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पेपर लीक मामले में जवाबदेही से भाग रही सरकार, नए कानून की बात गुमराह करना : जगत सिंह नेगी

शिमला, 24 जुलाई (आईएएनएस)। हिमाचल प्रदेश के राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने शिक्षा व्यवस्था और पेपर लीक के मुद्दे पर केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के आंदोलन ने देशभर के युवाओं को नई ऊर्जा और प्रेरणा दी है।
 

शिमला, 24 जुलाई (आईएएनएस)। हिमाचल प्रदेश के राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने शिक्षा व्यवस्था और पेपर लीक के मुद्दे पर केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के आंदोलन ने देशभर के युवाओं को नई ऊर्जा और प्रेरणा दी है।

उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार पेपर लीक जैसे गंभीर मामलों में जवाबदेही से बच रही है और नए कानून बनाने की बात कहकर लोगों को गुमराह कर रही है, जबकि जरूरी कानूनी प्रावधान पहले से मौजूद हैं।

जगत सिंह नेगी ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि सोनम वांगचुक ने इस आंदोलन की शुरुआत कर एक मजबूत दिशा दी। उन्होंने लंबे समय तक अनशन किया और बाद में उसे समाप्त किया, लेकिन केंद्र सरकार ने इस आंदोलन के मूल मुद्दों पर गंभीरता से काम नहीं किया। सरकार नए कानून बनाने की बात कर रही है, जबकि जरूरत पहले से मौजूद कानूनों को प्रभावी ढंग से लागू करने की है। पिछले 12 वर्षों में देश में 152 बार पेपर लीक की घटनाएं हुईं, जिससे लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ। इन घटनाओं के कारण कई छात्र-छात्राओं ने आत्महत्या तक की, लेकिन सरकार ने इसकी नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार नहीं की।

उन्होंने सवाल उठाया कि जब ईडी और सीबीआई जैसी एजेंसियां केंद्र सरकार के अधीन हैं, तो पेपर लीक के आरोपियों के खिलाफ तेज और प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?

नेगी ने कहा कि सरकार अन्य मामलों में बिना पर्याप्त सबूत के लोगों को लंबे समय तक जेल में रखती है, लेकिन पेपर लीक जैसे मामलों में आरोपी समय पर चार्जशीट दाखिल नहीं होने से जमानत पर बाहर आ जाते हैं।

उन्होंने विशेष रूप से नीट पेपर लीक मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि 90 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल न होने से आरोपियों को राहत मिली, जो जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। पेपर लीक मामलों में करोड़ों रुपए का लेन-देन होता है, इसलिए मनी लॉन्ड्रिंग के पहलू की भी जांच होनी चाहिए। यदि आर्थिक अपराधों के मामलों में ईडी सक्रिय हो सकती है, तो पेपर लीक मामलों में भी संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए।

राजस्व मंत्री ने केंद्र सरकार से पूछा कि यदि उनकी मंशा वास्तव में परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी बनाना है, तो उपलब्ध कानूनों के तहत तत्काल और कठोर कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही? केवल नए कानून बनाने की घोषणा से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि राजनीतिक इच्छाशक्ति और प्रभावी क्रियान्वयन ही पेपर लीक पर रोक लगा सकता है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में मंत्रिमंडल की सामूहिक जिम्मेदारी होती है। यदि शिक्षा व्यवस्था में इतनी बड़ी विफलता सामने आई है, तो संबंधित मंत्रालय के मंत्री को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देना चाहिए। भाजपा सरकार नैतिक जिम्मेदारी से बच रही है। इसी कारण लोगों का भरोसा कमजोर हो रहा है।

युवाओं के आंदोलन की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार ने शुरुआत में इसे सीमित प्रदर्शन समझा था, लेकिन यह आंदोलन अब पूरे देश में फैल चुका है और युवाओं को जागरूक कर रहा है। विदेश में रहने वाले भारतीय छात्र और प्रवासी भारतीय भी परीक्षा प्रणाली में भ्रष्टाचार और लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्थिति को लेकर अपनी चिंता खुलकर व्यक्त कर रहे हैं। देश के युवाओं का भविष्य सुरक्षित रखने के लिए सरकार को राजनीतिक बयानबाजी छोड़कर मौजूदा कानूनों का सख्ती से पालन करना चाहिए और पेपर लीक मामलों के दोषियों के खिलाफ शीघ्र एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए।

--आईएएनएस

पीएसके/एबीएम