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ओमान के शिनास बंदरगाह से गुजर रहे जहाज पर हमला, भारतीय दूतावास ने कहा- हमारी पूरी नजर

नई दिल्ली/मस्कट, 11 जून (आईएएनएस)। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजर रहे एक और जहाज को नुकसान की खबर है। ओमान स्थित दूतावास ने एक्स पर बयान जारी कर कहा है कि उनकी नजर इस पूरी घटना पर बनी हुई है।
 
ओमान के शिनास बंदरगाह से गुजर रहे जहाज पर हमला, भारतीय दूतावास ने कहा- हमारी पूरी नजर

नई दिल्ली/मस्कट, 11 जून (आईएएनएस)। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजर रहे एक और जहाज को नुकसान की खबर है। ओमान स्थित दूतावास ने एक्स पर बयान जारी कर कहा है कि उनकी नजर इस पूरी घटना पर बनी हुई है।

एक्स पर दूतावास ने कहा, "हमें गुरुवार को ओमान के शिनास बंदरगाह के निकट एक वेसल (पोत) से जुड़ी घटना की जानकारी मिली है। हम स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं और अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए स्थानीय अधिकारियों के साथ समन्वय कर रहे हैं।"

वहीं, भारतीय फॉरवर्ड सीमेन यूनियन ने जहाज से उठते धुएं की तस्वीरें साझा करते हुए बताया कि ये एमटी जलवीर हैं। उन्होंने लोकेशन के साथ इसकी जानकारी दी है, जिससे स्पष्ट होता है कि यह स्थान ओमान की खाड़ी में, शिनास के तट से कुछ दूरी पर स्थित है, जो ओमान के उत्तरी भाग में है। यह क्षेत्र ओमान और यूएई के समुद्री मार्गों के निकट पड़ता है।

मंगलवार को ही एक पालाउ-ध्वज वाले वाणिज्यिक जहाज पर हमला हुआ था। इसमें मौजूद 24 में से 21 नाविकों को सुरक्षित बचा लिया गया था, जबकि तीन लापता बताए गए। भारत ने इस हमले पर कड़ा विरोध दर्ज कराया था।

भारत के विदेश मंत्रालय ने बुधवार को पुष्टि की कि उसने नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास के उप प्रमुख जैसन मीक्स को तलब कर इस घटना पर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया था।

अमेरिकी सेना की यूनाइटेड स्टेट्स सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने दावा किया था कि उसने मंगलवार शाम ओमान की खाड़ी से गुजर रहे सेट्टेबेलो नामक जहाज पर अचूक हमला किया था। सेंटकॉम के अनुसार, जहाज ईरानी तेल ले जा रहा था और चालक दल ने अमेरिकी बलों के निर्देशों का पालन नहीं किया था।

हालांकि, जहाज एक रासायनिक एवं तेल उत्पाद टैंकर था, जिसने ओमान के सोहार बंदरगाह से लगभग 20 समुद्री मील (करीब 37 किलोमीटर) उत्तर-पूर्व में इंजन रूम में आग लगने की सूचना दी थी। इसके बाद जहाज से आपातकालीन सहायता की मांग की गई थी।

यह घटना ऐसे समय में हुई है जब मध्य पूर्व क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ रहा है और अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं गहराती जा रही हैं।

--आईएएनएस

केआर/