नृपेंद्र मिश्रा के बयान पर सपा और कांग्रेस का पलटवार, गोली चलाने का फैसला प्रशासनिक स्तर पर लिया गया था
नई दिल्ली, 11 अप्रैल (आईएएनएस)। राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय कल्याण सिंह के पूर्व मुख्य सचिव नृपेंद्र मिश्रा के कारसेवकों पर गोली चलाने वाले निर्णय पर दिए हालिया टिप्पणी को लेकर राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है। सपा और कांग्रेस नेताओं ने शनिवार को नृपेंद्र मिश्र के बयान पर अपनी प्रतिक्रिया दी।
समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता राजकुमार भाटी ने आईएएनएस से बात करते हुए दावा किया कि नृपेंद्र मिश्रा ने खुद पहले यह संकेत दिया था कि गोली चलाने का फैसला प्रशासनिक स्तर पर लिया गया था।
राजकुमार भाटी ने कहा, "नृपेंद्र मिश्रा ने कहा था कि गोली चलाने के आदेश उन्होंने ही दिए थे। यह कोई राजनीतिक फैसला नहीं था। अब वे अपनी ही बातों को तोड़-मरोड़कर पेश कर रहे हैं। नेताओं ने तो बस ढांचे को बचाने के निर्देश दिए थे। उसे कैसे बचाया जाए, इसका फैसला तो अधिकारियों को ही करना होता है। बिना गोली चलाए भी हालात पर काबू पाया जा सकता था, लेकिन शायद उन्होंने इसके लिए कोई तैयारी नहीं की थी और फिर गोली चलाने का आदेश दे दिया।"
उन्होंने आगे कहा, "अब वह अपने पहले के रुख से पलट रहे हैं। मैं मानता हूं कि 90 प्रतिशत फैसले सरकार ही लेती है, हालांकि सरकार सिर्फ यह तय करती है कि कानून-व्यवस्था बनी रहे और बुनियादी ढांचे को कोई नुकसान न पहुंचे, वह यह तय नहीं करती कि अधिकारी लाठियों का इस्तेमाल करेंगे या बंदूकों का।"
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा, जब गोली चलाने का निर्णय लिया गया, तो उस समय ऐसा आदेश तो नृपेंद्र मिश्रा ने ही दिया था। उस समय आदेश देने वाला कोई दूसरा नहीं था।
कांग्रेस नेता आराधना मिश्र ने कहा, "उस समय हालात ऐसे थे, जिसका भारतीय जनता पार्टी के लोगों ने राजनीतिकरण करने का काम किया। उसी का परिणाम था कि उस वक्त भी और आज भी समाज को धर्म के नाम पर बांटने की कोशिश की गई।"
--आईएएनएस
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