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नई दिल्ली: साइकिल से विधानसभा पहुंचे ‘आप’ विधायक, मंत्री के इस्तीफे की मांग

नई दिल्ली, 10 अगस्त (आईएएनएस)। दिल्ली में छात्राओं को वितरित की जाने वाली साइकिलों की खरीद को लेकर आम आदमी पार्टी (आप) ने सरकार पर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। कथित साइकिल घोटाले के विरोध में सोमवार को ‘आप’ नेता और विधायक साइकिल चलाकर दिल्ली विधानसभा पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा मंत्री आशीष सूद के इस्तीफे की मांग करते हुए भाजपा सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
 

नई दिल्ली, 10 अगस्त (आईएएनएस)। दिल्ली में छात्राओं को वितरित की जाने वाली साइकिलों की खरीद को लेकर आम आदमी पार्टी (आप) ने सरकार पर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। कथित साइकिल घोटाले के विरोध में सोमवार को ‘आप’ नेता और विधायक साइकिल चलाकर दिल्ली विधानसभा पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा मंत्री आशीष सूद के इस्तीफे की मांग करते हुए भाजपा सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।

‘आप’ दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने साइकिल से विधानसभा पहुंचे विधायकों का नेतृत्व किया। उनका दावा है कि दिल्ली सरकार ने स्कूली छात्राओं को बांटने के लिए करीब 1.30 लाख साइकिलें खरीदी हैं और प्रत्येक साइकिल के लिए 6,957 रुपए का भुगतान किया गया। वहीं, आम आदमी पार्टी के नेताओं ने इसी तरह की साइकिल बाजार से करीब 4,200 रुपए में खरीदकर विधानसभा पहुंचने का दावा किया। ‘आप’ नेताओं ने सवाल उठाया कि जब बाजार में समान साइकिल कम कीमत पर उपलब्ध थी तो सरकारी खरीद में प्रति साइकिल इतनी अधिक राशि क्यों चुकाई गई।

उन्होंने आरोप लगाया कि इस खरीद में सरकार ने करीब 90 करोड़ रुपए का घोटाला किया है। उन्होंने विधानसभा जाते समय दावा किया कि ‘आप’ द्वारा खरीदी गई और छात्राओं को सरकार की ओर से दी जा रही साइकिलें एक ही तरह की हैं। उनके अनुसार, दोनों साइकिलों में मुख्य अंतर कीमत और मॉडल के नाम का है। भारद्वाज ने कहा कि ‘आप’ ने जिस साइकिल को खरीदा है, उस पर ‘बोनफायर’ मॉडल लिखा है, जबकि सरकार की ओर से छात्राओं को दी जा रही साइकिल पर ‘स्काइलर’ नाम अंकित है। उन्होंने दावा किया कि दोनों साइकिलों का विधानसभा में लाकर आमने-सामने मिलान किया जा सकता है।

भारद्वाज ने कहा कि यदि प्रति साइकिल करीब 3,000 रुपए का अंतर माना जाए तो 1.30 लाख साइकिलों की खरीद में यह अंतर बड़ी रकम में बदल जाता है। उन्होंने कहा कि विपक्ष विधानसभा के भीतर सरकार से इस खरीद प्रक्रिया और कीमत को लेकर जवाब मांगेगा। ‘आप’ नेता ने आरोप लगाया कि साइकिलों की खरीद में सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

बुराड़ी से विधायक संजीव झा ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि ‘आप’ विधायक विधानसभा में साइकिल घोटाले का मुद्दा उठाने और सरकार से जवाब मांगने के लिए पहुंचे हैं। उन्होंने दावा किया कि बाजार में लगभग 4,000 से 4,200 रुपए में उपलब्ध साइकिलों के लिए टेंडर में करीब 7,000 रुपए की कीमत दिखाई गई। उनका आरोप है कि खरीद प्रक्रिया में बड़ी अनियमितता हुई है।

संजीव झा ने टेंडर प्रक्रिया पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि खरीद प्रक्रिया में हीरो साइकिल कंपनी भी शामिल थी, लेकिन उसे टेंडर नहीं मिला और एक व्यापारी को ठेका दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि कोई व्यापारी निर्माता कंपनी से भी कम कीमत पर साइकिल उपलब्ध करा रहा था, तो पूरी प्रक्रिया की जांच जरूरी है। झा ने शिक्षा मंत्री आशीष सूद के मंत्रालय पर करोड़ों रुपए के कथित कमीशन का आरोप लगाते हुए मामले में जवाबदेही तय करने की मांग की।

कोंडली विधायक कुलदीप कुमार ने कहा कि दिल्ली की जनता जानना चाहती है कि जब वही साइकिल करीब 4,200 रुपए में बाजार में उपलब्ध थी तो 1.30 लाख साइकिलों की सरकारी खरीद में प्रति साइकिल 6,957 रुपए क्यों खर्च किए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रति साइकिल करीब 3,000 रुपए का अंतर होने की स्थिति में यह सरकारी खजाने पर बड़ा बोझ है। उन्होंने सवाल उठाया कि अतिरिक्त रकम आखिर किसकी जेब में गई।

तिलक नगर विधायक जरनैल सिंह ने भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि बाजार में करीब 4,000 रुपए में मिलने वाली साइकिल सरकारी स्तर पर करीब 7,000 रुपए में खरीदी गई। उनके अनुसार, यदि प्रति साइकिल लगभग 3,000 रुपए का अंतर है तो इतनी बड़ी संख्या में खरीद के कारण सरकार को भारी वित्तीय नुकसान हुआ होगा। उन्होंने कहा कि इस राशि से अतिरिक्त साइकिलें खरीदी जा सकती थीं और बड़ी संख्या में अन्य छात्राओं को इसका लाभ मिल सकता था।

‘आप’ नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार के कार्यकाल में दवा, अस्पताल के बेड, बेडशीट, चावल और अन्य खरीद में भी कथित अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं और अब छात्राओं को मिलने वाली साइकिलों की खरीद पर भी सवाल उठ रहे हैं। पार्टी ने विधानसभा में इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा कराने और सरकार से खरीद प्रक्रिया, टेंडर, कीमत तथा भुगतान से संबंधित पूरा ब्योरा सार्वजनिक करने की मांग की है।

--आईएएनएस

पीकेटी/डीकेपी