भानुमति रामकृष्ण: सिनेमा की पहली महिला सुपरस्टार, जिन्होंने तीन भाषाओं की फिल्मों में काम कर रचा इतिहास
नई दिल्ली, 6 सितंबर (आईएएनएस)। सिनेमा की दुनिया में कई सितारे आए और गए लेकिन कुछ दिग्गज ऐसे हैं जिनकी कला, अभिनय और व्यक्तित्व ने उन्हें हमेशा के लिए लोगों के दिलों में बसा दिया। ऐसा ही एक नाम है पी. भानुमति रामकृष्ण। पी भानुमति रामकृष्ण सिर्फ एक अभिनेत्री नहीं थीं बल्कि वह गायिका, संगीतकार, फिल्म निर्माता, निर्देशक और लेखिका भी थीं। उन्हें तेलुगु सिनेमा की पहली महिला सुपरस्टार के रूप में भी जाना जाता है।
1940 और 1950 का दशक भारतीय सिनेमा के लिए बदलाव का दौर था। उस समय देश में सोने की कीमत औसतन करीब 90 रुपये प्रति तोला हुआ करती थी। इसी दौर में एक ऐसी अभिनेत्री थीं जो एक फिल्म के लिए करीब 25 हजार रुपये फीस लिया करती थीं। उनका नाम था पालिवई भानुमति रामकृष्ण, जिन्हें आमतौर पर पी. भानुमति के नाम से जाना जाता है। उनकी फीस कई फिल्मों के कुल बजट का लगभग आधा हिस्सा हुआ करती थी। यही वजह थी कि उन्हें भारतीय सिनेमा की शुरुआती दौर की सबसे महंगी अभिनेत्रियों में गिना जाता है।
पी. भानुमति का जन्म 7 सितंबर 1925 को तत्कालीन मद्रास प्रेसीडेंसी के ओंगोल में हुआ था, जो अब आंध्र प्रदेश में है। उनके माता-पिता सरस्वतम्मा और बोम्माराजू वेंकट सुब्बैया संगीत के अच्छे जानकार थे। भानुमति अपने माता-पिता की तीसरी संतान थीं। घर में संगीत का माहौल होने के कारण उन्हें बचपन से ही संगीत की शिक्षा मिलने लगी थी।
महज 13 वर्ष की उम्र में उन्हें फिल्म ‘वर विक्रयम’ में काम करने का मौका मिला। वर्ष 1939 में रिलीज हुई इस फिल्म में उन्होंने कलिंदी नामक लड़की की भूमिका निभाई थी जिसकी जबरन एक बुजुर्ग व्यक्ति से शादी कर दी जाती है। यह किरदार बेहद भावुक और चुनौतीपूर्ण था। इसके बाद वह ‘मालती माधवम’, ‘धर्म पत्नी’ और ‘भक्तिमाला’ जैसी फिल्मों में नजर आईं।
हालांकि, उन्हें व्यापक पहचान फिल्म ‘कृष्ण प्रेम’ से मिली और इसके बाद उनके करियर ने तेजी से उड़ान भरी। करीब छह दशक लंबे अपने करियर में उन्होंने तमिल, तेलुगु और हिंदी सिनेमा में काम किया और अपनी बहुमुखी प्रतिभा की ऐसी छाप छोड़ी, जिसे आज भी याद किया जाता है।
1951 में रिलीज हुई फिल्म ‘मल्लेश्वरी’ भानुमति के करियर की सबसे महत्वपूर्ण फिल्मों में से एक मानी जाती है। इस फिल्म में उन्होंने एनटी रामाराव के साथ अभिनय किया था। फिल्म की कहानी, संगीत और कलाकारों के अभिनय को दर्शकों ने खूब पसंद किया। आज भी ‘मल्लेश्वरी’ को दक्षिण भारतीय सिनेमा की महत्वपूर्ण क्लासिक फिल्मों में गिना जाता है।
भानुमति ने सिर्फ अभिनय तक खुद को सीमित नहीं रखा। वर्ष 1953 में उन्होंने ‘चंदीरानी’ फिल्म का निर्देशन किया और इस तरह भारतीय सिनेमा की शुरुआती महिला निर्देशकों में एक ऐतिहासिक स्थान बनाया। खास बात यह थी कि फिल्म को तमिल, तेलुगु और हिंदी तीनों भाषाओं में बनाया गया था।
भानुमति ने अपने अभिनय के दम पर कई महत्वपूर्ण पुरस्कार हासिल किए। 1962 में आई तमिल फिल्म ‘अन्ने’ में उनके अभिनय की काफी सराहना हुई। इसके अलावा ‘अंतस्थुलु’ और ‘पलनाटि युद्धम’ जैसी फिल्मों के लिए भी उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिला। वर्ष 1966 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया। वह इस सम्मान को पाने वाली दक्षिण भारतीय सिनेमा की प्रमुख शुरुआती महिला कलाकारों में शामिल थीं। बाद में भारतीय सिनेमा में उनके व्यापक योगदान को देखते हुए वर्ष 2001 में उन्हें पद्म भूषण से भी सम्मानित किया गया।
भानुमति की निजी जिंदगी भी काफी दिलचस्प रही। फिल्म ‘कृष्ण प्रेम’ की शूटिंग के दौरान उन्हें फिल्म के असिस्टेंट डायरेक्टर पी. रामकृष्ण से प्यार हो गया। दोनों ने परिवार की इच्छा के खिलाफ जाकर घर से भागकर शादी कर ली। शादी के बाद भी भानुमति ने अपने पति के साथ मिलकर फिल्म निर्माण के क्षेत्र में काम जारी रखा। कहा जाता है कि उन्होंने रामकृष्ण के साथ मिलकर फिल्म निर्माण को आगे बढ़ाया और एक स्टूडियो की स्थापना में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके जीवन में प्रेम और करियर दोनों ही बेहद महत्वपूर्ण रहे।
--आईएएनएस
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