नवरात्र का पांचवां दिन आज, मां स्कंदमाता की होगी आराधना, संतान सुख और सुख-समृद्धि के लिए भक्त करेंगे पूजा
नोएडा, 15 अक्टूबर (आईएएनएस)। नवरात्र के पांचवें दिन आज मां दुर्गा के पांचवें स्वरूप मां स्कंदमाता की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाएगी। सुबह से ही मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ने और माता के जयकारों से वातावरण भक्तिमय होने की उम्मीद है। मां स्कंदमाता को ममता, वात्सल्य, नारी शक्ति और मातृशक्ति का सजीव प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां स्कंदमाता की आराधना करने से भक्तों को सुख-समृद्धि, शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है। संतान की सुख-समृद्धि और परिवार के कल्याण की कामना से भी श्रद्धालु मां की पूजा करते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान कार्तिकेय का एक नाम स्कंद कुमार भी है। स्कंद कुमार की माता होने के कारण देवी पार्वती के इस स्वरूप को स्कंदमाता कहा जाता है। भगवान कार्तिकेय को देवताओं का सेनापति माना जाता है। पौराणिक कथाओं में भगवान कार्तिकेय द्वारा तारकासुर का वध किए जाने का उल्लेख मिलता है। मान्यता है कि तारकासुर को वरदान प्राप्त था कि उसकी मृत्यु भगवान शिव के पुत्र के हाथों ही हो सकती है। इसी कारण भगवान कार्तिकेय का जन्म देवताओं के लिए महत्वपूर्ण माना गया।
मां स्कंदमाता को देवी दुर्गा के अत्यंत ममतामयी स्वरूपों में गिना जाता है। उनकी गोद में भगवान कार्तिकेय विराजमान रहते हैं। धार्मिक चित्रण में मां को कमल पर विराजमान दिखाया जाता है, इसलिए उन्हें पद्मासना देवी भी कहा जाता है। उनका स्वरूप यह संदेश देता है कि एक मां अपने बच्चों की रक्षा करने के साथ-साथ उनमें साहस, शक्ति और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा भी देती है। मां स्कंदमाता का स्वरूप नारी शक्ति और मातृशक्ति के महत्व को दर्शाता है। भारतीय संस्कृति में मां को त्याग, प्रेम, करुणा और संरक्षण का प्रतीक माना गया है। मां स्कंदमाता की पूजा इसी भावना को मजबूत करती है।
भक्त माता के चरणों में परिवार की सुख-शांति, बच्चों के उज्ज्वल भविष्य और जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर करने की प्रार्थना करते हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, तारकासुर के वध के लिए भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र का जन्म आवश्यक माना गया था। भगवान कार्तिकेय के जन्म और उनके द्वारा तारकासुर का वध किए जाने की कथा का संबंध इसी मान्यता से जुड़ा है। शिव और पार्वती के मंगलमय मिलन को सनातन संस्कृति में विवाह परंपरा के महत्वपूर्ण प्रसंगों में गिना जाता है।
कन्यादान और गर्भधारण सहित जीवन के विभिन्न संस्कारों तथा परंपराओं का उल्लेख भी धार्मिक ग्रंथों और सांस्कृतिक मान्यताओं में मिलता है। नवरात्र के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा करते समय भक्त श्रद्धापूर्वक मंत्र का जाप कर सकते हैं। “या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥” इस मंत्र का भाव है कि जो देवी समस्त प्राणियों में मातृशक्ति के रूप में विद्यमान हैं, उन्हें बार-बार नमन है।
भक्त पूजा के दौरान मां को पुष्प अर्पित कर, दीप प्रज्वलित करके और मंत्र का जाप करके उनका आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना करते हैं। नवरात्र का पांचवां दिन भक्तों को मातृत्व, करुणा, साहस और कर्तव्य के महत्व की याद दिलाता है। मां स्कंदमाता की आराधना के साथ श्रद्धालु अपने परिवार की खुशहाली और समाज में सुख-शांति की कामना करते हैं। धार्मिक आस्था के अनुसार, सच्चे मन से की गई पूजा भक्तों को आत्मिक शांति और सकारात्मकता का अनुभव कराती है।
--आईएएनएस
पीकेटी/पीएम
