पश्चिम बंगाल: सिंगूर-नंदीग्राम आंदोलन के अध्याय हटाने के संकेत, भाजपा विधायक का बयान
कोलकाता, 16 मई (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले की बारानगर विधानसभा सीट से हाल ही में निर्वाचित भाजपा विधायक सजल घोष ने शनिवार को संकेत दिया कि राज्य बोर्ड के स्कूल पाठ्यक्रम से सिंगूर और नंदीग्राम भूमि आंदोलन से जुड़े अध्याय हटाए जा सकते हैं। ये आंदोलन तत्कालीन मुख्यमंत्री दिवंगत बुद्धदेव भट्टाचार्य के नेतृत्व वाली वाम मोर्चा सरकार के खिलाफ तृणमूल कांग्रेस द्वारा चलाए गए थे।
सजल घोष, जो कोलकाता नगर निगम में भाजपा पार्षद भी हैं, शनिवार दोपहर एक काउंसलिंग कार्यक्रम में शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान मीडिया से बातचीत में उन्होंने स्कूल पाठ्यक्रम से सिंगूर और नंदीग्राम आंदोलन से जुड़े अध्याय हटाए जाने की संभावना का जिक्र किया।
उन्होंने कहा कि फिलहाल नए राज्य शिक्षा विभाग के मंत्री के नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है और विभाग का कामकाज मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी स्वयं देख रहे हैं।
घोष ने दावा किया कि सिंगूर भूमि आंदोलन से जुड़े अध्याय में पूर्व शिक्षा मंत्री और तृणमूल कांग्रेस के महासचिव पार्थ चटर्जी की भूमिका का भी उल्लेख है। यह आंदोलन उस समय विपक्ष की नेता रहीं ममता बनर्जी के नेतृत्व में चलाया गया था।
उन्होंने सवाल उठाया कि जिस पूर्व मंत्री ने कथित शिक्षक भर्ती घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा गिरफ्तारी के बाद करीब तीन साल जेल में बिताए हों, उनका नाम स्कूल के अध्याय में कैसे रखा जा सकता है।
सजल घोष ने कहा, “शैक्षणिक जगत के विभिन्न वर्गों से स्कूल पाठ्यक्रम में तत्काल बदलाव की मांग उठी है। नई राज्य सरकार निश्चित रूप से इस मामले पर विचार करेगी।”
गौरतलब है कि हुगली जिले के सिंगूर में टाटा मोटर्स की छोटी कार परियोजना के खिलाफ भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन और पूर्वी मिदनापुर जिले के नंदीग्राम में इंडोनेशिया स्थित सलीम समूह की प्रस्तावित केमिकल हब परियोजना के खिलाफ आंदोलन, वर्ष 2007 में शुरू हुए थे। इन आंदोलनों को 2011 में पश्चिम बंगाल में 34 साल पुराने वाम मोर्चा शासन के पतन की बड़ी वजहों में माना जाता है।
2011 में सत्ता में आने के बाद, ममता बनर्जी सरकार ने सिंगूर और नंदीग्राम आंदोलनों से जुड़े अध्यायों को स्कूल पाठ्यक्रम में शामिल किया था।
--आईएएनएस
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