नोएडा के डूब क्षेत्र में 13 हजार अवैध बिजली कनेक्शन का मामला गरमाया, सीएम योगी की फटकार के बाद बिजली विभाग की कार्रवाई शुरू
नोएडा, 29 अगस्त (आईएएनएस)। नोएडा के डूब क्षेत्र में बड़े पैमाने पर चल रहे अवैध बिजली कनेक्शन के नेटवर्क का मामला अब शासन स्तर तक पहुंच गया है। डूब क्षेत्र में करीब 13 हजार अवैध बिजली कनेक्शन होने की बात सामने आने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने यह मामला उठाया गया। स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन के सीईओ मनोज कुमार सिंह ने मुख्यमंत्री के समक्ष डूब क्षेत्र में अवैध तरीके से बिजली कनेक्शन दिए जाने का मुद्दा रखा।
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री ने पावर कॉरपोरेशन के चेयरमैन आशीष गोयल को फटकार लगाते हुए जवाब तलब किया। मुख्यमंत्री की नाराजगी के बाद बिजली विभाग में भी हलचल तेज हो गई है। विभाग ने अब डूब क्षेत्र में अवैध बिजली कनेक्शनों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। इसी क्रम में छिजारसी गांव में अवैध कनेक्शनों की जांच और उन्हें बंद करने का अभियान शुरू किया गया है। बिजली विभाग की टीम क्षेत्र में पहुंचकर अवैध मीटर और बिजली की लाइनों की जांच कर रही है। कई कनेक्शन बंद किए जाने और अवैध लाइन काटने की कार्रवाई की जा रही है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस क्षेत्र में नए बिजली कनेक्शन देने पर लंबे समय से रोक है, वहां हजारों कनेक्शन कैसे पहुंच गए। बिजली विभाग के आंकड़ों के मुताबिक इलाके में करीब 3,800 वैध बिजली कनेक्शन हैं, जबकि इसके मुकाबले हजारों कनेक्शनों को अवैध बताया जा रहा है। पूरे डूब क्षेत्र में ऐसे कनेक्शनों की संख्या करीब 13 हजार तक होने का अनुमान सामने आया है। आरोप है कि एक प्राइवेट सिंडिकेट ने अवैध तरीके से मीटर लगाकर लोगों को बिजली सप्लाई देने का नेटवर्क खड़ा कर रखा था। इसके एवज में उपभोक्ताओं से कथित तौर पर हर कनेक्शन के लिए न्यूनतम करीब एक हजार रुपए तक वसूले जाने का अनुमान है।
अगर हजारों कनेक्शनों को आधार बनाया जाए तो इस नेटवर्क के जरिए हर महीने करीब डेढ़ करोड़ रुपए की वसूली होने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, इस रकम और कनेक्शनों की वास्तविक संख्या की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगा। डूब क्षेत्र में बिजली कनेक्शन का यह पूरा मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि यहां वर्ष 2017 से नए बिजली कनेक्शन देने पर रोक लगी हुई है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में अवैध मीटर और बिजली कनेक्शन सामने आने से विभागीय व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। सवाल यह है कि रोक के बावजूद कथित तौर पर इतने बड़े स्तर पर बिजली नेटवर्क कैसे तैयार हुआ और वर्षों तक विभाग को इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई। वहीं डूब क्षेत्र में बनी बड़ी-बड़ी इमारतों, फार्म हाउस और अन्य निर्माणों तक बिजली पहुंचने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
स्थानीय स्तर पर यह जांच का विषय बन गया है कि जिन निर्माणों को लेकर पहले से ही नियमों और वैधता पर सवाल उठते रहे हैं, उन्हें बिजली की आपूर्ति किस आधार पर और किस माध्यम से दी गई।
नोएडा के मुख्य अभियंता एसके जैन के मुताबिक, अवैध बिजली नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी गई है। विभाग की टीमें अवैध कनेक्शनों को चिन्हित कर उन्हें बंद कर रही हैं और जहां अवैध लाइनें मिली हैं, उन्हें काटा जा रहा है। विभाग का दावा है कि कथित सिंडिकेट से जुड़े लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की कार्रवाई भी की गई है।
मुख्य अभियंता के अनुसार डूब क्षेत्र में अवैध बिजली कनेक्शनों के खिलाफ अभियान एक-दो दिन की कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि रोजाना अभियान चलाकर अवैध नेटवर्क को खत्म करने का प्रयास किया जाएगा। इस पूरे प्रकरण ने बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब जांच के दौरान यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि 2017 से नए कनेक्शन पर रोक के बावजूद इतने बड़े पैमाने पर अवैध कनेक्शन किस तरह दिए गए, इसमें कौन-कौन लोग शामिल हैं और इस नेटवर्क से अब तक कितनी रकम की वसूली हुई है।
--आईएएनएस
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