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केवल बयानों से जंग जीतने का दावा करने वाले ख्वाजा आसिफ, कर रहे खुली जंग का ऐलान, सुर 'दमा-दम मस्त कलंदर' का!

इस्लामाबाद, 27 फरवरी (आईएएनएस)। देश की सेना सीमा पर पड़ोसी के साथ जंग लड़ रही हो और उसका रक्षामंत्री अजब-गजब टिप्पणी दे सबकी फजीहत कराए, ऐसा बहुत कम होता है। लेकिन पाकिस्तान के ख्वाजा एम आसिफ ऐसा करने में माहिर हैं। उन्होंने अफगानिस्तान के खिलाफ खुली जंग का ऐलान करते हुए अतरंगी और अजब-गजब बयान दे डाला है।
 
केवल बयानों से जंग जीतने का दावा करने वाले ख्वाजा आसिफ, कर रहे खुली जंग का ऐलान,  सुर 'दमा-दम मस्त कलंदर' का!

इस्लामाबाद, 27 फरवरी (आईएएनएस)। देश की सेना सीमा पर पड़ोसी के साथ जंग लड़ रही हो और उसका रक्षामंत्री अजब-गजब टिप्पणी दे सबकी फजीहत कराए, ऐसा बहुत कम होता है। लेकिन पाकिस्तान के ख्वाजा एम आसिफ ऐसा करने में माहिर हैं। उन्होंने अफगानिस्तान के खिलाफ खुली जंग का ऐलान करते हुए अतरंगी और अजब-गजब बयान दे डाला है।

ख्वाजा ने एक्स अकाउंट पर जो बयान जारी किया वो हिदायत कम लेकिन किसी पिटी हुई फिल्म का संवाद जरूर लगता है। उन्होंने अफगानिस्तान को दुश्मन भी बोला है, पड़ोसी भी, और फिर अल्लाह को याद करते हुए देख लेने की धमकी भी दी है। गजब-लील-हक ('सच के लिए गुस्सा' या 'न्याय के लिए प्रकोप') का ऐलान होने के कुछ देर बाद लंबा-चौड़ा बयान जारी किया।

इसमें ख्वाजा ने खुली जंग का ऐलान करते हुए कहा कि "इस्लामाबाद के सब्र का बांध टूट चुका है" और तालिबान सरकार पर दहशतगर्दों को पनाह देने का आरोप लगाया।

रक्षा मंत्री ने फिर अतरंगी 'दमा दम मस्त कलंदर' की घोषणा की। उन्होंने कहा, "हमारे सब्र का बांध टूट चुका है। यह हमारे और आपके बीच खुली जंग है। अब 'दमा दम मस्त कलंदर' होगा। पाकिस्तान की सेना समुद्र पार से नहीं आई है। हम आपके पड़ोसी हैं; हम आपके अंदर और बाहर की बातें जानते हैं। अल्लाहु अकबर।"

"दमा दम मस्त कलंदर" का शाब्दिक अर्थ "हर सांस में मस्त रहने वाला कलंदर" (सूफी संत या घुमक्कड़) होता है। अब ख्वाजा किस धारा को कहां मोड़ना चाह रहे हैं, ये असमंजस और बौखलाहट साफ दिखती है।

वैसे ख्वाजा साहब फितरती ऐसा बयान देने में माहिर हैं। हाल ही (फरवरी 2026) में इन्होंने अपनी संसद में पाकिस्तान की हालत को लेकर दुखड़ा रोया था। आसिफ संसद में बोल गए कि अमेरिका ने पाकिस्तान को 'टॉयलेट पेपर से भी बदतर' इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में 'मेड इन अमेरिका जिहाद' लड़ा और 9/11 के बाद खुद को अमेरिका के लिए ‘किराए पर उपलब्ध’ देश बना लिया।

भारत के साथ मई 2025 में हुए 12 दिन के युद्ध को लेकर भी जब-तब अपना फ्रस्ट्रेशन जाहिर करते रहे हैं। धार्मिक भावनाओं को अक्सर जोड़ देते हैं। भारत और अफगानिस्तान से घिरे रहने के नुकसान का भी जिक्र करते हैं। नवंबर 2025 में उन्होंने स्थानीय मीडिया से बात करते हुए दावा किया था कि अल्लाह ने पहले राउंड में मदद की, अब दूसरे में भी करेगा। यहां पहला राउंड भारत के साथ संघर्ष और दूसरा तालिबान के साथ संघर्ष की ओर इशारा था।

ख्वाजा का एक और बयान हंसी ठिठोली का पात्र बना। उन्होंने इसी साल जनवरी में दम भरा कि पाकिस्तान अब आईएमएफ के आगे भीख नहीं मांगेगा क्योंकि मई संघर्ष के बाद उसके हथियारों की मांग बढ़ गई है।

--आईएएनएस

केआर/