पासपोर्ट को नागरिकता का प्रमाण न मानने पर गौरव गोगोई ने उठाए सवाल, सरकार से मांगा स्पष्ट जवाब
गुवाहाटी, 25 जून (आईएएनएस)। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने पासपोर्ट को नागरिकता का प्रमाण न माने जाने के मुद्दे पर केंद्र सरकार से सवाल पूछते हुए इस विषय पर स्पष्ट स्थिति बताने की मांग की है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार द्वारा जारी किया जाने वाला पासपोर्ट केवल एक सामान्य दस्तावेज नहीं, बल्कि ऐसा आधिकारिक दस्तावेज है जिसे दुनिया भर की सरकारें मान्यता देती हैं और गंभीरता से स्वीकार करती हैं।
गोगोई ने कहा कि यदि विदेश मंत्रालय यह कहता है कि पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं है, तो स्वाभाविक रूप से यह सवाल उठता है कि क्या भारत सरकार गैर-नागरिकों को भी भारतीय पासपोर्ट जारी करती है। उन्होंने पूछा कि आखिर पासपोर्ट किसे दिया जाता है? पासपोर्ट तो भारत सरकार ही जारी करती है और सामान्य परिस्थितियों में यह उसी व्यक्ति को दिया जाता है जो भारत का नागरिक हो।
कांग्रेस सांसद ने कहा कि यदि पासपोर्ट को भी नागरिकता का प्रमाण नहीं माना जाएगा, तो फिर यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि नागरिकता का प्रमाण आखिर क्या है। उन्होंने कहा कि देश के नागरिकों के मन में इस विषय को लेकर भ्रम पैदा हो रहा है और सरकार को इसे दूर करना चाहिए।
असम से आने वाले गोगोई ने एनआरसी का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि असम में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) को लेकर जो राजनीति और प्रक्रियाएं चली हैं, उन्हें राज्य के लोगों ने बहुत करीब से देखा है। ऐसे में यह आशंका स्वाभाविक है कि कहीं सरकार किसी दूसरी प्रक्रिया के माध्यम से एनआरसी जैसी व्यवस्था लागू करने की कोशिश तो नहीं कर रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार एक-एक कर विभिन्न दस्तावेजों को नागरिकता के प्रमाण के रूप में कमजोर बताने का प्रयास कर रही है। गोगोई के अनुसार, वोटर आईडी, पैन कार्ड, आधार कार्ड और अब पासपोर्ट को लेकर भी यह कहा जा रहा है कि ये नागरिकता के अंतिम प्रमाण नहीं हैं।
गौरव गोगोई ने सवाल किया कि क्या भारत का पासपोर्ट चीन, श्रीलंका या किसी अन्य विदेशी देश के नागरिकों को जारी किया जाता है? यदि ऐसा नहीं है, तो फिर यह कहना कि पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं है, किस आधार पर कहा जा रहा है?
उन्होंने कहा कि यह एक महत्वपूर्ण विषय है और सरकार को स्पष्ट रूप से बताना चाहिए कि नागरिकता से जुड़े विभिन्न दस्तावेजों की वैधानिक स्थिति क्या है। साथ ही, नागरिकों को यह जानने का अधिकार है कि सरकार इस मुद्दे पर क्या दृष्टिकोण रखती है।
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