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पीडीपी का विरोध : कर्मचारियों की बर्खास्तगी और मस्जिद प्रोफाइलिंग पर महबूबा-इल्तिजा ने केंद्र को घेरा

श्रीनगर, 13 जनवरी (आईएएनएस)। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की प्रमुख महबूबा मुफ्ती और उनकी बेटी इल्तिजा मुफ्ती ने मंगलवार को केंद्र सरकार और प्रशासन पर तीखा हमला किया। उन्होंने जम्मू-कश्मीर में सरकारी कर्मचारियों की मनमानी बर्खास्तगी और पुलिस द्वारा मस्जिदों की प्रोफाइलिंग को लेकर आलोचना की।
 
पीडीपी का विरोध : कर्मचारियों की बर्खास्तगी और मस्जिद प्रोफाइलिंग पर महबूबा-इल्तिजा ने केंद्र को घेरा

श्रीनगर, 13 जनवरी (आईएएनएस)। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की प्रमुख महबूबा मुफ्ती और उनकी बेटी इल्तिजा मुफ्ती ने मंगलवार को केंद्र सरकार और प्रशासन पर तीखा हमला किया। उन्होंने जम्मू-कश्मीर में सरकारी कर्मचारियों की मनमानी बर्खास्तगी और पुलिस द्वारा मस्जिदों की प्रोफाइलिंग को लेकर आलोचना की।

दोनों नेताओं ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अलग-अलग पोस्ट करके इन मुद्दों को उठाया। महबूबा मुफ्ती ने एक्स पर लिखा, "जम्मू-कश्मीर में मनमाने तरीके से नौकरी से निकालना आम बात हो गई है। यह सिर्फ कर्मचारी की बात नहीं है। हर 'नौकरी से निकाले जाने' के पीछे एक परिवार होता है, जिसे अंधकार में धकेल दिया जाता है। यह एक तरह की सामूहिक सजा है, जिसमें पूरे परिवारों को रातों-रात भारत सरकार की कठोर नीतियों से बर्बाद कर दिया जाता है। यह कानून के राज का मजाक उड़ाती हैं और सही प्रक्रिया को नजरअंदाज करती हैं। इस अन्याय को खत्म होना चाहिए।"

यह पोस्ट ऐसे समय में आई है जब लेफ्टिनेंट गवर्नर मनोज सिन्हा ने हाल ही में पांच सरकारी कर्मचारियों को कथित तौर पर प्रतिबंधित उग्रवादी संगठनों से संबंध होने के आरोप में बर्खास्त किया। ये बर्खास्तगियां संविधान के अनुच्छेद 311(2)(सी) के तहत की गईं, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों में बिना जांच के छुट्टी की अनुमति देता है।

महबूबा ने इसे 'मनमाना' और 'सामूहिक सजा' करार दिया और कहा कि 2019 से सैकड़ों कर्मचारियों को इसी आधार पर निकाला गया है, जिससे परिवार तबाह हो रहे हैं। उन्होंने इसे 'कानून के राज का मजाक' बताया और न्याय की मांग की।

इसी क्रम में, इल्तिजा मुफ्ती ने 'एक्स' पर पोस्ट किया, "पता नहीं किस कानून के तहत जम्मू-कश्मीर पुलिस पूरे जम्मू-कश्मीर में मस्जिदों की प्रोफाइलिंग कर रही है? यह बेतुकी दंडात्मक नीति मुसलमानों पर सामूहिक शक, उन्हें अलग-थलग करने और सजा देने की बू आती है। इस लगातार अपमान के बाद भी आप अनजान होने का नाटक करते हैं, जबकि कश्मीरी खुद को ज्यादा से ज्यादा अकेला और अलग-थलग पा रहे हैं? आपको जगाने के लिए और क्या चाहिए?"

--आईएएनएस

एससीएच