Aapka Rajasthan

नागालैंड में छात्रों की संख्या में असमानता के बीच स्कूलों को व्यवस्थित और शिक्षकों को फिर से तैनात करने की तैयारी

कोहिमा, 2 सितंबर (आईएएनएस)। नागालैंड सरकार ने सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी और राज्य के विभिन्न जिलों में शिक्षकों व छात्रों के असमान वितरण पर चिंता जताई है। मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो और तेमजेन इमना अलोंग ने वास्तविक नामांकन के आधार पर स्कूलों को व्यवस्थित करने और शिक्षकों को फिर से तैनात करने की जरूरत पर जोर दिया है।
 

कोहिमा, 2 सितंबर (आईएएनएस)। नागालैंड सरकार ने सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी और राज्य के विभिन्न जिलों में शिक्षकों व छात्रों के असमान वितरण पर चिंता जताई है। मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो और तेमजेन इमना अलोंग ने वास्तविक नामांकन के आधार पर स्कूलों को व्यवस्थित करने और शिक्षकों को फिर से तैनात करने की जरूरत पर जोर दिया है।

मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो ने यह जानकारी नागालैंड विधानसभा में विधायक ए. न्याम्न्येई कोन्याक की ओर से पूछे गए एक सवाल के जवाब में दी। विधायक ने उच्च माध्यमिक, हाई, मिडिल और प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों की रिक्तियों की जिला-वार जानकारी मांगी थी।

मुख्यमंत्री रियो ने बताया कि नागालैंड में वर्तमान में छात्र-शिक्षक अनुपात लगभग 7:1 है, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह करीब 24:1 है। यानी राज्य में प्रति शिक्षक विद्यार्थियों की संख्या राष्ट्रीय औसत की तुलना में काफी कम है। उन्होंने कहा कि यह उच्च अनुपात सिर्फ शिक्षकों की अधिकता के कारण नहीं है, बल्कि इसलिए भी है, क्योंकि स्कूलों को जनसंख्या के अनुमान और बाद की जरूरतों के आधार पर बनाया या अपग्रेड किया गया था।

इस मुद्दे को गंभीर चिंता का विषय बताते हुए मुख्यमंत्री रियो ने कहा कि सरकार और संबंधित विभाग स्थिति की समीक्षा कर रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि राज्य का असामान्य रूप से कम छात्र-शिक्षक अनुपात आंशिक रूप से 2001 की जनगणना के आंकड़ों पर आधारित जनसंख्या अनुमानों से जुड़ा है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि 'शिक्षा का अधिकार' (आरटीई) ढांचा लागू होने के बाद अलग-अलग इलाकों में स्कूल बनाने और उन्हें अपग्रेड करने के लिए जनसंख्या के आंकड़ों का इस्तेमाल किया गया था। उन्होंने कहा कि इसके बाद नागालैंड में स्कूलों का काफी विस्तार हुआ, जबकि 2001 की जनगणना के आंकड़ों की सटीकता को लेकर चिंताएं भी थीं।

उन्होंने कहा कि स्कूलों की संख्या में कमी को सिर्फ शैक्षिक बुनियादी ढांचे की कमी के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। कुछ मामलों में, शिक्षक होने के बावजूद स्कूलों में बहुत कम छात्र हैं या एक भी छात्र नहीं है। उन्होंने सुझाव दिया कि स्कूलों, खासकर पूर्वी नागालैंड पीपुल्स ऑर्गनाइजेशन (ईएनपीओ) क्षेत्र और मोन जिले में, छात्रों की उपलब्धता, पहुंच और स्थानीय जरूरतों के आधार पर फिर से मूल्यांकन किया जाना चाहिए।

मुख्यमंत्री रियो ने कहा कि जिन स्कूलों में 10 से कम छात्र हैं और पास में ही कोई दूसरा स्कूल है, वहां स्कूलों को मिलाने या एक साथ करने पर विचार किया जा सकता है। साथ ही, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ऐसे कदमों में दूर-दराज और पिछड़े इलाकों की पहुंच और शैक्षिक जरूरतों का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।

कोन्याक ने मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री के जवाब पर संतोष जताया। हालांकि, उन्होंने मिडिल इंग्लिश (एमई) और लोअर प्राइमरी (एलपी) स्कूलों में खाली पदों को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि रिटायरमेंट की वजह से प्राइमरी और मिडिल स्कूलों में शिक्षकों की कमी हो गई है, लेकिन उनकी जगह नए शिक्षकों की भर्ती उस तेजी से नहीं हो पाई। जहां ग्रेजुएट टीचर और पोस्ट ग्रेजुएट टीचर की भर्ती नागालैंड पब्लिक सर्विस कमीशन के जरिए होती है, वहीं उन्होंने यह साफ करने को कहा कि एमई और एलपी टीचर के लिए भर्ती इंटरव्यू कब होंगे।

कोन्याक ने राज्य में स्कूलों की संख्या में कमी पर भी चिंता जताई और बताया कि यह संख्या 1,939 से घटकर 1,881 हो गई है। उन्होंने कहा कि पिछड़े इलाकों के स्कूलों के साथ अलग तरह से व्यवहार किया जाना चाहिए, जिसमें शिक्षा और आर्थिक हालात, बातचीत में मुश्किल और संस्थानों की उपलब्धता जैसी बातों का ध्यान रखा जाए।

कोन्याक ने चेतावनी दी कि स्कूलों को और मिलाने से शिक्षा के लिहाज से पिछड़े इलाकों पर बुरा असर पड़ सकता है। उन्होंने दूर-दराज के इलाकों में स्कूलों को सही ढंग से व्यवस्थित करने के लिए एक खास तरीका अपनाने की मांग की।

इन चिंताओं का जवाब देते हुए शिक्षा मंत्री इमना अलोंग ने कहा कि शिक्षकों की तैनाती किसी तय जिले-वार कोटे के आधार पर नहीं, बल्कि अलग-अलग स्कूलों की जरूरतों के आधार पर की जाती है। उन्होंने कहा कि विभाग सरकारी प्राइमरी स्कूलों (जीपीएस), सरकारी मिडिल स्कूलों (जीएमएस), सरकारी हाई स्कूलों (जीएचएस) और सरकारी हायर सेकेंडरी स्कूलों की जरूरतों का आकलन करता है।

अलोंग ने कहा कि कुछ इलाकों में ऐसे स्कूल हैं, जहाx छात्र बहुत कम हैं लेकिन शिक्षकों की संख्या अधिक है, जबकि दूसरी जगहों पर कमी है। जिन मामलों में स्कूलों में छात्र नहीं हैं, विभाग उन्हें पास के स्कूलों के साथ मिला सकता है और शिक्षकों को उन संस्थानों में फिर से तैनात कर सकता है जहां छात्र मौजूद हैं।

उन्होंने साफ किया कि यह कवायद किसी खास जिले, जनजाति या समुदाय को निशाना बनाकर नहीं की जा रही थी, बल्कि असल शैक्षिक जरूरतों के आधार पर की जा रही थी। मंत्री ने फिर से कहा कि नागालैंड का छात्र-शिक्षक अनुपात 7:1 है, जो राष्ट्रीय अनुपात 24:1 से काफी कम है, जबकि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का बेंचमार्क इसके आस-पास है।

--आईएएनएस

डीसीएच/