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पश्चिम बंगाल चुनाव: कसबा से बालिगंज तक टीएमसी का दबदबा, जानें कोलकाता दक्षिण की सात सीटों के स‍ियासी समीकरण

कोलकाता, 16 मार्च (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल में चुनाव की तारीखों का एलान हो गया। पिछली बार आठ चरणों में होने वाले मतदान इस बार सिर्फ दो चरणों में ही पूरे हो जाएंगे। 23 और 29 अप्रैल को राज्य में मतदान होगा। राजनीतिक दलों ने अब पूरी तरह से कमर कस ली है। ऐसे में आइए जानते हैं पश्चिम बंगाल की लोकसभा सीट कोलकाता दक्षिण के अंतर्गत आने वाली सात विधानसभा सीटों के चुनावी समीकरण क्या कहते हैं।
 
पश्चिम बंगाल चुनाव: कसबा से बालिगंज तक टीएमसी का दबदबा, जानें कोलकाता दक्षिण की सात सीटों के स‍ियासी समीकरण

कोलकाता, 16 मार्च (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल में चुनाव की तारीखों का एलान हो गया। पिछली बार आठ चरणों में होने वाले मतदान इस बार सिर्फ दो चरणों में ही पूरे हो जाएंगे। 23 और 29 अप्रैल को राज्य में मतदान होगा। राजनीतिक दलों ने अब पूरी तरह से कमर कस ली है। ऐसे में आइए जानते हैं पश्चिम बंगाल की लोकसभा सीट कोलकाता दक्षिण के अंतर्गत आने वाली सात विधानसभा सीटों के चुनावी समीकरण क्या कहते हैं।

वर्तमान स्थिति में कोलकाता दक्षिण लोकसभा क्षेत्र टीएमसी का मजबूत गढ़ है। यहां की सभी सात कसबा, बेहाला पूर्व, बेहाला पश्चिम, कोलकाता पोर्ट, भबानीपुर, रासबिहारी और बालिगंज विधानसभा सीटों पर टीएमसी की मजबूत पकड़ है।

कसबा, एक सामान्य श्रेणी का विधानसभा क्षेत्र है, जो प्रशासनिक रूप से दक्षिण 24 परगना जिले में स्थित है। यह कोलकाता दक्षिण लोकसभा सीट के तहत सात विधानसभा क्षेत्रों में से एक है। तृणमूल कांग्रेस के लिए ये सीट हमेशा फायदे का सौदा रही। पिछले तीन विधानसभा चुनावों में मौजूदा टीएमसी के विधायक जावेद अहमद खान ने ही बाजी मारी है। इस सीट पर फिलहाल भाजपा ही एक ऐसी पार्टी है जो मुख्य रूप से टीएमसी का सामना कर रही है।

बेहाला पूर्व विधानसभा सीट, कोलकाता दक्षिण लोकसभा सीट के तहत एक जनरल कैटेगरी की सीट है। तृणमूल कांग्रेस ने 2001 में अपनी पहली पहचान बनाई। बेहाला पूर्व तृणमूल कांग्रेस का गढ़ रहा है। 2021 में टीएमसी की रत्ना चटर्जी ने भाजपा की पायल सरकार को 37,428 वोटों से हराकर पार्टी का दबदबा बरकरार रखा है। संसदीय चुनाव का समीकरण विधानसभा चुनाव नतीजों जैसा ही है। हालांकि, भाजपा का वोट शेयर लगातार बढ़ना रूलिंग पार्टी के लिए चिंता की बात है।

बेहाला पश्चिम तृणमूल कांग्रेस का गढ़ रहा है। पार्टी शुरुआत से यहां अजेय रही है। तृणमूल कांग्रेस के पार्थ चटर्जी ने लगातार तीसरी बार 2011 में भी जीत का दबदबा बरकरार रखा है। चुनावी मैदान में उन्होंने सीपीआई(एम) के अनुपम देबसरकार को 59,021 वोटों से हराया था। लोकसभा चुनावों में भी बेहाला पश्चिम पर तृणमूल कांग्रेस की पकड़ बनी हुई है। 2019 में सीपीआई(एम) को हटाकर भाजपा मुख्य चैलेंजर के रूप में उभरी, फिर भी तृणमूल को हटा नहीं पाई। शिक्षक भर्ती घोटाले के बाद से तृणमूल कांग्रेस के सामने बस एक ही चिंता है कि इस बार अपने पांचवीं बार के विधायक पार्थ चटर्जी का एक योग्य उत्तराधिकारी ढूंढना है। इसके बाद 2026 के चुनाव भी उसके लिए ज्यादा मुश्किल नहीं हैं।

कोलकाता दक्षिण लोकसभा के सात हिस्सों में से एक कोलकाता पोर्ट असेंबली सीट है। 2011 से यहां तृणमूल कांग्रेस का दबदबा रहा है, जिसके उम्मीदवार फिरहाद हकीम हैं। हकीम ममता बनर्जी के राज में कैबिनेट मंत्री रहे हैं। हकीम ने पहली बार 2011 में यह सीट जीती थी, उसके बाद 2016 और 2021 में भाजपा के अवध किशोर गुप्ता को हराकर दबदबा बरकरार रखा हुआ है। 2026 में एक बार फिर तृणमूल कांग्रेस कोलकाता पोर्ट सीट पर अपना वर्चस्व बनाए रखने के लिए लगी हुई है।

भवानीपुर, जिसे भवानीपुर के नाम से भी जाना जाता है, कोलकाता दक्षिण लोकसभा सीट बनाने वाले सात हिस्सों में से एक है। भवानीपुर आज मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के घर के तौर पर जाना जाता है। 2011 में अपनी वापसी के बाद से, तृणमूल कांग्रेस यहां कभी नहीं हारी है, और बनर्जी खुद उपचुनावों और रेगुलर चुनावों में शानदार जीत हासिल करती रही हैं। हाल के चुनावी रुझानों से यह भी पता चलता है कि जब ममता बनर्जी स्वयं उम्मीदवार होती हैं, तब उन्हें भारी समर्थन मिलता है। हालांकि लोकसभा चुनावों में कभी-कभी भाजपा इस क्षेत्र में कड़ी टक्कर देती है। फिर भी भवानीपुर के मतदाताओं का बड़ा वर्ग ममता बनर्जी के प्रति वफादार माना जाता है। जैसे-जैसे 2026 के विधानसभा चुनाव करीब आ रहे हैं, माना जा रहा है कि यदि ममता बनर्जी यहां से चुनाव लड़ती हैं तो इस सीट पर उनका दबदबा बरकरार रहने की संभावना काफी मजबूत है।

रासबिहारी, एक सामान्य श्रेणी का विधानसभा क्षेत्र, कोलकाता के हृदय में स्थित है और कोलकाता दक्षिण लोकसभा सीट का हिस्सा है। ममता बनर्जी के तृणमूल कांग्रेस गठित करने के बाद से इसका समीकरण बदल गया। तृणमूल कांग्रेस ने 1998 के उपचुनाव में इस सीट को जीता और तब से लगातार अपने कब्जे में रखा हुआ है। 2021 में तृणमूल कांग्रेस ने रासबिहारी सीट से देबाशिष कुमार को मैदान में उतारा। कुमार ने भाजपा के ले. जनरल (डॉ.) सुभ्रत साहा को 21,414 वोटों से पराजित किया था। हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनाव में समीकरण बदले और भाजपा ने रासबिहारी विधानसभा क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत की। यह नजदीकी मुकाबला आगामी 2026 विधानसभा चुनाव के मद्देनजर तृणमूल कांग्रेस के लिए चुनौती बन गया है।

बालिगंज कोलकाता के सबसे पॉश और प्रभावशाली इलाकों में से एक है, और यह कोलकाता दक्षिण लोकसभा सीट के अंतर्गत आने वाला एक सामान्य श्रेणी का विधानसभा क्षेत्र है। 2006 के बाद से इस सीट पर तृणमूल कांग्रेस का दबदबा बन गया। 2011, 2016 और 2021 में सुब्रत मुखर्जी ने लगातार तीन बार जीत हासिल की। 2022 में उनके निधन के बाद हुए उपचुनाव में तृणमूल ने बाबुल सुप्रियो को उम्मीदवार बनाया, जिन्होंने सीपीआई(एम) की सायरा शाह हलीम को हराकर सीट बरकरार रखी। लोकसभा चुनावों में भी तृणमूल कांग्रेस को यहां लगातार बढ़त मिलती रही है, जबकि 2014 के बाद भाजपा मुख्य विपक्ष के रूप में उभरी है। हालांकि, वह अभी तक तृणमूल के प्रभुत्व को चुनौती नहीं दे पाई है। वर्तमान राजनीतिक स्थिति में तृणमूल कांग्रेस यहां मजबूत स्थिति में है और 2026 के विधानसभा चुनाव में भी उसे स्पष्ट बढ़त वाला दल माना जा रहा है, जबकि भाजपा और वाम-कांग्रेस गठबंधन अभी भी मजबूत चुनौती देने की स्थिति में नहीं हैं।

--आईएएनएस

एवाई/डीकेपी