निषाद आरक्षण पर संजय निषाद बोले- लड़ाई कुर्सी की नहीं, संवैधानिक पहचान की है
प्रयागराज, 19 सितंबर (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री संजय निषाद ने शनिवार को निषाद आरक्षण और समाज की संवैधानिक सुरक्षा को लेकर बड़ा बयान दिया है। निषाद आरक्षण और सियासी नाराजगी की अटकलों के बीच यूपी सरकार में मंत्री संजय निषाद ने दो टूक में कहा कि उनकी लड़ाई कुर्सी की नहीं, बल्कि समाज की संवैधानिक पहचान और सुरक्षा की है।
उन्होंने कहा कि सरकार से उनकी मांग सामाजिक न्याय और पहचान की है, न कि सत्ता की। इसी के साथ उन्होंने भाजपा के साथ गठबंधन को लेकर चल रही अटकलों पर भी विराम लगाते हुए कहा कि नाराजगी जैसी कोई बात नहीं है।
उत्तर प्रदेश के मंत्री संजय निषाद ने कहा, "आज हमारे लोगों के हक छीनने वाले लोग एससी-एसटी प्रोटेक्शन एक्ट हटाने की भी बात कर सकते हैं। हमारी मांग है कि हमें ओबीसी से निकालकर एससी में शामिल कर प्रमाण पत्र जारी किया जाए और हमें संवैधानिक सुरक्षा दी जाए। हम अपनी जातियों के हक की लड़ाई खुद लड़ रहे हैं।"
उन्होंने बताया कि इस मामले को लेकर उन्होंने सुबह जिला अधिकारी से बात की है। उन्होंने आश्वासन दिया है कि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और आगे ऐसी घटना नहीं होने दी जाएगी।
मंत्री संजय निषाद ने कहा कि वे हमारे अपने लोग हैं। पार्टी कोई भी हो, विचारधारा अलग हो सकती है, लेकिन खून एक है। हम सब एक साथ रहकर अपने हक की लड़ाई लड़ेंगे। जो लोग हमारे लोगों के अधिकार छीनने की कोशिश कर रहे हैं, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा।
उन्होंने कहा कि इन लोगों को बोलने का हक नहीं है। अगर आज हमारा एससी-एसटी प्रोटेक्शन छीन लिया जाए तो कोई भी निषाद समाज के खिलाफ बोलने लगेगा। आज हम इस कानून के कारण ही सुरक्षित हैं।
उत्तर प्रदेश के मत्स्य मंत्री ने कहा, "यह वही निषाद समाज है, जिसने देश को आजाद करने में योगदान दिया। संविधान में हमें मझवार, तुरहा के नाम से लिखा गया, लेकिन हमारा नाम ओबीसी में डालकर हमारे हक छीन लिए गए।"
संजय निषाद ने कहा, "31 दिसंबर 2016 को राज्यपाल ने कह दिया था कि यह जाति अब पिछड़ी नहीं है, लेकिन पिछली सरकारों ने नई लिस्ट नहीं बनाई। अगर सच में निषादों का भला चाहते हैं तो हमें ओबीसी के 27 फीसदी में से अलग कर एससी में शामिल कर मझवार, तुरहा का प्रमाण पत्र जारी किया जाए।"
एक अन्य सवाल का जवाब देते हुए संजय निषाद ने कहा कि अगर नाराजगी होती तो मैं मीटिंग में जाता ही नहीं। मैं दिन में बैठक में शामिल था और शाम को शिष्टाचार के नाते मुलाकात हुई। बड़ी पार्टी अभिभावक और भाग्यविधाता होती है। केंद्र और राज्य सरकार वंचित, शोषित और पिछड़े वर्ग के लिए भाग्यविधाता का काम करती है।
भाजपा के यूपी प्रभारी विनोद तावड़े शनिवार को संजय निषाद के घर पहुंचे। इसे लेकर उन्होंने कहा कि जब इतने बड़े प्रदेश के प्रभारी और पीएम मोदी, सीएम योगी और अमित शाह के करीबी आएं तो सहयोगी दल के नाते चाय पर बुलाना स्वाभाविक है। मैं उनका धन्यवाद और आभार व्यक्त करता हूं कि उन्होंने मेरा निमंत्रण स्वीकार किया। वह परिवार से मिलने आए, परिवार को बड़ों का आशीर्वाद ही काफी है।
संजय निषाद ने स्पष्ट किया कि इस दौरान कोई राजनीतिक चर्चा नहीं हुई। यह सामाजिक चर्चा थी। मैंने उन्हें समाज से जुड़े मुद्दों से अवगत कराया। हमारी पार्टी पहले से ही आरक्षण के मुद्दे पर पहल कर रही है। 2022 में इस पर पहल हुई थी। आरजीआई में रिपोर्ट भी दी गई है और सामाजिक न्याय पर काम हो रहा है।
--आईएएनएस
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