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नमन ओझा: घरेलू क्रिकेट का सबसे सफल विकेटकीपर, इंटरनेशनल क्रिकेट में नहीं मिल सके पर्याप्त मौके

नई दिल्ली, 19 जुलाई (आईएएनएस)। घरेलू क्रिकेट में सबसे सफल विकेटकीपर बल्लेबाजों की बात होती है, तो सबसे पहले नमन ओझा का नाम आता है। नमन रणजी ट्रॉफी में बतौर विकेटकीपर सबसे ज्यादा शिकार करने वाले खिलाड़ी रहे। घरेलू क्रिकेट में उनका रिकॉर्ड बेमिसाल रहा, लेकिन उन्हें इंटरनेशनल स्तर पर पर्याप्त मौके नहीं मिल सके।
 

नई दिल्ली, 19 जुलाई (आईएएनएस)। घरेलू क्रिकेट में सबसे सफल विकेटकीपर बल्लेबाजों की बात होती है, तो सबसे पहले नमन ओझा का नाम आता है। नमन रणजी ट्रॉफी में बतौर विकेटकीपर सबसे ज्यादा शिकार करने वाले खिलाड़ी रहे। घरेलू क्रिकेट में उनका रिकॉर्ड बेमिसाल रहा, लेकिन उन्हें इंटरनेशनल स्तर पर पर्याप्त मौके नहीं मिल सके।

नमन का जन्म 20 जुलाई, 1983 को मध्य प्रदेश के उज्जैन में हुआ। बचपन से ही नमन को क्रिकेट से खास लगाव था और जल्द ही उन्होंने इस खेल में अपना करियर बनाने का फैसला कर लिया। घरेलू क्रिकेट में नमन आने के साथ ही छा गए और इसके बाद उन्हें पीछे मुड़कर नहीं देखा। नमन ने घरेलू क्रिकेट में साल 2000 में डेब्यू किया। मध्य प्रदेश की तरफ से उन्होंने 146 फर्स्ट क्लास मैच खेले और इस दौरान 9,753 रन बनाए। नमन ने घरेलू क्रिकेट में 22 शतक और 55 अर्धशतक लगाए। इसके साथ ही एक दोहरा शतक भी उनके बल्ले से आया। बतौर विकेटकीपर नमन ने घरेलू क्रिकेट में 351 शिकार किए, जो एक रिकॉर्ड है।

घरेलू क्रिकेट में लगातार अच्छे प्रदर्शन का इनाम उन्हें 5 जून, साल 2010 में मिला। नमन ने भारतीय टीम की जर्सी में अपना डेब्यू श्रीलंका के खिलाफ वनडे फॉर्मेट में किया। नमन ने भारत के लिए एक वनडे, दो टी20, और एक टेस्ट मैच खेला। इस दौरान उन्होंने तीनों फॉर्मेट को मिलाकर कुल 69 रन बनाए। वह अपने इंटरनेशनल करियर में कोई भी अर्धशतक या शतक नहीं लगा सके। हालांकि, नमन को इंटरनेशनल क्रिकेट में अपनी काबिलियत साबित करने के पर्याप्त मौके नहीं मिले और उन्होंने साल 2021 में संन्यास का ऐलान किया।

20 जुलाई, 1976 को भारतीय क्रिकेटर देबाशीष मोहंती का भी जन्म हुआ। वह ओडिशा की तरफ से भारतीय टीम में जगह बनाने वाले पहले क्रिकेटर रहे। मध्यम गति के तेज गेंदबाज देबाशीष ने अपने करियर के शुरुआती दौर में बल्लेबाजों को अपनी स्विंग के दम पर खूब तंग किया। 1999 में खेले गए विश्व कप में इंग्लैंड की परिस्थितियों में देबाशीष बेहद असरदार साबित हुए, और उन्होंने 6 मुकाबलों में 10 विकेट निकाले। जवागल श्रीनाथ के साथ मिलकर उन्होंने भारतीय टीम को कई मुकाबलों में जीत दिलाई।

हालांकि, देबाशीष का करियर बहुत लंबा नहीं चला। उन्होंने भारतीय टीम के लिए कुल 45 वनडे मैच खेले और इस दौरान उन्होंने 57 विकेट चटकाए। वहीं, 2 टेस्ट मैचों में उन्होंने 4 विकेट निकाले। देबाशीष को एक समय पर टेस्ट क्रिकेट का आने वाला दिग्गज गेंदबाज माना जा रहा था, लेकिन मौके न मिलने की वजह से वह गुमनामी की दुनिया में खो गए।

देबाशीष के पास गेंद को दोनों तरफ लहराने की काबिलियत थी, लेकिन रफ्तार में कमी और जहीर खान, आशीष नेहरा जैसे युवा गेंदबाजों के आने के बाद उन्हें दरकिनार कर दिया गया। उनका इंटरनेशनल करियर सिर्फ 4 साल में ही खत्म हो गया। भारतीय जर्सी में उन्होंने अपना आखिरी मैच साल 2001 में खेला।

--आईएएनएस

एसएम/पीएम