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पेपर लीक पर केवल सख्त कानून नहीं, शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार भी जरूरी: मायावती

लखनऊ, 29 जुलाई (आईएएनएस)। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने पेपर लीक रोकने के लिए सख्त सजा का प्रावधान करने वाले विधेयक को लोकसभा से पारित किए जाने के बाद कहा कि केवल कठोर कानून बना देने से इस गंभीर समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। उन्होंने कहा कि सरकार को अपराध होने के बाद सजा देने के बजाय ऐसी व्यवस्था विकसित करनी चाहिए, जिससे पेपर लीक जैसी घटनाओं को पहले ही रोका जा सके।
 

लखनऊ, 29 जुलाई (आईएएनएस)। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने पेपर लीक रोकने के लिए सख्त सजा का प्रावधान करने वाले विधेयक को लोकसभा से पारित किए जाने के बाद कहा कि केवल कठोर कानून बना देने से इस गंभीर समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। उन्होंने कहा कि सरकार को अपराध होने के बाद सजा देने के बजाय ऐसी व्यवस्था विकसित करनी चाहिए, जिससे पेपर लीक जैसी घटनाओं को पहले ही रोका जा सके।

बसपा प्रमुख मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट कर लिखा कि देश में पेपर लीक के जघन्य अपराध व उसके कारण नौजवान छात्र-छात्राओं का उनका भविष्य अंधकार होता देख अनेकों द्वारा आत्महत्या जैसी अति-दुखद घटनाओं की रोकथाम के उपाय के रूप में संसद ने एक बार फिर से एक और सख्त सजा के प्रावधान वाला कानून बनाने वाला बिल लोकसभा ने आज अन्ततः पास कर दिया है, लेकिन क्या केवल इससे समस्या का समाधान हो जाएगा, इसकी चिंता लोगों में बरकरार है, क्योंकि लोगों को यह आपाधापी/जल्दबाजी में लिया गया एक और कदम ज्यादा लगता है, जबकि अन्य और भी उपायों को तत्काल सख्ती से लागू करने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि वास्तव में यह कदम भी पेपर लीक होने के बाद सख्त सजा का प्रावधान करता है, जबकि पेपर लीक का पूरा मामला इस महा अपराध को होने देने से पहले ही इसे रोकने का है, अर्थात अपराध नियंत्रण ज्यादा महत्वपूर्ण है, जो कि अधिकतर मामलों में यहां कहीं भी प्रभावी होता हुआ नजर नहीं आता है, और यह पेपर लीक के पिछले कानून के निष्प्रभावी होने से भी स्पष्ट है।

मायावती ने कहा कि हकीकत में अन्य अपराधों की तरह पेपर लीक जैसे जघन्य अपराध के नियंत्रण के लिए सख्त से सख्त कानून से अधिक इसकी रोकथाम हेतु बेहतर से बेहतर उपाय करने की जरूरत है, जिसके तहत शिक्षा के लिए शोषणकारी ऋण को सस्ता करके उसे कल्याणकारी बनाना, सरकारी स्कूलों में अच्छी शिक्षा आदि सहित पूरी शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की जरूरत है, ताकि गरीबों, उपेक्षितों, शोषितों व अन्य मेहनतकश लोगों के बच्चे भी समता व समानता के साथ आगे बढ़ सकें, जो परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के कल्याणकारी संविधान का उद्देश्य तो है किन्तु इसका हर स्तर पर वर्तमान में घोर अभाव है।

उन्होंने कहा कि दरअसल अमीर परिवारों के लोग तो धनबल के आधार पर अपनी मनमानी व मनचाही पढ़ाई आदि प्राप्त कर लेते हैं, किन्तु करोड़ों ग़रीब परिवारों के बच्चे-बच्चियों का क्या जो होनहार होने के बावजूद अपना जीवन संवार नहीं पाते हैं। उन्होंने आगे कहा कि वैसे भी पेपर लीक शिक्षा व्यवस्था में बिगाड़ का केवल एक उदाहरण है, जबकि शिक्षा व्यवस्था में बिगाड़ की जड़ काफी गहरी व अति-गंभीर है। इसके निदान के लिए दृढ़ इच्छाशक्ति व नेक नीयत के साथ अनवरत ईमानदार प्रयास की जरूरत है, तभी कुछ मुट्ठी भर लोगों के बजाय करीब 140 करोड़ लोगों का यह देश आगे बढ़ पाएगा।

मायावती ने कहा कि यह अति-दुखद है कि पेपर लीक रोकथाम संबंधी बिल पर भी बहस के दौरान अधिकतर पार्टियां दलगत राजनीति से ऊपर नहीं उठ पाईं, अर्थात् संसद में चर्चा के दौरान पूरी गंभीरता कम व एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप ही ज्यादा रहा। ऐसे में, क्या नया बनने वाला यह पेपर लीक निरोधक कानून कितना सार्थक होगा, इससे लोगों का शंकित होना उचित है। उन्होंने कहा कि ऐसे में मूल प्रश्न यही है कि क्या कानून पर कानून इस जटिल समस्या का सही समाधान कर पाएगा? सरकार इसके अलावा भी अन्य बेहतर उपायों पर भी जरूर विचार करे तो यह देश के उज्जवल भविष्य के लिए बेहतर होगा।

--आईएएनएस

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