नावों की पहचान से सुरक्षा तक नई व्यवस्था, यूपी में जलयानों को मिलेगी खास पंजीकरण संख्या
लखनऊ, 28 अक्टूबर (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश में नदी आधारित परिवहन को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के साथ इससे जुड़ी आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की दिशा में योगी सरकार नई नियामक व्यवस्था लागू करने की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित अंतर्देशीय जलयान नियमावली-2026 के तहत यंत्रचालित और गैर-यांत्रिक जलयानों को विशिष्ट पंजीकरण संख्या दी जाएगी। वहीं, जल परिवहन से जुड़े विकास और कल्याण कार्यों के लिए अलग-अलग निधियां गठित करने, घाटों के संचालन में पारदर्शिता बढ़ाने और यात्रियों की सुरक्षा के मानक तय करने का प्रावधान किया गया है।
इससे गंगा, यमुना, घाघरा, गोमती, गंडक और बेतवा जैसी प्रमुख नदियों में यात्री परिवहन, नदी पर्यटन, पारंपरिक नौका संचालन और माल परिवहन को अधिक सुरक्षित तथा व्यवस्थित बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है। यूपी परिवहन विभाग के मुताबिक प्रस्तावित नियमावली में जल परिवहन से प्राप्त शुल्क और जुर्माने के माध्यम से यंत्रचालित जलयानों के लिए राज्य विकास निधि गठित करने की व्यवस्था है। दूसरी ओर, गैर-यांत्रिक जलयानों से संबंधित गतिविधियों के लिए जिला स्तर पर जिला कल्याण निधि बनाई जाएगी।
इस व्यवस्था का उद्देश्य जल परिवहन के नियमन के साथ संबंधित क्षेत्र के विकास और नाविकों के कल्याण के लिए वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराना है। नियमावली के तहत जलयानों की पहचान और उनकी स्थिति का आकलन करने के लिए पंजीकरण, सर्वेक्षण एवं मूल्यांकन की जिम्मेदारियां स्पष्ट की जाएंगी। यंत्रचालित जलयानों के पंजीकरण के लिए प्रत्येक जिले में सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रशासन) को पंजीकरण अधिकारी नामित करने का प्रावधान है। गैर-यांत्रिक जलयानों के पंजीकरण के लिए जिला स्तर पर मोटरयान निरीक्षक और तहसील स्तर पर सहायक मोटरयान निरीक्षक नामांकन प्राधिकारी के रूप में कार्य करेंगे।
जलयानों के सर्वेक्षण एवं मूल्यांकन के लिए राष्ट्रीय अंतर्देशीय नौवहन संस्थान (एनआईएनआई), पटना को नामित किया गया है। प्रस्तावित व्यवस्था में यंत्रचालित जलयानों को 10 अंकों या अक्षरों और गैर-यांत्रिक जलयानों को 12 अंकों या अक्षरों की विशिष्ट पंजीकरण संख्या देने का प्रावधान है। इससे जलयानों की पहचान सुनिश्चित करने, उनके संचालन से जुड़ी जानकारी व्यवस्थित रखने और नियामक निगरानी को मजबूत करने में मदद मिल पाएगी।
नदी परिवहन में यात्रियों की सुरक्षा के लिए घाटों पर स्थायी प्रकाश व्यवस्था, साइनबोर्ड, लाइफ बॉय और गोताखोरों की उपलब्धता अनिवार्य करने का प्रावधान किया गया है। घाटों के पट्टे, रख-रखाव, संचालन और सुरक्षा से जुड़ी जिम्मेदारियां स्थानीय निकायों, विकास प्राधिकरणों और जिला समितियों के माध्यम से निर्धारित की जाएंगी। इससे घाटों के प्रबंधन में जवाबदेही बढ़ाने और यात्रियों को सुरक्षित आवागमन उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। नाव दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जिला स्तरीय समिति गठित की जाएगी। प्रत्येक यात्रा से पहले यात्रियों को सुरक्षा संबंधी जानकारी देना अनिवार्य होगा। नावों में यात्रियों की निर्धारित क्षमता से 10 प्रतिशत अधिक लाइफ जैकेट, 10 मीटर की रस्सी और प्राथमिक उपचार पेटी उपलब्ध रखने का प्रावधान भी शामिल है।
इसके अतिरिक्त आपातकालीन प्रतिक्रिया जलयानों (आपातकालीन बचाव नाव) की व्यवस्था 1:10 के अनुपात में रखने की योजना है, ताकि जरूरत पड़ने पर बचाव कार्य तेजी से संचालित किया जा सके। उत्तर प्रदेश की नदियों में यात्री परिवहन, पर्यटन, पारंपरिक नौका संचालन और माल ढुलाई के लिए व्यापक संभावनाएं हैं। ऐसे में पंजीकरण की स्पष्ट व्यवस्था, सुरक्षा मानक, घाटों का बेहतर प्रबंधन और नाविकों के कल्याण से जुड़े प्रावधान इस क्षेत्र को व्यवस्थित स्वरूप देने में सहायक हो सकते हैं।
नियमावली का प्रभावी क्रियान्वयन होने पर यात्रियों का भरोसा बढ़ाने, दुर्घटनाओं के जोखिम को कम करने और नदी आधारित आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने की दिशा में मदद मिल सकती है। भारत सरकार के अंतर्देशीय जलयान अधिनियम, 2021 के अनुरूप तैयार की जा रही यह नियमावली उत्तर प्रदेश के वर्ष 2002 के नियमों का स्थान लेगी। इसमें कुल 16 अध्याय हैं। पहले 14 अध्याय यंत्रचालित जलयानों से संबंधित हैं, 15वां अध्याय गैर-यांत्रिक जलयानों के लिए है, जबकि 16वें अध्याय में दोनों प्रकार के जलयानों पर लागू सामान्य प्रावधान शामिल किए गए हैं।
नियमावली लागू होने से पहले से संचालित जलयानों को नए मानकों के अनुरूप ढालने के लिए 90 दिन का समय देने का प्रावधान किया गया है। साथ ही, किसी भी असंगति या विरोधाभास की स्थिति में केंद्रीय अधिनियम और नियमों के प्रावधान मान्य होंगे।
--आईएएनएस
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