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पश्चिम एशिया तनाव पर सैम पित्रोदा का आरोप- ताकतवर हमलावरों के साथ मिला भारत, नहीं दिखाई नैतिक श्रेष्ठता

नई दिल्ली, 2 अप्रैल (आईएएनएस)। भारतीय ओवरसीज कांग्रेस के प्रमुख सैम पित्रोदा ने पश्चिम एशिया में चल रहे विवाद पर भारत के रुख पर अपने विचार शेयर किए। उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि हमने नैतिक श्रेष्ठता नहीं दिखाई है। हम असल में अमीर और ताकतवर हमलावरों के साथ मिल गए हैं।
 
पश्चिम एशिया तनाव पर सैम पित्रोदा का आरोप- ताकतवर हमलावरों के साथ मिला भारत, नहीं दिखाई नैतिक श्रेष्ठता

नई दिल्ली, 2 अप्रैल (आईएएनएस)। भारतीय ओवरसीज कांग्रेस के प्रमुख सैम पित्रोदा ने पश्चिम एशिया में चल रहे विवाद पर भारत के रुख पर अपने विचार शेयर किए। उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि हमने नैतिक श्रेष्ठता नहीं दिखाई है। हम असल में अमीर और ताकतवर हमलावरों के साथ मिल गए हैं।

पश्चिम एशिया झगड़े में मध्यस्थ के तौर पर काम करने के पाकिस्तान के दावे को लेकर कांग्रेस नेता सैम पित्रोदा ने न्यूज एजेंसी आईएएनएस से कहा, "मुझे लगता है कि हर किसी को कोशिश करनी चाहिए, उन्हें इसका हक है। यह उनका हक है कि वे संबंध सुधारने और शांति लाने का तरीका ढूंढें। मेरे हिसाब से जितने ज्यादा लोग होंगे, उतना अच्छा होगा। हर किसी को अपनी कोशिश करनी चाहिए और देखना चाहिए कि क्या काम करता है। इस तरह की स्थिति में आपको कभी नहीं पता होता कि क्या काम करेगा और क्या नहीं।"

जब उनसे पूछा गया कि क्या पूर्व पीएम जवाहरलाल नेहरू भी पश्चिम एशिया पर वही पक्ष लेते जो लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने लिया? इस पर ओवरसीज कांग्रेस प्रमुख पित्रोदा ने कहा, "लेकिन वह एक आइडिया के लिए खड़े हैं। मेरे लिए, वह भारत के आइडिया के कस्टोडियन हैं, जो हमारे फाउंडिंग फादर्स ने हमें सौंपा है, जो सच्चाई, भरोसे, डेमोक्रेसी, डाइवर्सिटी, दूसरे इंसानों के लिए सम्मान और सभी के लिए सम्मान पर आधारित है। मेरे हिसाब से, यही आइडिया राहुल गांधी पेश करते। यह पाकिस्तान के खिलाफ नहीं है। यह अमेरिका के खिलाफ नहीं है। यह इजरायल के खिलाफ नहीं है। यह ईरान के खिलाफ नहीं है। यह कुछ खास मूल्यों के लिए है, जिनके लिए हम खड़े हैं।"

भारत के नक्सलवाद से आजाद होने को लेकर सैम पित्रोदा ने कहा, "मैं बातचीत में यकीन करता हूं। मैं जबरदस्ती में यकीन नहीं करता। मैंने कभी जबरदस्ती में यकीन नहीं किया, लेकिन आप जानते हैं कि इनमें से कुछ समस्याएं बहुत व्यापक हैं। यह 50 साल से चल रहा है और अगर आप इसकी जड़ तक जाते हैं, तो आपको समझना होगा कि इन लोगों ने हथियार क्यों उठाए। ऐसा नहीं है कि मैं इसे सही ठहरा रहा हूं, लेकिन मुझे लगता है कि आपको चीजों को हर किसी के एंगल से देखना होगा, न कि सिर्फ अपने एंगल से। आपको थोड़ी हमदर्दी रखनी होगी; आपको दूसरे लोगों की जगह जाकर वैसा ही करना होगा जैसा उन्होंने किया है और महात्मा गांधी भी यही चाहते थे। मुझे खुशी है कि कोई हिंसा नहीं है, मुझे खुशी है कि कोई डर नहीं है, लेकिन फिर किस कीमत पर? यह कैसे हुआ, यह बहुत व्यापक मामला है।"

--आईएएनएस

केके/वीसी