एनपीसीसी लिमिटेड के मुआवजे के बिलों में हेराफेरी मामले में फरार दोषी गिरफ्तार
नई दिल्ली, 18 जनवरी (आईएएनएस)। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने राष्ट्रीय परियोजना निर्माण निगम लिमिटेड (एनपीसीसी लिमिटेड) से जुड़े मुआवजा बिलों के गबन मामले में लंबे समय से फरार चल रही दोषी तमन्ना चकमा उर्फ टैमी मे को गिरफ्तार कर लिया है। सीबीआई ने 17 जनवरी को यह गिरफ्तारी की।
तमन्ना चकमा को इससे पहले 17 मई 2024 को मिजोरम के आइजोल स्थित विशेष न्यायालय द्वारा 22 अन्य आरोपियों के साथ दोषी ठहराया गया था, लेकिन वह लंबे समय से फरार थी।
सीबीआई ने इस मामले में 30 दिसंबर 2010 को तत्कालीन जोनल मैनेजर, एनपीसीसी लिमिटेड, सिलचर (असम) के यूपी मिश्रा और पांच अन्य आरोपियों के खिलाफ शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया था। आरोप था कि एनपीसीसी लिमिटेड के मुआवजा बिलों में बड़े पैमाने पर अनियमितता और गबन किया गया।
जांच पूरी होने के बाद सीबीआई ने 31 जुलाई 2012 को 25 आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया, जिसमें तमन्ना चकमा का नाम भी शामिल था। हालांकि, मुकदमे की सुनवाई के दौरान तमन्ना चकमा अदालत में पेश नहीं हुई, जिसके चलते विशेष न्यायालय द्वारा उसके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया। मुकदमे के दौरान उसे पकड़ने के लिए लगातार प्रयास किए गए, लेकिन वह लंबे समय तक जांच एजेंसी की पकड़ से बाहर रही। ट्रायल पूरा होने के बाद 17 मई 2024 को विशेष न्यायालय ने 23 आरोपियों को दोषी करार दिया, जिनमें फरार आरोपी तमन्ना चकमा भी शामिल थी। बावजूद इसके, वह अदालत के समक्ष पेश नहीं हुई।
इसके बाद सीबीआई ने फील्ड वेरिफिकेशन, भौतिक निगरानी और कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) के गहन विश्लेषण के आधार पर जानकारी जुटाई। इन प्रयासों के बाद सीबीआई शिलांग टीम ने 17 जनवरी 2026 को असम के गुवाहाटी स्थित गीता नगर थाना क्षेत्र से फरार दोषी तमन्ना चकमा को हिरासत में ले लिया।
सीबीआई ने बताया कि गिरफ्तार दोषी को गुवाहाटी की अधिकार क्षेत्र वाली अदालत में पेश किया जाएगा, जहां से ट्रांजिट रिमांड प्राप्त कर उसे आगे की कार्रवाई के लिए मिजोरम के आइजोल स्थित विशेष न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।
--आईएएनएस
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