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मुंबई–पुणे एक्सप्रेसवे का मिसिंग लिंक टनल प्रोजेक्ट गिनीज विश्व रिकॉर्ड में दर्ज, भारत की सबसे आधुनिक और सुरक्षित सड़क परियोजनाओं में शामिल

मुंबई, 1 मई (आईएएनएस)। मुंबई–पुणे एक्सप्रेसवे के मिसिंग लिंक टनल प्रोजेक्ट को गिनीज विश्व रिकॉर्ड में दर्ज किया गया है। यह परियोजना भारत के सबसे आधुनिक और सुरक्षित सड़क विकास कार्यों में से एक मानी जा रही है। इस प्रोजेक्ट में वाहनों को अधिकतम लगभग 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से सुरक्षित तरीके से चलाने की सुविधा दी गई है, जिससे यात्रा अधिक सुगम और आरामदायक हो जाती है।
 
मुंबई–पुणे एक्सप्रेसवे का मिसिंग लिंक टनल प्रोजेक्ट गिनीज विश्व रिकॉर्ड में दर्ज, भारत की सबसे आधुनिक और सुरक्षित सड़क परियोजनाओं में शामिल

मुंबई, 1 मई (आईएएनएस)। मुंबई–पुणे एक्सप्रेसवे के मिसिंग लिंक टनल प्रोजेक्ट को गिनीज विश्व रिकॉर्ड में दर्ज किया गया है। यह परियोजना भारत के सबसे आधुनिक और सुरक्षित सड़क विकास कार्यों में से एक मानी जा रही है। इस प्रोजेक्ट में वाहनों को अधिकतम लगभग 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से सुरक्षित तरीके से चलाने की सुविधा दी गई है, जिससे यात्रा अधिक सुगम और आरामदायक हो जाती है।

इसे इस तरह विकसित किया गया है कि यह पूरी तरह सुरक्षित मार्ग बने और दुर्घटनाओं की संभावना बहुत कम हो, इसलिए इसे जीरो फैटिलिटी कॉरिडोर (शून्य घातकता गलियारा) के रूप में भी तैयार किया गया है।

इस परियोजना से यात्रा का समय लगभग 30 मिनट तक कम हो जाएगा और रोजाना लगभग 9 करोड़ रुपए कीमत के ईंधन की बचत होने का अनुमान है। इसमें आधुनिक वायु गुणवत्ता नियंत्रण और आपातकालीन सुरक्षा व्यवस्था भी लगाई गई है, जिसमें मदद बुलाने की व्यवस्था और सार्वजनिक घोषणा प्रणाली जैसी सुविधाएं शामिल हैं।

टनलों में आग से सुरक्षा के लिए उन्नत व्यवस्था और हवा के प्रवाह को नियंत्रित करने के लिए विशेष प्रणाली बनाई गई है। इसके अलावा यातायात की निगरानी के लिए स्मार्ट व्यवस्था भी स्थापित की गई है, जिससे पूरे मार्ग पर लगातार नजर रखी जा सके।

इस परियोजना का मार्ग खोपोली निकास से लेकर लोनावला क्षेत्र तक फैला हुआ है और इसमें खालापुर–खोपोली खंड का आठ लेन तक विस्तार भी शामिल है। इसकी कुल लागत लगभग 6695 करोड़ रुपए से अधिक है। टाइगर घाटी क्षेत्र में देश का सबसे ऊंचा केबल आधारित पुल भी बनाया गया है, जिसकी ऊंचाई लगभग 182 मीटर है।

इस पूरे मार्ग में कई सुरंगें और पुल शामिल हैं। एक बड़ी सुरंग लगभग 8.87 किलोमीटर लंबी है और दूसरी लगभग 1.68 किलोमीटर की है। बीच-बीच में सुरक्षा के लिए हर कुछ सौ मीटर पर आपातकालीन रास्ते बनाए गए हैं ताकि किसी भी स्थिति में सुरक्षित निकास संभव हो सके।

इस नए मार्ग से पुराना घाट वाला रास्ता लगभग 19 किलोमीटर का था, जबकि नया मार्ग बनने के बाद दूरी में लगभग 6 किलोमीटर की कमी आ गई है, जिससे यात्रा और तेज तथा सुविधाजनक हो गई है।

--आईएएनएस

एसएचके/वीसी