'परिवार से तय होगा रोकथाम, घर से तय करें परवरिश', दिल्ली स्लीपर बस गैंगरेप पर किरण बेदी
नई दिल्ली, 2 सितंबर (आईएएनएस)। दिल्ली में एक स्लीपर बस में कथित गैंगरेप की घटना पर पूर्व आईपीएस अधिकारी किरण बेदी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने महिलाओं के खिलाफ अपराधों को रोकने के लिए बेहतर रोकथाम, ड्राइवर वेरिफिकेशन और सख्ती बरतने की मांग की है।
किरण बेदी ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, "हर घटना के पीछे दो बातें होती हैं - रोकथाम और प्रतिक्रिया। रोकथाम का मतलब है कि ऐसी घटना नहीं हो और फिर आती है प्रतिक्रिया। अपराध की जड़ क्या है? चलती बस में महिला के साथ इन युवकों के गलत व्यवहार की जड़ क्या है? जब तक हम इस बीमारी की जड़ का इलाज नहीं ढूंढते हैं, यह हमें परेशान करती रहेगी, और यह बीमारी परिवारों में परवरिश से, लड़कों की परवरिश से आती है। हम सब चाहते हैं कि हमारे घर में लड़का पैदा हो, लेकिन कैसा लड़का? एक जिम्मेदार लड़का या एक दरिंदा? यह बहुत जरूरी है।"
उन्होंने कहा, "रोकथाम परिवारों की जिम्मेदारी है। परिवार में मां-बाप होते हैं। बच्चे पैदा करना आपका अधिकार है, लेकिन उसके बाद उन्हें सही ढंग से पालना-पोसना आपकी ड्यूटी है। अगर आप उस ड्यूटी को पूरा नहीं करते हैं, तो आप दूसरे लोगों की बेटियों को खतरे में डालते रहेंगे।"
पूर्व आईपीएस अधिकारी ने रोजगार और वेरिफिकेशन के मुद्दे पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा, "जब कोई किसी को रोजगार दे रहा है तो यह पता करें कि वह व्यक्ति कैसा है? ट्रांसपोर्ट ड्राइवर, बस ड्राइवर, स्कूल बस ड्राइवर को ही लें। हम स्टाफ के वेरिफिकेशन की बात तो करते हैं, लेकिन ड्राइवर के वेरिफिकेशन की बात क्यों नहीं करते? अगर वेरिफिकेशन किया जाए, तो ऐसे शिकारियों के रिकॉर्ड में कुछ न कुछ गड़बड़ी जरूर मिलेगी।"
उन्होंने कहा कि अगर उनके रिकॉर्ड में गड़बड़ी सामने आती है, तो कम से कम आप उन्हें दोबारा अपराध करने से रोक सकते हैं। कई कारण हैं, लेकिन अगर हम रोकथाम पर ध्यान दें, खासकर यह पक्का करें कि हम बिना वेरिफिकेशन के कमर्शियल ड्राइवरों को काम पर न रखें, तो उन्हें डर होगा कि उन्हें ऐसा काम नहीं मिलेगा। जब बसें पर्दों के साथ चलती हैं, तो कोई भी उन्हें देख सकता है, जिसमें ट्रैफिक पुलिस और आम लोग भी शामिल हैं। बस का नंबर नोट करें और पीसीआर को अलर्ट करें कि बस पर्दों के साथ चल रही है ताकि उसकी जांच की जा सके कि अंदर सीसीटीवी काम कर रहा है या नहीं।
उन्होंने कहा कि अगर हम रोकथाम पर ध्यान देना शुरू करें, एनफोर्समेंट में, समाज की ड्यूटी और जिम्मेदारी में, और परिवारों की जिम्मेदारी में, तो रोकथाम होगी। उसके बाद प्रतिक्रिया, कार्रवाई, गिरफ्तारी और अदालती कार्यवाही आती है, जिसमें कितना समय लगेगा पता नहीं।
उन्होंने आगे कहा, "सरकार कितना कर्तव्य करेगी। अगर परिवार खुद यह जिम्मेदारी नहीं उठाते, तो आप अपने बेटे की कैसी परवरिश कर रहे हैं? अगर वह स्कूल छोड़ रहा है, स्कूल या पढ़ाई में दिलचस्पी नहीं ले रहा है, तो उसकी दिलचस्पी किस चीज में है? वह कैसी संगत में है? इसके लिए सबसे पहले परिवार ही जिम्मेदार है। परिवारों की यह जिम्मेदारी है कि वे यह पक्का करें कि ऐसे लड़के शिकारी न बनें। अपने बच्चों की सही परवरिश करें। बचाव बहुत जरूरी है। इसके बाद रोजगार के जरिए बचाव आता है। इसलिए, अगर हम इन दो चीजों पर ध्यान दें, तो कम से कम इस तरह के अपराधों को रोका जा सकता है।"
--आईएएनएस
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