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नमो भारत कॉरिडोर को मिलेगी 110 मेगावॉट सौर ऊर्जा, बिजली की जरूरत का 60 प्रतिशत हिस्सा होगा पूरा

नई दिल्ली, 29 अगस्त (आईएएनएस)। दिल्ली-मेरठ नमो भारत कॉरिडोर को अधिक टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में एक बड़ी पहल की गई है। एनसीआरटीसी ने एनआईआरएल की सहायक कंपनी एनएनआरएल (एनआईआरएल एनसीआरटीसी रिन्यूएबल्स लिमिटेड) के साथ 110 मेगावॉट के कैप्टिव सोलर पावर प्लांट के लिए पावर परचेज एग्रीमेंट (पीपीए) पर हस्ताक्षर किए हैं।
 

नई दिल्ली, 29 अगस्त (आईएएनएस)। दिल्ली-मेरठ नमो भारत कॉरिडोर को अधिक टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में एक बड़ी पहल की गई है। एनसीआरटीसी ने एनआईआरएल की सहायक कंपनी एनएनआरएल (एनआईआरएल एनसीआरटीसी रिन्यूएबल्स लिमिटेड) के साथ 110 मेगावॉट के कैप्टिव सोलर पावर प्लांट के लिए पावर परचेज एग्रीमेंट (पीपीए) पर हस्ताक्षर किए हैं।

इस परियोजना के जरिए नमो भारत कॉरिडोर की कुल बिजली आवश्यकता का करीब 60 प्रतिशत हिस्सा सौर ऊर्जा से पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इस समझौते पर एनसीआरटीसी के प्रबंध निदेशक शलभ गोयल, एनआईआरएल के निदेशक वित्त एवं सीएमडी डेजिगनेट डॉ. प्रसन्ना कुमार आचार्य, एनसीआरटीसी की निदेशक वित्त नमिता मेहरोत्रा और निदेशक इलेक्ट्रिकल्स एंड रोलिंग स्टॉक महेंद्र कुमार समेत दोनों संस्थाओं के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में हस्ताक्षर किए गए।

अधिकारियों के मुताबिक, यह परियोजना देश की आरआरटीएस और मेट्रो परिवहन प्रणालियों के लिए अपनी तरह की पहली कैप्टिव सोलर पावर परियोजनाओं में से एक है और शहरी परिवहन में नवीकरणीय ऊर्जा के इस्तेमाल का नया मॉडल स्थापित करेगी। लगभग 450 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली यह परियोजना उत्तर प्रदेश के जालौन शहर में विकसित की जाएगी। इसे 80:20 डेट-इक्विटी फंडिंग मॉडल के तहत तैयार किया जाएगा।

योजना के मुताबिक, सोलर प्लांट से पैदा होने वाली बिजली को उत्तर प्रदेश स्टेट ग्रिड के जरिए उत्तर प्रदेश और दिल्ली में स्थित एनसीआरटीसी के रिसीविंग सबस्टेशनों तक पहुंचाया जाएगा। इसके बाद यही बिजली दिल्ली-मेरठ नमो भारत कॉरिडोर की जरूरतों के लिए इस्तेमाल की जाएगी। परियोजना को अगले 24 महीनों के भीतर परिचालित करने की योजना है। इसके लिए उत्तर प्रदेश सोलर एनर्जी पॉलिसी का भी लाभ लिया जा रहा है। इससे न केवल नमो भारत कॉरिडोर को स्वच्छ ऊर्जा उपलब्ध होगी, बल्कि लंबे समय तक बिजली की लागत को नियंत्रित रखने में भी मदद मिलेगी।

दिल्ली-मेरठ नमो भारत कॉरिडोर के कुल परिचालन खर्च में बिजली की हिस्सेदारी करीब 30 से 35 प्रतिशत है। ऐसे में 110 मेगावॉट का कैप्टिव सोलर प्लांट एनसीआरटीसी के लिए आर्थिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। परियोजना के चालू होने के बाद बिजली खर्च में लगभग 25 प्रतिशत तक की कमी आने का अनुमान है। पीपीए के तहत एनसीआरटीसी 25 वर्षों की अवधि तक तय टैरिफ पर इस सोलर प्लांट से उत्पादित बिजली खरीदेगा। इससे बिजली की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव से कॉरिडोर के संचालन पर पड़ने वाले प्रभाव को कम किया जा सकेगा। साथ ही लंबे समय के लिए ऊर्जा सुरक्षा भी मजबूत होगी।

सौर ऊर्जा के इस्तेमाल से इस परियोजना का पर्यावरणीय लाभ भी बड़ा होगा। अनुमान के मुताबिक, पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों से मिलने वाली बिजली के स्थान पर सौर ऊर्जा के इस्तेमाल से हर साल करीब 1.77 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी लाई जा सकेगी। इसके साथ ही नाइट्रोजन ऑक्साइड और सल्फर डाइऑक्साइड जैसे प्रदूषकों के उत्सर्जन में भी कमी आने की उम्मीद है।

एनसीआरटीसी का मानना है कि इस तरह की पहल शहरी और क्षेत्रीय सार्वजनिक परिवहन को अधिक स्वच्छ, ऊर्जा-कुशल और टिकाऊ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। नमो भारत जैसी बड़े पैमाने की परिवहन प्रणाली में अक्षय ऊर्जा का इस्तेमाल आने वाले समय में अन्य ट्रांजिट नेटवर्क के लिए भी एक मॉडल बन सकता है। दिल्ली-मेरठ नमो भारत कॉरिडोर पर यात्रियों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। फरवरी 2026 में पूरे कॉरिडोर पर परिचालन शुरू होने के बाद से लोगों के बीच नमो भारत की लोकप्रियता बढ़ी है।

वर्तमान में कॉरिडोर पर प्रतिदिन करीब एक लाख यात्री सफर कर रहे हैं और कुल यात्री यात्राओं का आंकड़ा 4 करोड़ से अधिक हो चुका है। रक्षाबंधन के मौके पर 28 अगस्त को कॉरिडोर ने अब तक की सबसे अधिक दैनिक यात्री संख्या दर्ज की। उस दिन 1.68 लाख से अधिक यात्रियों ने नमो भारत ट्रेनों से यात्रा की। इससे पहले भी त्योहारों, अधिक यात्री मांग, भीषण गर्मी, मॉनसून और कांवड़ यात्रा जैसे चुनौतीपूर्ण समय में नमो भारत का परिचालन लगातार जारी रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी ने भी दिल्ली-मेरठ नमो भारत रैपिड रेल प्रणाली को सुशासन का एक अच्छा उदाहरण बताते हुए इसके समय पर पूरा होने और बेहतर सेवा की सराहना की है। यह सोलर परियोजना एनएनआरएल द्वारा विकसित की जा रही है। एनएनआरएल, एनसीआरटीसी और एनआईआरएल का संयुक्त उपक्रम है।

एनआईआरएल, नेवेली लिग्नाइट कॉरपोरेशन (एनएलसी) की 100 प्रतिशत सहायक कंपनी है। 110 मेगावॉट की यह परियोजना केवल नमो भारत कॉरिडोर की बिजली जरूरतों को पूरा करने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि भविष्य के शहरी और क्षेत्रीय परिवहन नेटवर्क के लिए भी एक उदाहरण पेश करेगी।

--आईएएनएस

पीकेटी/एएसएच