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एनसीबी अहमदाबाद को बड़ी सफलता, गांजा तस्करी के दो आरोपियों को 10 वर्ष की कठोर सजा

गांधीनगर, 7 अक्टूबर (आईएएनएस)। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) अहमदाबाद को कमर्शियल मात्रा में गांजे की तस्करी के मामले में सफलता मिली है। अदालत ने इस मामले में गिरफ्तार दो आरोपियों को 10 वर्ष के कठोर कैद की सजा सुनाई है।
 

गांधीनगर, 7 अक्टूबर (आईएएनएस)। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) अहमदाबाद को कमर्शियल मात्रा में गांजे की तस्करी के मामले में सफलता मिली है। अदालत ने इस मामले में गिरफ्तार दो आरोपियों को 10 वर्ष के कठोर कैद की सजा सुनाई है।

दरअसल, एनसीबी-अहमदाबाद ने गांजे की संगठित अंतर-राज्यीय तस्करी में शामिल दो आरोपियों को दोषी ठहराए जाने में सफलता हासिल की है, जिनकी पहचान महाराष्ट्र के मालेगांव निवासी शेख अकील शेख और गुजरात के सूरत निवासी अयाज शेख के रूप में हुई है।

एनसीबी के अधिकारियों ने 9 जून 2022 को ठोस और विश्वसनीय खुफिया जानकारी के आधार पर गुजरात के सूरत जिले के मांगरोल में मिथिला इंडस्ट्रीज के सामने लिंडियाद गांव में निगरानी अभियान चलाया।

इस दौरान एनसीबी की टीम ने आरोपियों को पकड़ा, जो एक टाटा ट्रक से छिपाकर रखा गया माल महिंद्रा बोलेरो पिकअप गाड़ी में ट्रांसफर कर रहे थे। तलाशी लेने पर अधिकारियों को 17 प्लास्टिक की बोरियों में पैक 523.450 किलोग्राम गांजा मिला, जिसमें 101 पैकेट थे। पकड़े जाने से बचने के लिए अनानास की खेप के नीचे चालाकी से छिपाया गया था।

जांच से पता चला कि अवैध बिक्री के लिए ओडिशा से गुजरात तक कमर्शियल मात्रा में गांजे के अंतर-राज्यीय परिवहन के लिए एक सुनियोजित आपराधिक साजिश रची गई थी। जांच पूरी होने के बाद, एनडीपीएस एक्ट, 1985 की विभिन्न धाराओं के तहत अपराधों के लिए सूरत की अतिरिक्त जिला और सत्र अदालत में शिकायत दर्ज की गई।

विस्तृत सुनवाई के बाद, अदालत ने 3 अक्टूबर 2026 के फैसले में दोनों आरोपियों को दोषी ठहराया और समाज के खिलाफ इस गंभीर अपराध में शामिल होने के लिए उनमें से प्रत्येक को 10 वर्ष की कठोर कैद और 1,00,000 के जुर्माने की सजा सुनाई।

इसी के साथ एनसीबी ने ड्रग तस्करी के खिलाफ लड़ाई में जनता से सक्रिय सहयोग की अपनी अपील को दोहराया है। उन्होंने कहा कि नशीले पदार्थों की बिक्री, परिवहन या व्यापार से जुड़ी कोई भी जानकारी मानस-नेशनल नारकोटिक्स हेल्पलाइन (टोल-फ्री नंबर: 1933) के माध्यम से दी जा सकती है। जानकारी देने वालों की पहचान पूरी तरह से गोपनीय रखी जाती है।

--आईएएनएस

डीके/एबीएम