश्रित ईंधन का उपयोग व्यवहारिक और सुरक्षित है।

निदेशक ने आगे कहा कि एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम भारत के ऊर्जा आत्मनिर्भरता अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इससे विदेशी मुद्रा की बचत, किसानों की आय में वृद्धि, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती और स्वच्छ पर्यावरण जैसे कई सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। आने वाले वर्षों में एथेनॉल आधारित ईंधन भारत के सतत विकास और ऊर्जा सुरक्षा के लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

--आईएएनएस

पीएसके/एबीएम