पटना की सड़कों पर उतरे दारोगा अभ्यर्थी, मुख्य परीक्षा रद्द करने का फैसला वापस लेने की मांग
पटना, 5 अक्टूबर (आईएएनएस)। बिहार की राजधानी पटना में सोमवार को एक बार फिर अभ्यर्थियों का जोरदार प्रदर्शन देखने को मिला। इस बार दारोगा अभ्यर्थी बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग (बीपीएसएससी) द्वारा मुख्य परीक्षा रद्द किए जाने के फैसले के विरोध में सड़क पर उतरे। प्रदर्शनकारी अभ्यर्थी मुख्य परीक्षा को रद्द करने के निर्णय को वापस लेने और घोषित परिणाम को मान्य करने की मांग कर रहे थे। दारोगा अभ्यर्थी बड़ी संख्या में जेपी गोलंबर के पास जुटे और प्रदर्शन शुरू किया।
प्रदर्शन को देखते हुए मौके पर भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई थी। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए महिला पुलिसकर्मियों को भी तैनात किया गया था। अभ्यर्थियों ने हाथों में पोस्टर लेकर आयोग और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों का कहना था कि वे पिछले सात दिनों से गर्दनीबाग में अपनी मांगों को लेकर धरना दे रहे हैं, लेकिन अब तक उनकी समस्याओं पर कोई ठोस सुनवाई नहीं हुई है। इसके बाद सोमवार को बड़ी संख्या में अभ्यर्थी सड़क पर उतरकर मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ने का प्रयास करने लगे।
अभ्यर्थी मौर्य लोक की ओर से आगे बढ़ना चाहते थे लेकिन पुलिस ने बैरिकेडिंग कर उन्हें रोक दिया। इस दौरान कई स्थानों पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की भी हुई। पुलिस ने अभ्यर्थियों को आगे बढ़ने से रोकने का प्रयास किया। प्रदर्शन के कारण आसपास के इलाकों में कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल भी बना रहा। प्रदर्शन के दौरान अभ्यर्थियों के हाथों में अलग-अलग पोस्टर नजर आए।
एक पोस्टर पर लिखा था, "दो कचौड़ी, एक समोसा, बीपीएसएससी का क्या भरोसा।" इसके जरिए अभ्यर्थियों ने आयोग के फैसले पर सवाल उठाते हुए अपना विरोध दर्ज कराया। गौरतलब है कि बिहार में दारोगा के 1,799 पदों पर नियुक्ति के लिए परीक्षा आयोजित की गई थी। मुख्य परीक्षा का परिणाम भी घोषित किया जा चुका था। बाद में परीक्षा में अनियमितता के आरोप सामने आने के बाद बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग ने मुख्य परीक्षा को रद्द कर दिया।
आयोग के इस फैसले के बाद अभ्यर्थियों में नाराजगी है और वे लगातार आंदोलन कर रहे हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि परीक्षा रद्द करने के बजाय पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जानी चाहिए। उनका दावा है कि बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने पूरी प्रक्रिया में मेहनत की है और परीक्षा रद्द होने से उनका भविष्य प्रभावित हो रहा है। प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप कर परीक्षा रद्द करने का फैसला वापस लेने की मांग की है।
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