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नरसिंहपुर अस्पताल में इलाज और एम्बुलेंस में कथित देरी से युवक की मौत, स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

नरसिंहपुर, 2 अगस्त (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले के करेली सरकारी अस्पताल में एक युवक की मौत के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मृतक के दोस्तों का आरोप है कि समय पर एम्बुलेंस और बेहतर इलाज नहीं मिलने के कारण युवक की जान चली गई। घटना के बाद अस्पताल परिसर में लोगों ने नाराजगी जताई और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी को लेकर प्रशासन पर सवाल उठाए।
 

नरसिंहपुर, 2 अगस्त (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले के करेली सरकारी अस्पताल में एक युवक की मौत के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मृतक के दोस्तों का आरोप है कि समय पर एम्बुलेंस और बेहतर इलाज नहीं मिलने के कारण युवक की जान चली गई। घटना के बाद अस्पताल परिसर में लोगों ने नाराजगी जताई और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी को लेकर प्रशासन पर सवाल उठाए।

मृतक की पहचान अंशु पटेल के रूप में हुई है। उसके दोस्तों के मुताबिक, अंशु ने जहरीला पदार्थ खा लिया था। उसने खुद अपने दोस्त रोहित को फोन कर इसकी जानकारी दी और अपनी लोकेशन भी बताई। इसके बाद उसका दोस्त रोहित अपने साथियों के साथ मौके पर पहुंचा। कच्चे रास्ते के कारण वाहन सीधे वहां तक नहीं जा सका, इसलिए सभी लोग करीब 200 मीटर पैदल दौड़कर अंशु तक पहुंचे और उसे किसी तरह करेली सरकारी अस्पताल लेकर आए।

मृतक के दोस्त शशांक पटेल ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि अस्पताल में न तो पर्याप्त डॉक्टर हैं, न ऑक्सीजन की समुचित व्यवस्था, न स्ट्रेचर और न ही समय पर एम्बुलेंस उपलब्ध हो सकी। उनका कहना है कि करीब एक घंटे तक एम्बुलेंस का इंतजार करना पड़ा। इस दौरान कई बार संबंधित अधिकारियों और सीएमओ को फोन किए गए, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। उन्होंने कहा कि एक गंभीर मरीज के लिए आधे घंटे तक सिर्फ प्रोसेस चलने की बात कही जाती रही, जबकि उस समय तुरंत इलाज और एम्बुलेंस की जरूरत थी।

रोहित ने बताया कि अस्पताल पहुंचने के बाद भी सरकारी एम्बुलेंस नहीं मिल सकी। अस्पताल के बाहर खड़ी एम्बुलेंस के नंबरों पर फोन किया गया, लेकिन किसी ने कॉल रिसीव नहीं किया। बाद में मेडिकल स्टोर से पूछताछ कर किसी तरह एक निजी एम्बुलेंस का इंतजाम किया गया, जो नरसिंहपुर से आई। तब तक काफी देर हो चुकी थी। उनका कहना है कि अगर समय रहते मरीज को जिला अस्पताल भेज दिया जाता, तो उसकी जान बचाई जा सकती थी।

उनका आरोप है कि अस्पताल में ऑक्सीजन सिलेंडर तो था, लेकिन उसे मरीज तक पहुंचाने के लिए जरूरी उपकरण समय पर उपलब्ध नहीं थे। डॉक्टर और स्टाफ जरूरी सामान खोजते रहे, जिससे इलाज में और देरी हुई।

वहीं, ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर ने इन आरोपों पर सफाई देते हुए कहा कि अस्पताल की ओर से हर संभव प्रयास किया गया। उन्होंने बताया कि मरीज को प्राथमिक उपचार दिया गया और जिला अस्पताल रेफर करने की प्रक्रिया भी पूरी कर दी गई थी। एम्बुलेंस सेवा को कई बार फोन किया गया, लेकिन उस समय सरकारी एम्बुलेंस उपलब्ध नहीं हो सकी। डॉक्टर के अनुसार, कई बार एम्बुलेंस हाईवे या दूसरे क्षेत्रों में व्यस्त रहती हैं, जिससे ऐसी स्थिति बन जाती है। हालांकि उन्होंने माना कि उस दिन एम्बुलेंस समय पर नहीं पहुंच पाई।

डॉक्टर ने यह भी बताया कि डॉ. अनीता पटेल ने मरीज का पूरा इलाज करने की कोशिश की और बाद में जिला अस्पताल रेफर किया गया। उनके अनुसार, उन्होंने करीब 25 मिनट तक लगातार सीपीआर देकर मरीज को बचाने का प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिल सकी। उनका कहना है कि अस्पताल की ओर से सभी जरूरी कॉल किए गए थे और पूरी प्रक्रिया रिकॉर्ड में दर्ज है।

--आईएएनएस

पीआईएम/एएस