Aapka Rajasthan

नौसेना कमांडर्स कॉन्फ्रेंस में टेक्नोलॉजी पर फोकस, नौसेना प्रमुख संग आर्मी चीफ और सीडीएस रहे मौजूद

नई दिल्ली, 30 सितंबर (आईएएनएस)। भारतीय नौसेना की कमांडर्स कॉन्फ्रेंस इन दिनों नई दिल्ली में चल रही है। यहां नौसेना के वरिष्ठ नेतृत्व के साथ-साथ भारतीय सेना प्रमुख और चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ भी मौजूद रहे। नौसेना की ऑपरेशनल तैयारियों के लिए यह सबसे बड़ा प्लेटफार्म है।
 

नई दिल्ली, 30 सितंबर (आईएएनएस)। भारतीय नौसेना की कमांडर्स कॉन्फ्रेंस इन दिनों नई दिल्ली में चल रही है। यहां नौसेना के वरिष्ठ नेतृत्व के साथ-साथ भारतीय सेना प्रमुख और चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ भी मौजूद रहे। नौसेना की ऑपरेशनल तैयारियों के लिए यह सबसे बड़ा प्लेटफार्म है।

नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्ण स्वामीनाथन ने यहां मौजूदा समुद्री सुरक्षा वातावरण और भारतीय नौसेना की परिचालन स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने समुद्री क्षेत्र में मौजूदा और उभरती चुनौतियों से निपटने के लिए उच्च स्तर की युद्धक तैयारी की बात की। तेजी से बदलती परिस्थितियों के अनुरूप कार्रवाई और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता बनाए रखने पर जोर दिया। इसके साथ ही उन्होंने तकनीक को तेजी से अपनाने और सैन्य क्षमताओं के विकास की आवश्यकता बताई।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने नौसेना कमांडरों को संबोधित करते हुए समुद्री क्षेत्र में भारत की बढ़ती रणनीतिक जिम्मेदारियों और हिंद महासागर क्षेत्र में भारतीय नौसेना की भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि नौसेना इस क्षेत्र में पहली प्रतिक्रिया देने वाली और भरोसेमंद सुरक्षा साझेदार की भूमिका निभा रही है। पश्चिम एशिया की स्थिति का उल्लेख करते हुए रक्षा मंत्री ने ऑपरेशन ऊर्जा सुरक्षा के तहत भारतीय नौसेना की भूमिका और भारत की ऊर्जा सुरक्षा में उसके योगदान को रेखांकित किया।

चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल एनएस राजा सुब्रमणि ने भारतीय नौसेना को भारत की सामरिक क्षमता को बढ़ाने वाली महत्वपूर्ण शक्ति बताया। उन्होंने तकनीक को तेजी से अपनाने, आत्मनिर्भरता और भारत की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नौसेना के प्रयासों की सराहना की। सीडीएस ने बदलते युद्ध स्वरूप के बीच तकनीकी बदलाव को तेज करने, तीनों सेनाओं के बीच सूचनाओं के निर्बाध आदान-प्रदान और सैन्य क्षमता की मजबूती पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए तीनों सेनाओं के बीच बेहतर संयुक्तता और एकीकरण जरूरी है।

वहीं, थलसेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने भी नौसेना कमांडरों के साथ बातचीत की। इस दौरान मौजूदा सुरक्षा वातावरण और उभरती सुरक्षा चुनौतियों पर विचार साझा किए गए। बातचीत में तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल, एक-दूसरे के साथ मिलकर कार्रवाई करने की क्षमता और एकीकृत प्रतिक्रिया को मजबूत करने पर जोर रहा।

सीडीएस और थलसेना प्रमुख के साथ हुई बातचीत के दौरान युद्ध के बदलते स्वरूप, सैन्य क्षमताओं के विकास और भविष्य में संयुक्त अभियानों की बढ़ती जरूरत पर भी चर्चा हुई। साथ ही, तीनों सेनाओं के बीच ऑपरेशनल अनुभव साझा करने और संयुक्त तैयारी को और मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया गया।

कमांडर्स कॉन्फ्रेंस के बाकी सत्रों में परिचालन, सैन्य सामग्री, रसद, मानव संसाधन, प्रशिक्षण, सैन्य बलों के विकास और नई तकनीकों को शामिल करने से जुड़े विषयों पर विस्तार से चर्चा होगी। इसके अलावा सैन्य बलों के स्तर को बेहतर बनाने, युद्धक तैयारी मजबूत करने और नई क्षमताओं के विकास की गति बढ़ाने के उपायों की भी समीक्षा की जाएगी।

--आईएएनएस

जीसीबी/एसके