पेपर लीक से लेकर 'ऑपरेशन सिंदूर' और नासिक कुंभ तक, पृथ्वीराज चव्हाण ने सरकार को घेरा
मुंबई, 26 अगस्त (आईएएनएस)। वरिष्ठ कांग्रेस नेता और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने एमपीएससी समेत प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक, ऑपरेशन सिंदूर पर पूर्व सीडीएस अनिल चौहान का बयान, नासिक कुंभ के लिए प्रस्तावित खर्च और उत्तर प्रदेश में महिलाओं के लिए मुफ्त बस सेवा जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरा। उन्होंने पेपर लीक को बड़ा माफिया बताते हुए परीक्षा प्रणाली में आमूलचूल बदलाव की जरूरत बताई।
एमपीएससी पेपर लीक की जांच पर पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा कि पिछले 5-6 वर्षों से देश में लगातार प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक होने की खबरें सामने आती रही हैं। यह एक बड़ा नेटवर्क बन गया है, जिसमें पेपर लीक करने वाले, बेचने वाले और खरीदने वाले शामिल हैं। कई मामलों में पेपर लीक का पता तब तक नहीं चलता, जब तक कोई जागरूक नागरिक इसकी शिकायत नहीं करता। इस पूरे खेल में आरोपियों के लिए जोखिम कम और आर्थिक लाभ बहुत ज्यादा है। महंगे कोचिंग संस्थान पेपर खरीदते हैं और फिर छात्रों को लाखों रुपए में उपलब्ध कराए जाते हैं। जब तक दोषियों को निश्चित रूप से सजा नहीं मिलेगी, तब तक इस तरह का कारोबार जारी रहेगा।
उन्होंने 2024 में नीट पेपर लीक के बाद बनाए गए कानून का जिक्र करते हुए सवाल किया कि सख्त कानून होने के बावजूद पेपर लीक क्यों नहीं रुक रहे हैं? केवल सजा बढ़ाने से समस्या का समाधान नहीं होगा। परीक्षा प्रणाली में बुनियादी बदलाव करना जरूरी है।
ऑपरेशन सिंदूर को लेकर पूर्व सीडीएस अनिल चौहान के बयानों पर चव्हाण ने कहा कि उन्होंने अभियान के दौरान भारतीय विमानों के नुकसान की बात स्वीकार की थी, हालांकि उन्होंने नुकसान की संख्या को लेकर अलग जानकारी दी थी। सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि आखिर कितने विमान क्षतिग्रस्त या नष्ट हुए और इसकी वास्तविक परिस्थितियां क्या थीं।
कांग्रेस नेता ने पहलगाम आतंकी हमले और ऑपरेशन सिंदूर दोनों की व्यापक जांच के लिए एक समिति गठित करने की मांग की। उन्होंने कारगिल युद्ध के बाद अटल बिहारी वाजपेयी सरकार द्वारा गठित समीक्षा प्रक्रिया का उदाहरण देते हुए कहा कि गलतियों की पहचान करने और सुरक्षा व्यवस्था सुधारने के लिए ऐसी जांच जरूरी है। चव्हाण ने सवाल उठाया कि यदि किसी स्तर पर खुफिया या सुरक्षा संबंधी लापरवाही हुई है तो उसे स्वीकार करने में सरकार को परेशानी क्यों है? उनके मुताबिक, भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए वास्तविक स्थिति सामने आना जरूरी है।
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सैन्य अभियान के दौरान भारत को शुरुआती नुकसान हुआ था तो बाद में घटनाक्रम किस तरह बदला और संघर्ष को रोकने की परिस्थितियां क्या थीं। चव्हाण ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर का पूरा इतिहास देश के सामने आना चाहिए।
नासिक कुंभ को लेकर सुप्रीम कोर्ट के जज की टिप्पणी पर चव्हाण ने कहा कि यदि अदालत ने यह कहा है कि कुंभ पर होने वाले खर्च का छोटा हिस्सा भी स्कूलों पर खर्च किया जाए तो शिक्षा व्यवस्था को फायदा हो सकता है, तो वह इस विचार से सहमत हैं। उन्होंने दावा किया कि नासिक कुंभ के लिए करीब 35 हजार करोड़ रुपए खर्च किए जाने की चर्चा है। यह महाराष्ट्र की जनता का पैसा है और किसी नेता की निजी संपत्ति नहीं है। उन्हें नासिक के विकास और कुंभ के आयोजन पर खर्च से आपत्ति नहीं है, लेकिन सरकार को पहले जनता से पूछना चाहिए कि उनकी प्राथमिकताएं क्या हैं। उन्होंने सार्वजनिक सुनवाई, पर्यावरण प्रभाव आकलन और सामाजिक प्रभाव आकलन कराने की मांग की।
चव्हाण ने कहा कि यदि सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद जनता की जरूरतों के अनुसार खर्च किया जाता है तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं होगी। उन्होंने संकेत दिया कि वह जल्द ही नासिक कुंभ के मुद्दे पर विस्तृत प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे।
उत्तर प्रदेश में 60 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं के लिए मुफ्त बस सेवा शुरू किए जाने को लेकर चव्हाण ने इसे आगामी विधानसभा चुनाव से जोड़कर देखा। उन्होंने कहा कि चुनाव अगले साल होने हैं और सत्ता में वापसी के लिए सरकार की ओर से अलग-अलग वर्गों के लिए योजनाएं लाई जा सकती हैं। अभी महिलाओं के लिए योजनाएं आ रही हैं, आगे पुरुषों के लिए भी घोषणाएं देखने को मिल सकती हैं। आने वाले चुनाव में युवा मतदाता महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने कहा कि चाहे जेनजी हो, जेन-अल्फा हो या मिलेनियल्स, युवा पीढ़ी बीजेपी को सत्ता से बाहर करने का मन बना चुकी है।
--आईएएनएस
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