झारखंड सरकार को एनएचआरसी का अल्टीमेटम, 'पुलिस कस्टडी में नाबालिग की पिटाई पर 1 लाख का मुआवजा दें'
रांची, 1 मई (आईएएनएस)। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने झारखंड के खूंटी जिले में एक नाबालिग लड़के की पुलिस हिरासत में बर्बर पिटाई के मामले में कड़ा रुख अख्तियार किया है।
आयोग ने राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश दिया है कि पीड़ित बच्चे, शिवा कुमार सिंह, को एक लाख रुपए का मुआवजा दिया जाए और दोषी पुलिस अधिकारी सहित अन्य संबंधित लोगों पर अविलंब एफआईआर दर्ज की जाए। यह घटना 16 फरवरी 2025 की है, जब खूंटी पुलिस मानव तस्करी के एक संदिग्ध की तलाश में कोसंबी गांव पहुंची थी। संदिग्ध के घर पर न मिलने के कारण पुलिस ने न केवल घर में तोड़फोड़ की, बल्कि उसके 16 वर्षीय नाबालिग बेटे शिवा कुमार सिंह को जबरन उठाकर खूंटी महिला थाने ले आई।
आरोप है कि थाने में सब-इंस्पेक्टर संतोष रजक ने बच्चे के पिता का पता उगलवाने के लिए उसकी इतनी बेरहमी से पिटाई की कि वह चलने-फिरने और बैठने तक की स्थिति में नहीं रहा। इस अमानवीय कृत्य के खिलाफ चाइल्ड राइट्स फाउंडेशन के सचिव बैद्यनाथ कुमार ने आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी, जिस पर संज्ञान लेते हुए यह कार्रवाई की गई है।
मानवाधिकार आयोग ने अपनी कार्यवाही के दौरान इस कृत्य को 'भारतीय न्याय संहिता- 2023' और किशोर न्याय अधिनियम का खुला उल्लंघन करार दिया है। आयोग ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि एक निर्दोष बच्चे को थाने लाकर पीटना उसके 'जीवन के अधिकार' और 'गरिमा के साथ जीने के अधिकार' का हनन है।
झारखंड सरकार ने आयोग को सूचित किया है कि एक लाख रुपए के मुआवजे की राशि को मंजूरी दे दी गई है और जल्द ही इसे पीड़ित परिवार को हस्तांतरित कर दिया जाएगा। हालांकि, आयोग ने इस बात पर गहरी नाराजगी जताई है कि अब तक दोषी अधिकारी के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज नहीं किया गया है। एनएचआरसी ने इसे लेकर अल्टीमेटम देते हुए दोषी पुलिसकर्मियों पर जल्द एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है।
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