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इतिहास में दर्ज है 100 डेज! हैरान रह गया था यूरोप, नेपोलियन बोनापार्ट ने हथिया ली थी फ्रांस की सत्ता

नई दिल्ली, 25 फरवरी (आईएएनएस)। नेपोलियन की 1815 में एल्बा द्वीप से वापसी एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटना थी, जिसने "हंड्रेड डेज" की शुरुआत की। 26 फरवरी 1815 को नेपोलियन बोनापार्ट ने अपने निर्वासन स्थल एल्बा से फ्रांस लौटने के लिए प्रस्थान किया था।
 
इतिहास में दर्ज है 100 डेज! हैरान रह गया था यूरोप, नेपोलियन बोनापार्ट ने हथिया ली थी फ्रांस की सत्ता

नई दिल्ली, 25 फरवरी (आईएएनएस)। नेपोलियन की 1815 में एल्बा द्वीप से वापसी एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटना थी, जिसने "हंड्रेड डेज" की शुरुआत की। 26 फरवरी 1815 को नेपोलियन बोनापार्ट ने अपने निर्वासन स्थल एल्बा से फ्रांस लौटने के लिए प्रस्थान किया था।

यह घटना यूरोपीय इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ थी। 1814 में यूरोपीय शक्तियों—ब्रिटेन, रूस, ऑस्ट्रिया और प्रशा—की संयुक्त सैन्य कार्रवाई के बाद नेपोलियन को पदत्याग करना पड़ा था। इसके पश्चात फ्रांस में बोरबॉन वंश की पुनर्स्थापना हुई और लुई 18 को राजा बनाया गया। हालांकि नए शासन से जनता और सेना के एक बड़े वर्ग में असंतोष व्याप्त था, जिससे नेपोलियन की लोकप्रियता पूरी तरह समाप्त नहीं हुई।

एल्बा द्वीप पर रहते हुए नेपोलियन को सीमित प्रशासनिक अधिकार प्राप्त थे, किंतु वे यूरोप की राजनीतिक परिस्थितियों पर नजर बनाए हुए थे। फ्रांस की अस्थिर स्थिति और अपने समर्थकों के विश्वास ने उन्हें पुनः सत्ता प्राप्ति का प्रयास करने के लिए प्रेरित किया।

26 फरवरी 1815 को वे लगभग एक हजार सैनिकों और कुछ जहाजों के साथ एल्बा से रवाना हुए। 1 मार्च 1815 को वे फ्रांस के दक्षिणी तट गोल्फ-जुआं पहुंचे और वहां से पेरिस की ओर बढ़े। रास्ते में उन्हें रोकने भेजी गई शाही सेना के कई सैनिक उनके साथ शामिल हो गए। सैनिकों के समक्ष उनका प्रसिद्ध कथन—“सिपाहियों अगर आप में से कोई अपने सम्राट को मारने की ख्वाहिश रखता है तो वो मैं हूं ”—उनकी करिश्माई नेतृत्व क्षमता का उदाहरण माना जाता है। बिना किसी बड़े संघर्ष के वे पेरिस पहुंचने में सफल रहे और मार्च 1815 में पुनः सत्ता संभाली।

मार्च से जून 1815 तक का काल “हंड्रेड डेज” के नाम से जाना जाता है। इस अवधि में यूरोप की प्रमुख शक्तियों ने फिर से उनके विरुद्ध सैन्य गठबंधन बनाया। अंततः 18 जून 1815 को वॉटरलू के युद्ध में उन्हें निर्णायक पराजय का सामना करना पड़ा। इसके बाद उन्हें दक्षिण अटलांटिक महासागर के दूरस्थ द्वीप सेंट हेलेना में निर्वासित कर दिया गया, जहां 1821 में उनका निधन हुआ। 26 फरवरी 1815 की यह घटना इतिहास में एक असाधारण राजनीतिक पुनरागमन के रूप में दर्ज है, जिसने यूरोप की शक्ति-संतुलन व्यवस्था को पुनः प्रभावित किया।

--आईएएनएस

केआर/