एनआरएलएम बना ग्रामीण महिलाओं की ताकत, राजौरी में मिल रहे रोजगार के मौके
राजौरी, 8 मार्च (आईएएनएस)। सेंट्रली स्पॉन्सर्ड नेशनल रूरल लाइवलीहुड मिशन (एनआरएलएम) बॉर्डर डिस्ट्रिक्ट राजौरी में ग्रामीण महिलाओं को मजबूत बनाने और रोजी-रोटी के पक्के मौके बनाने में अहम भूमिका निभा रहा है। यह स्कीम गरीब और बीपीएल परिवारों, खासकर महिलाओं को जिले के अलग-अलग ब्लॉक में सेल्फ-हेल्प ग्रुप (एसएचजी) और छोटे लेवल की रोजी-रोटी यूनिट बनाकर आर्थिक रूप से आजाद बनने में मदद कर रही है।
इस पहल के तहत, एनआरएलएम डिपार्टमेंट ने कई महिला सेल्फ हेल्प ग्रुप बनाए हैं, जहां सदस्य अलग-अलग इनकम कमाने वाले कामों में लगे हुए हैं। ऐसा ही एक सफल उदाहरण राजौरी के चौधरी नार इलाके में मौजूद 'कंगन स्पाइसेस नमकीन, पैकिंग और मैन्युफैक्चरिंग यूनिट' है, जहां ग्रामीण महिलाओं का एक ग्रुप पैकिंग के काम से हर महीने रेगुलर इनकम कमा रहा है।
इस यूनिट में मुख्य रूप से गरीब, विधवा और आर्थिक रूप से कमजोर महिलाएं हैं, जिनके पास पहले रोजी-रोटी का कोई भरोसेमंद जरिया नहीं था। इस स्कीम के तहत महिलाएं चीनी पैकिंग के काम में लगी हुई हैं। रोजाना लगभग एक घंटा काम करके भी वे हर महीने लगभग 2,000 से 3,000 रुपए कमा लेती हैं, जिससे उन्हें अपने परिवार का गुजारा करने में मदद मिलती है।
मीडिया से बात करते हुए महिलाओं ने कहा कि इस स्कीम से उनकी जिंदगी में अच्छा बदलाव आया है। उन्होंने बताया कि सेल्फ-हेल्प ग्रुप में शामिल होने से पहले वे बेरोजगार थीं और दूसरों पर निर्भर थीं, लेकिन एनआरएलएम पहल के जरिए अब उन्हें इनकम का एक जरिया और अपने घर चलाने के लिए कॉन्फिडेंस मिला है।
डिस्ट्रिक्ट प्रोग्राम मैनेजर (डीपीएम) हकीम इम्तियाज ने बताया, "डिपार्टमेंट राजौरी जिले के 19 सिविक ब्लॉक में एनआरएलएम स्कीम लागू कर रहा है, जहां अलग-अलग सेल्फ हेल्प ग्रुप अलग-अलग रोजगार के कामों में लगे हुए हैं।"
उन्होंने आगे कहा, "पैकिंग यूनिट के अलावा, डिपार्टमेंट रोजगार पैदा करने और गांव की रोजगार को मजबूत करने के लिए मशरूम की खेती, डेयरी फार्मिंग और दूसरे छोटे-मोटे कामों को भी बढ़ावा दे रहा है।"
इस तरह एनआरएलएम पहल ग्रामीण महिलाओं के लिए एक मजबूत सपोर्ट सिस्टम बन गई है, जिससे वे रोजी-रोटी कमा सकती हैं और अपने परिवार और गांव की आर्थिक तरक्की में योगदान दे सकती हैं।
--आईएएनएस
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