पौड़ी प्रशासन मानसून से निपटने के लिए तैयार, सभी विभागों को दिए 24 घंटे सतर्क रहने के निर्देश : डीएम
पौड़ी गढ़वाल, 9 जुलाई (आईएएनएस)। उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले में मानसून को देखते हुए प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। जिला मजिस्ट्रेट स्वाति एस. भदौरिया ने सभी विभागों को चौबीसों घंटे अलर्ट रहने और बारिश से जुड़ी किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि मानसून के दौरान संभावित आपदाओं से निपटने के लिए सभी विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया गया है और जरूरी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
जिलाधिकारी ने आईएएनएस को बताया कि संबंधित विभागों के साथ बैठकें आयोजित कर उन्हें आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जा चुके हैं। इसके अलावा आपदा प्रबंधन की तैयारियों को परखने के लिए मॉक ड्रिल भी कराई गई हैं। मॉक ड्रिल के दौरान सामने आई कमियों और आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए विभागों को सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं।
स्वाति एस. भदौरिया ने बताया कि मानसून के दौरान सबसे अधिक चुनौती सड़कों को लेकर रहती है। ऐसे में जिले में सड़क मार्गों को सुचारू बनाए रखने के लिए जेसीबी मशीनों की तैनाती कर दी गई है। उन्होंने कहा कि सभी संबंधित मशीनों और ऑपरेटरों के संपर्क नंबर प्रशासन के पास उपलब्ध हैं। इनकी सक्रियता सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन की ओर से समय-समय पर फोन कर उनकी लोकेशन और उपलब्धता की जांच भी की जा रही है।
जिलाधिकारी ने कहा कि आपदा की स्थिति में केवल सड़क विभाग ही नहीं, बल्कि बिजली, पानी, चिकित्सा और अन्य आवश्यक सेवाओं से जुड़े विभागों को भी सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी भी स्थान से आपात स्थिति की सूचना मिलती है तो सभी संबंधित विभागों के कर्मचारी तुरंत मौके पर पहुंचकर राहत और बहाली का कार्य शुरू करेंगे।
उन्होंने बताया कि जिले के पटवारी, तहसीलदार और अन्य राजस्व कर्मचारियों को भी अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय रहने के निर्देश दिए गए हैं। ग्राउंड स्तर पर मौजूद रहकर वे स्थानीय परिस्थितियों पर नजर रखेंगे और किसी भी आपदा की स्थिति में तत्काल प्रशासन को सूचना देंगे।
मानसून के दौरान लोगों को सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराने के लिए जिले में राहत केंद्रों की पहचान भी कर ली गई है। जिलाधिकारी ने बताया कि सभी राहत केंद्रों को तैयार स्थिति में रखने के निर्देश दिए गए हैं। इन केंद्रों की चाबियां सुरक्षित रखने की व्यवस्था की गई है, ताकि जरूरत पड़ने पर प्रभावित लोगों को तुरंत वहां ठहराया जा सके।
--आईएएनएस
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