नशे के हॉट स्पॉट पर कसेगा शिकंजा, स्कूल-कॉलेज के 500 मीटर दायरे में लागू होगा ‘ड्रग फ्री जोन’
लखनऊ, 25 सितंबर (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश में मादक पदार्थों की तस्करी और अवैध कारोबार पर शिकंजा कसने के लिए हॉट स्पॉट की नियमित निगरानी और सघन कार्रवाई की जाएगी। स्कूल-कॉलेजों के आसपास 500 मीटर के दायरे को सख्त ‘ड्रग फ्री जोन’ के रूप में घोषित कर प्रभावी ढंग से लागू किया जाएगा।
मुख्य सचिव एसपी गोयल ने शुक्रवार को नारकोटिक्स कंट्रोल एवं समन्वय तंत्र (एनकॉर्ड) की राज्य स्तरीय समिति की तृतीय बैठक में अधिकारियों को ये निर्देश दिए। बैठक में प्रदेश में मादक पदार्थों की तस्करी एवं अवैध व्यापार पर नियंत्रण, नशा मुक्ति एवं जागरूकता अभियान, जब्त मादक पदार्थों के निस्तारण और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की समीक्षा की गई।
मुख्य सचिव ने निर्देश दिया कि जिलाधिकारियों की अध्यक्षता में गठित जिला स्तरीय समितियों की बैठकें नियमित रूप से आयोजित की जाएं और चिन्हित हॉट स्पॉट की लगातार निगरानी की जाए। इन क्षेत्रों की संवेदनशीलता कम करने के लिए स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप प्रभावी कदम उठाए जाएं। उन्होंने प्रदेश के स्कूलों और कॉलेजों में नशा मुक्ति एवं जागरूकता के लिए विशेष अभियान नियमित रूप से संचालित करने को कहा। साथ ही मादक पदार्थों के परिवहन, तस्करी और अवैध व्यापार के खिलाफ सघन कार्रवाई करते हुए अधिकतम बरामदगी और गिरफ्तारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
मुख्य सचिव ने कहा कि कमिश्नरेट और जनपद अपने-अपने क्षेत्रों में मादक पदार्थों के अवैध कारोबार के स्रोत, नेटवर्क और वितरण तंत्र को चिन्हित कर प्रभावी कार्रवाई करें। प्री-कर्सर रसायनों, एसीटिक एनहाइड्राइड, नियंत्रित पदार्थों और नशीली दवाओं के दुरुपयोग व अवैध डायवर्जन पर भी कड़ी निगरानी रखने के निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि नशे से प्रभावित युवाओं की काउंसलिंग और पुनर्वास पर भी विशेष ध्यान दिया जाए। एनडीपीएस एक्ट के तहत निरोधात्मक कार्रवाई को प्रभावी बनाने के साथ ही अवैध मादक पदार्थों से अर्जित संपत्तियों की पहचान और जब्ती की कार्रवाई में तेजी लाई जाए। जब्त मादक पदार्थों का निस्तारण निर्धारित एसओपी के अनुसार सुनिश्चित करने को कहा गया।
बैठक में आईजी एएनटीएफ अब्दुल हमीद ने बताया कि वर्ष 2026 में अब तक 563 जिला स्तरीय गोष्ठियां आयोजित की जा चुकी हैं। पिछले 10 वर्षों के मादक पदार्थ जब्ती संबंधी विश्लेषण के आधार पर लखनऊ, कानपुर, गौतमबुद्धनगर, गाजियाबाद, आगरा, बरेली, शामली, बाराबंकी, सहारनपुर और सोनभद्र को प्रमुख हॉट स्पॉट के रूप में चिन्हित किया गया है। प्रत्येक क्षेत्र में 20 हाई वैल्यू टारगेट चिन्हित कर कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2026 में अब तक प्रदेश में एनडीपीएस एक्ट के तहत 3,737 अभियोग दर्ज किए गए और 5,390 अभियुक्त गिरफ्तार किए गए।
इस दौरान 32,768 किलोग्राम अवैध मादक पदार्थ बरामद किए गए। इसी अवधि में एएनटीएफ ने 153 अभियोग दर्ज कर 340 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया और 8,135.52 किलोग्राम मादक पदार्थ बरामद किए। एएनटीएफ के गठन के बाद वर्ष 2022 से अगस्त 2026 तक प्रदेश में 4,37,902 किलोग्राम मादक पदार्थों का निस्तारण कराया गया, जिनकी अनुमानित कीमत करीब 1,925 करोड़ रुपए है। प्रदेश स्तर पर अब तक करीब 78 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त की जा चुकी है।
बैठक में बताया गया कि जनवरी से जून 2026 तक 2,642 जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें 1,50,711 लोगों को मादक पदार्थों का सेवन न करने की शपथ दिलाई गई। वहीं, क्षेत्रीय आवश्यकता के आकलन के आधार पर भांग की लाइसेंसी दुकानों की संख्या वर्ष 2023-24 में 1,588 से घटकर वर्ष 2026-27 में 1,288 रह गई है। बैठक में विभिन्न विभागों के आंकड़ों के आधार पर तैयार डैशबोर्ड के प्रारूप की भी जानकारी दी गई। साथ ही अवैध अफीम की खेती की सूचना देने के लिए सीबीएन और सेंट्रल इकोनॉमिक इंटेलिजेंस ब्यूरो द्वारा जारी व्हाट्सऐप नंबर 986855002 के बारे में बताया गया।
अधिकारियों के अनुसार वर्ष 2026-27 के लाइसेंस वितरण की प्रक्रिया सितंबर से शुरू हो चुकी है, जबकि नवंबर में बुवाई और जनवरी-फरवरी में लाइसेंस प्राप्त फसलों की पैमाइश तथा जीपीएस कोऑर्डिनेट्स लेने की कार्रवाई की जाएगी।
--आईएएनएस
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