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पेट की चर्बी से हैं परेशान? रोज करें उत्तानपादासन, जानें इसके फायदे

नई दिल्ली, 30 सितंबर (आईएएनएस)। आधुनिक जीवनशैली में शारीरिक स्वास्थ्य और आंतरिक ऊर्जा के संतुलन के लिए योग एक अत्यंत प्रभावी साधन है। इन्हीं यौगिक अभ्यासों में से 'उत्तानपादासन' है, जो न सिर्फ पेट की चर्बी को कम करता है बल्कि शरीर में नई ऊर्जा और संतुलन भी लाता है।
 

नई दिल्ली, 30 सितंबर (आईएएनएस)। आधुनिक जीवनशैली में शारीरिक स्वास्थ्य और आंतरिक ऊर्जा के संतुलन के लिए योग एक अत्यंत प्रभावी साधन है। इन्हीं यौगिक अभ्यासों में से 'उत्तानपादासन' है, जो न सिर्फ पेट की चर्बी को कम करता है बल्कि शरीर में नई ऊर्जा और संतुलन भी लाता है।

यह योगासन हठयोग के अंतर्गत ही आता है। हठयोग के आधुनिक और पारंपरिक अभ्यासों में शरीर को स्थिर और सुदृढ़ बनाने के लिए कई आसनों का वर्णन है, जिनमें से उत्तानपादासन एक महत्वपूर्ण आसन है।

आयुष मंत्रालय के अनुसार, उत्तानपादासन पीठ के बल लेटकर किए जाने वाले आसनों में एक बेहद महत्वपूर्ण योगासन है। संस्कृत में 'उत्तान' का अर्थ 'ऊपर उठा हुआ' और 'पाद' का अर्थ 'पैर' होता है। साधारण शब्दों में इसका अर्थ है 'पैरों को ऊपर उठाकर की जाने वाली मुद्रा'। इस आसन को करने के दौरान पीठ के बल लेटकर दोनों पैरों को जमीन से एक निश्चित कोण पर ऊपर उठाया जाता है, जिससे यह नाभि केंद्र (मणिपुर चक्र) को संतुलित करने में मदद करता है।

उत्तानपादासन का मुख्य प्रभाव हमारे नाभि केंद्र (मणिपुर चक्र) और पेट के निचले भाग पर पड़ता है। यह आसन विशेष रूप से पाचन तंत्र को मजबूत करने, पेट की मांसपेशियों को सुडौल बनाने और नाभि को उसके सही स्थान पर संतुलित रखने के लिए जाना जाता है। जो गैस, कब्ज, एसिडिटी या मोटापे की समस्या से जूझ रहे हैं, उनके लिए यह आसन अत्यंत लाभकारी सिद्ध होता है। इसके अलावा, यह रीढ़ की हड्डी और जांघों की मांसपेशियों को भी शक्ति प्रदान करता है।

यह आसन न सिर्फ शारीरिक बल्कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी बेहद फायदेमंद कारगर है। इस आसन को नियमित रूप से करने से शरीर में रक्त संचार बेहतर होता है और नर्वस सिस्टम संतुलित रहता है, जिससे अवसाद , तनाव और चिंता जैसी समस्याओं को कम करने में मदद मिलती है।

इस आसन को करने के दौरान गहरी सांस लेते हुए पैरों को ऊपर उठाया जाता है, तो मन एकाग्र होता है और दिमाग को शांति मिलती है। यह आसन शरीर की थकान और मानसिक बोझ को कम करके सकारात्मक ऊर्जा लाता है, जिससे मन शांत और हल्का महसूस करता है।

गर्भवती महिलाओं, कमर, पीठ या पेट में गंभीर चोट-दर्द की समस्या वाले व्यक्तियों को इस आसन को करने से परहेज करना चाहिए।

--आईएएनएस

एनएस/पीएम