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नीट पेपर लीक मामले पर बोले राज्यवर्धन सिंह राठौड़, जल्द से जल्द समाधान किया जाएगा

नई दिल्ली, 16 मई (आईएएनएस)। नीट पेपर लीक मामले को लेकर राजस्थान सरकार में मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने कहा कि यह निश्चित रूप से एक चुनौती है। शिक्षा मंत्री ने अपना बयान दिया है और इसका समाधान जल्द से जल्द किया जाएगा, तथा बच्चों का भविष्य पूरी तरह सुरक्षित रहेगा।
 
नीट पेपर लीक मामले पर बोले राज्यवर्धन सिंह राठौड़, जल्द से जल्द समाधान किया जाएगा

नई दिल्ली, 16 मई (आईएएनएस)। नीट पेपर लीक मामले को लेकर राजस्थान सरकार में मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने कहा कि यह निश्चित रूप से एक चुनौती है। शिक्षा मंत्री ने अपना बयान दिया है और इसका समाधान जल्द से जल्द किया जाएगा, तथा बच्चों का भविष्य पूरी तरह सुरक्षित रहेगा।

दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने बोलते हुए कहा कि इतने सालों की कड़ी मेहनत और हजारों घंटों की कोशिशों के बाद जब आप आखिरकार उस मंच पर पहुंचते हैं, दुनिया के सबसे ऊंचे मंच पर, तो आप अपने बारे में कम ही सोचते हैं। आपका तिरंगा सबसे ऊपर लहरा रहा होता है, और आप सचमुच पूरे देश के बारे में सोच रहे होते हैं।

उन्होंने कहा कि मेरा जन्म फौजी माहौल में हुआ। 16 साल की उम्र से ही मैं फौज में था। पदक के ऊपर नाम भले ही मेरा लिखा है, लेकिन जिस माइंडसेट से मैं उस पदक को जीत पाया, वो माइंडसेट फौज ने बनाया था। जब हम छोटे थे तो देखते थे कि पिता के दोस्त वर्दी में आ रहे हैं। फौज में कोई ठहराव नहीं होता, लगातार लगे रहते हैं। लगातार अभ्यास होता है।

उन्होंने कहा कि जब मैं 21 वर्ष की उम्र में अधिकारी बना था, अपनी पलटन के अंदर पहुंचा तो मुझे एक टास्क दिया गया। मैं शाम तक लगा रहा, टास्क को पूरा करने के लिए खूब मेहनत की। मुझे लगा कि इतनी मेहनत को बॉस से बताऊंगा तो खुश होंगे, लेकिन मुझे लताड़ मिली और बोला गया कि जब तक मिशन पूरा न हो तब तक वापस मत आना। फिर मैं उस मिशन को पूरा करके आया। यह मेरे लिए शिक्षा थी कि जब भारतीय सेना कोई मिशन देती है तो खुद से भी ज्यादा महत्वपूर्ण मिशन होता है।

राज्यवर्धन सिंह ने कहा कि जब हम ट्रेनिंग के लिए जाते थे तो अपने साथ कपड़ों के दो या तीन सेट ले जाते थे। हम अपने साथ दो या तीन टिफिन भी ले जाते थे। हम सुबह ट्रेनिंग करते थे, कपड़े बदलते थे, अपने टिफिन से खाना खाते थे, और फिर फाइलें आगे बढ़ाने के लिए भारतीय खेल प्राधिकरण जाते थे, जहां चार से पांच घंटे लग जाते थे। उन्होंने कहा कि बहुत बदलाव हो गया है। बहुत खुश हूं कि देश में सकारात्मक बदलाव आ रहा है।

--आईएएनएस

एसडी/डीकेपी