ओटीएस में बना रिकॉर्ड: ‘विद्युत सखी’ मॉडल से 3,227 करोड़ रुपए से अधिक बिल वसूली
लखनऊ, 1 मार्च (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश में ग्रामीण महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक नया अध्याय जुड़ गया है। डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के नेतृत्व में संचालित ‘विद्युत सखी’ कार्यक्रम ने बिजली बिल संग्रह के क्षेत्र में रिकॉर्ड स्थापित करते हुए अब तक 3,227 करोड़ रुपए से अधिक की वसूली की है।
राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन और उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड के बीच अभिसरण से संचालित यह कार्यक्रम ग्रामीण स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने का सशक्त माध्यम बनकर उभरा है। उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि इस पहल से महिलाओं की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और समाज में उनका मान-सम्मान भी बढ़ा है। उन्होंने इसे महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने की दिशा में प्रभावी कदम बताया।
राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की निदेशक दीपा रंजन के अनुसार, कार्यक्रम की शुरुआत से अब तक 1.40 करोड़ से अधिक बिजली बिलों का संग्रह किया गया है, जिससे 42 करोड़ रुपए से अधिक का कमीशन अर्जित हुआ है। फरवरी 2026 तक प्रदेश में 15,413 सक्रिय विद्युत सखियां ग्रामीण क्षेत्रों में उपभोक्ताओं को अंतिम छोर तक सेवाएं दे रही हैं। दिसंबर 2025 से फरवरी 2026 के बीच संचालित एकमुश्त समाधान योजना (ओटीएस) के दौरान 657 करोड़ रुपए का बिल संग्रह दर्ज किया गया। इसमें दिसंबर में 349 करोड़, जनवरी में 188 करोड़ और फरवरी में 120 करोड़ रुपए की वसूली शामिल है।
इस अवधि में लगभग 17.75 लाख बिलों का निस्तारण हुआ और 8 करोड़ रुपये से अधिक का कमीशन अर्जित किया गया। जिला स्तर पर सहारनपुर, सुल्तानपुर, मेरठ और अमेठी ने उल्लेखनीय प्रदर्शन किया। व्यक्तिगत स्तर पर भी कई प्रेरक उदाहरण सामने आए। अमेठी की सोनी द्विवेदी ने 3.1 करोड़ रुपए, रामपुर की मेहर जहां ने 2.7 करोड़ रुपए और बाराबंकी की राजश्री शुक्ला ने 2.3 करोड़ रुपए का बिल संग्रह किया।
प्रदेश की 70 विद्युत सखियों ने ओटीएस अवधि में एक-एक करोड़ रुपए से अधिक की वसूली कर नया कीर्तिमान स्थापित किया। अधिकारियों के अनुसार, ‘विद्युत सखी’ कार्यक्रम अब केवल बिल संग्रह तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण, पारदर्शी बिजली वितरण व्यवस्था और उपभोक्ताओं को घर-घर सेवा उपलब्ध कराने का सफल मॉडल बन चुका है। यह पहल दर्शाती है कि अवसर मिलने पर महिलाएं प्रशासनिक और आर्थिक दोनों स्तरों पर प्रभावी भूमिका निभा सकती हैं।
--आईएएनएस
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