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'मुन्ना भाई एमबीबीएस' और 'गंगाजल' जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्में देने के बाद क्यों बॉलीवुड से दूर हुईं ग्रेसी सिंह

नई दिल्ली, 19 जुलाई (आईएएनएस)। ग्रेसी सिंह का नाम उन अभिनेत्रियों में शामिल है, जिन्होंने बेहद कम समय में अपनी सादगी, सहज अभिनय और दमदार किरदारों के दम पर दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई। साल 2001 में रिलीज हुई फिल्म 'लगान' ने उन्हें रातोंरात स्टार बना दिया। इस फिल्म में आमिर खान के साथ उनकी जोड़ी को खूब पसंद किया गया और उनकी मासूम अदाकारी ने हर किसी का दिल जीत लिया। हालांकि, शानदार शुरुआत और कई सफल फिल्मों के बावजूद ग्रेसी सिंह धीरे-धीरे बॉलीवुड से दूर होती चली गईं।
 

नई दिल्ली, 19 जुलाई (आईएएनएस)। ग्रेसी सिंह का नाम उन अभिनेत्रियों में शामिल है, जिन्होंने बेहद कम समय में अपनी सादगी, सहज अभिनय और दमदार किरदारों के दम पर दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई। साल 2001 में रिलीज हुई फिल्म 'लगान' ने उन्हें रातोंरात स्टार बना दिया। इस फिल्म में आमिर खान के साथ उनकी जोड़ी को खूब पसंद किया गया और उनकी मासूम अदाकारी ने हर किसी का दिल जीत लिया। हालांकि, शानदार शुरुआत और कई सफल फिल्मों के बावजूद ग्रेसी सिंह धीरे-धीरे बॉलीवुड से दूर होती चली गईं।

ग्रेसी सिंह ने अपने करियर की शुरुआत एक डांसर के रूप में की थी। वह 'द प्लैनेट्स' डांस ग्रुप के साथ कई स्टेज शो और टूर का हिस्सा रहीं। इसके बाद उन्होंने 1997 में टीवी सीरियल 'अमानत' से अभिनय की दुनिया में कदम रखा। छोटे पर्दे पर पहचान बनाने के बाद उन्हें आशुतोष गोवारिकर की फिल्म 'लगान: वन्स अपॉन ए टाइम इन इंडिया' में काम करने का मौका मिला। आमिर खान द्वारा निर्मित इस फिल्म में ग्रेसी ने गौरी का किरदार निभाया, जिसे दर्शकों और समीक्षकों ने खूब सराहा।

'लगान' न केवल बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट साबित हुई, बल्कि इसे ऑस्कर के बेस्ट फॉरेन लैंग्वेज फिल्म कैटेगरी में भी नामांकन मिला। यह सम्मान पाने वाली 'मदर इंडिया' और 'सलाम बॉम्बे' के बाद तीसरी भारतीय फिल्म बनी। इस सफलता के बाद ग्रेसी सिंह बॉलीवुड की चर्चित अभिनेत्रियों में शामिल हो गईं।

इसके बाद उन्होंने 'मुन्ना भाई एमबीबीएस', 'गंगाजल' और 'अरमान' जैसी फिल्मों में काम किया। 'मुन्ना भाई एमबीबीएस' और 'गंगाजल' को बड़ी सफलता मिली, लेकिन 'अरमान' बॉक्स ऑफिस पर उम्मीदों पर खरी नहीं उतर सकी। इसके बाद उनकी कई फिल्में, जैसे 'चंचल', 'देशद्रोही' और 'देख भाई देख', लगातार फ्लॉप होती रहीं। इन असफलताओं का असर उनके करियर पर साफ दिखाई दिया और उन्हें बॉलीवुड में पहले जैसी पहचान नहीं मिल सकी।

हिंदी फिल्मों में सफलता कम होने के बाद ग्रेसी सिंह ने तमिल, तेलुगु, मलयालम, गुजराती, पंजाबी और बंगाली फिल्मों में भी काम किया। हालांकि, वहां भी उन्हें अपेक्षित सफलता नहीं मिली। आखिरकार उन्होंने फिल्मों से दूरी बना ली। ग्रेसी ने कई इंटरव्यू में कहा है कि अभिनय उनके जीवन का अंतिम लक्ष्य कभी नहीं था और न ही उन्हें सुपरस्टार बनने की कोई विशेष इच्छा थी।

साल 2015 में उन्होंने टीवी शो 'संतोषी मां' से छोटे पर्दे पर वापसी की। इस धारावाहिक में देवी संतोषी मां के रूप में उनके अभिनय को दर्शकों ने काफी पसंद किया और नई पीढ़ी के बीच भी उन्हें पहचान मिली।

समय के साथ ग्रेसी सिंह आध्यात्मिक संस्था ब्रह्माकुमारीज से गहराई से जुड़ गईं। वह अक्सर आध्यात्मिक जीवन, आत्मसंतोष और प्रसिद्धि से परे सच्ची खुशी की बात करती हैं। ग्रेसी सिंह अभी भी अविवाहित हैं और फिल्मों की चकाचौंध से दूर एक शांत, संतुलित और आध्यात्मिक जीवन जी रही हैं। उनकी कहानी इस बात का उदाहरण है कि सफलता केवल शोहरत में नहीं, बल्कि अपने मन की शांति और संतुष्टि में भी छिपी होती है।

--आईएएनएस

एसएके/पीएम