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पहलगाम आतंकी हमले की बरसी पर आदिल हुसैन के परिवार का छलका दर्द, बोले-बेटे की शहादत पर गर्व

अनंतनाग, 22 अप्रैल (आईएएनएस)। आज ही के दिन जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकियों ने नरंसहार किया था। आतंकियों के हमले में 26 लोगों की जान चली गई थी। इसमें 25 पर्यटक और एक स्थानीय टट्टू-चालक (घोड़ा चालक) आदिल हुसैन शाह भी शामिल थे। पहलगाम की पहली बरसी पर परिवार के लोग आदिल हुसैन शाह को याद करते हुए भावुक हो गए। परिवार कहता है कि वे हर पल उनकी कमी महसूस करते हैं। इस असहनीय दुख के बावजूद वे अपने मन में गर्व का भाव भी संजोए हुए हैं।
 
पहलगाम आतंकी हमले की बरसी पर आदिल हुसैन के परिवार का छलका दर्द, बोले-बेटे की शहादत पर गर्व

अनंतनाग, 22 अप्रैल (आईएएनएस)। आज ही के दिन जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकियों ने नरंसहार किया था। आतंकियों के हमले में 26 लोगों की जान चली गई थी। इसमें 25 पर्यटक और एक स्थानीय टट्टू-चालक (घोड़ा चालक) आदिल हुसैन शाह भी शामिल थे। पहलगाम की पहली बरसी पर परिवार के लोग आदिल हुसैन शाह को याद करते हुए भावुक हो गए। परिवार कहता है कि वे हर पल उनकी कमी महसूस करते हैं। इस असहनीय दुख के बावजूद वे अपने मन में गर्व का भाव भी संजोए हुए हैं।

आदिल हुसैन के पिता सैयद हैदर शाह ने कहा, "22 अप्रैल को हुई वह घटना हमारे लिए बेहद खतरनाक और दुखद थी। असल में क्या हुआ था, यह सिर्फ हम ही जानते हैं क्योंकि उस घटना ने हमारे बेटे को हमसे छीन लिया और हमसे हमेशा के लिए अलग कर दिया। यह एक दिल दहला देने वाली घटना थी।"

सैयद हैदर शाह ने कहा, "22 अप्रैल 2025 को सुबह आठ बजे आदिल घर से निकल गया था। दोपहर 2 बजे तक हम लोग खुश थे, जब 2 बजे हमें ने सुना कि पहलगाम में गोलियां चल रही हैं। इसके बाद आदिल को फोन किया लेकिन लगा नहीं तो हमने सोचा कि नेटवर्क नहीं होगा। फोन लगातार करते रहे लेकिन संपर्क नहीं हो पाया। शाम करीब 4:30 से 5:45 के बीच फोन ऑन हुआ तो हमने कॉल किया लेकिन रिसीव नहीं हुआ। जब शाम 6 बजे तक कुछ नहीं पता चला तो थाने पहुंचकर रिपोर्ट दर्ज कराई। पहलगाम जाने की अनुमति मांगी लेकिन नहीं मिली। इसके बाद वह घर आ गए। शाम को पता चला कि आदिल का शव पहलगाम अस्पताल में है। आदिल की मौत के बाद सरकार और नेताओं का बहुत सपोर्ट मिला। सरकारी नौकरी के साथ पैसे भी मिले। इसके साथ ही मकान बनाकर मिला।"

पहलगाम जैसी जगहों पर पर्यटन और रोज़मर्रा की आजीविका आपस में गहराई से जुड़ी हुई हैं, ऐसे हमलों का असर पीड़ितों से कहीं आगे तक फैलता है। ये हमले कामगारों, परिवारों और सुरक्षा की उस भावना को प्रभावित करते हैं, जिस पर समुदाय निर्भर करते हैं। आदिल जैसे लोगों को याद करना यह सुनिश्चित करने में मदद करता है कि यह कहानी सिर्फ आंकड़ों तक सीमित न रह जाए बल्कि वास्तविक जिंदगी और उनके स्थायी प्रभाव से जुड़ी रहे।

आदिल के भाई नौशाद ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, "उस दिन कश्मीर और पूरे हिंदुस्तान के लिए ब्लैक डे था। हर किसी को इस दुनिया से तो जाना ही है लेकिन आखिरी समय अगर इंसान कोई अच्छा काम करके जाता है तो फक्र महसूस होता है। आदिल को जो दर्जा मिला है, वह शहीद हुए हैं तो यह हमारे लिए बहुत ही गर्व की बात है। आदिल के जाने से परेशानी तो हुई है। मैं घरवालों को यही बोलता हूं कि नहीं आप यह चीज सोचो कि उन्होंने काम कौन सा किया है, उनको अल्ला ने शाहदत नसीब किया है तो यह बहुत बड़ा दर्जा है।"

नौशाद ने कहा, "राज्य और केंद्र सरकार का बहुत समर्थन मिला है। स्थानीय और पूरे देश के नेताओं का सहयोग पूरे परिवार को मिला है। महाराष्ट्र के तत्कालीन डिप्टी सीएम ने एक साल पहले पैसे दिए थे और एक मकान देने का वादा किया था। आज पूरा मकान बनकर तैयार हो चुका है। आज उस घर का शुभारंभ है।"

नौशाद ने कहा, "हमारे दुश्मनों को ये देखा नहीं गया कि जम्मू कश्मीर में अन्य जगहों के लोग आ रहे हैं, इसीलिए आतंकी घटना को अंजाम दिया गया था। पूरे देश के लोगों से अपील है कि कश्मीर आएं और यहां की सुंदरता देखें। कश्मीर के स्थानीय लोग हमेशा अमन चाहते हैं। कश्मीरी के स्थानीय गलत काम नहीं कर सकते हैं। अगर लोग कश्मीर आना छोड़ देंगे तो दुश्मन मकसद में कामयाब हो जाएगा।"

--आईएएनएस

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