नौसेना की ताकत बढ़ी, आईएनएस निपुण गहरे समुद्र में युद्धक क्षमता को मजबूत करेगा : एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन
मुंबई, 31 अगस्त (आईएएनएस)। भारतीय नौसेना ने सोमवार को मुंबई स्थित नेवल डॉकयार्ड में अपने दूसरे स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित निस्तार-क्लास डाइविंग सपोर्ट वेसल (डीएसवी) आईएनएस निपुण को औपचारिक रूप से कमीशन किया। नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन की मौजूदगी में हुए कमीशनिंग समारोह के साथ ही यह अत्याधुनिक पोत पश्चिमी समुद्री तट पर भारतीय नौसेना की परिचालन क्षमता का हिस्सा बन गया।
आईएनएस निपुण का निर्माण हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड (एचएसएल) ने किया है और इसमें 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल किया गया है। नौसेना के मुताबिक, यह पोत गहरे समुद्र में डाइविंग अभियानों के साथ-साथ पनडुब्बी बचाव अभियानों के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया है। इसे पश्चिमी समुद्री तट पर तैनात किया जाएगा।
कमीशनिंग समारोह को संबोधित करते हुए नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन ने कहा कि आईएनएस निपुण को शामिल करना केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं बल्कि भारत की परिचालन और युद्धक क्षमता को मजबूत करने के व्यापक लक्ष्य का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि एक लड़ाकू नौसेना के लिए युद्ध के लिए तैयार रहना सबसे बड़ी जिम्मेदारी और प्राथमिकता है।
नौसेना प्रमुख ने कहा कि भारत वर्तमान में ऐसे दौर से गुजर रहा है, जिसमें रणनीतिक स्तर पर बड़े बदलाव हो रहे हैं और समुद्री क्षेत्र में चुनौतियां तथा प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे वातावरण में भारतीय नौसेना के लिए हर समय और हर स्थान पर देश की सुरक्षा तथा समुद्री हितों की रक्षा करने में सक्षम रहना जरूरी है।
वेस्टर्न नेवल कमांड के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ वाइस एडमिरल संजय वत्सायन ने आईएनएस निपुण की कमीशनिंग को भारत की समुद्री यात्रा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव बताया। उन्होंने कहा कि एचएसएल द्वारा निर्मित दो डाइविंग सपोर्ट वेसल में से दूसरे पोत का नौसेना में शामिल होना गहरे समुद्र में अभियानों के लिए भारत की क्षमता को और मजबूत करता है।
उन्होंने कहा कि 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री वाला यह पोत रक्षा निर्माण के क्षेत्र में भारत की बढ़ती आत्मनिर्भरता का प्रमाण है। उनके अनुसार, दोनों समुद्री तटों पर ऐसी क्षमता विकसित होने से भारतीय नौसेना दुनिया के सबसे कठिन परिचालन वातावरणों में से एक गहरे समुद्र में डाइविंग अभियानों को अधिक प्रभावी ढंग से अंजाम दे सकेगी।
एचएसएल के सीएमडी रियर एडमिरल (सेवानिवृत्त) रघुराम ने कहा कि आईएनएस निपुण के सिस्टम, क्षमताओं और परिचालन भूमिका से संबंधित जानकारी कमीशनिंग से पहले प्रदर्शित फिल्म में सामने आ चुकी है। उन्होंने इस पोत को एचएसएल, भारतीय नौसेना और भारत के व्यापक समुद्री विजन के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
आईएनएस निपुण से पहले एचएसएल ने भारतीय नौसेना को इसी श्रेणी का पहला पोत आईएनएस निस्तार सौंपा था। निपुण के कमीशन होने के साथ भारतीय नौसेना की डाइविंग सपोर्ट और गहरे समुद्र में पनडुब्बी बचाव क्षमता को दोनों समुद्री तटों पर विस्तार मिला है। स्वदेशी डिजाइन, निर्माण और उन्नत डाइविंग प्रणालियों से लैस यह पोत भारत की समुद्री सुरक्षा और आत्मनिर्भर रक्षा निर्माण की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
नौसेना के लेफ्टिनेंट कमांडर जितेश ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि आईएनएस निपुण की सबसे महत्वपूर्ण क्षमताओं में 300 मीटर तक सैचुरेशन डाइविंग, मिक्स्ड डाइविंग और पनडुब्बी बचाव अभियान शामिल हैं। ऐसे अभियानों में पोत को समुद्र में एक निर्धारित स्थान पर बेहद सटीकता से स्थिर रखना आवश्यक होता है। इसके लिए जहाज में डायनामिक पोजिशनिंग सिस्टम (डीपी) लगाया गया है, जो पारंपरिक एंकर आधारित व्यवस्था से अलग काम करता है। यह सिस्टम पोत को एक मीटर से भी कम की सटीकता के साथ निर्धारित स्थान पर बनाए रखने में मदद करता है।
आईएनएस निपुण के कैप्टन एलएस सुब्रमण्यन ने कहा कि यह नौसेना के उन स्वदेशी प्लेटफॉर्मों में शामिल है जिनमें 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल किया गया है। उन्होंने कहा कि यह पोत नौसेना में अपनी तरह का विशिष्ट प्लेटफॉर्म है, जिसे विशेष रूप से गहरे पानी में डाइविंग और पनडुब्बी बचाव क्षमताओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।
उन्होंने बताया कि पोत पर मौजूद प्रणालियां मुख्य रूप से सैचुरेशन डाइविंग अभियानों के लिए हैं। इसके अलावा, INS निपुण पनडुब्बी बचाव प्रणाली को समुद्र तक पहुंचाने वाली मदरशिप के रूप में भी काम कर सकता है। पोत की भूमिका पारंपरिक युद्धपोतों से अलग है। यहां गोताखोर ही कई अभियानों में प्रमुख परिचालन संसाधन और बचाव क्षमता का हिस्सा हैं।
--आईएएनएस
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