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मुंबई में सप्ताह में एक दिन निर्माण कार्य रोकने का प्रस्ताव, वायु प्रदूषण पर मंत्री आशीष शेलार की बीएमसी को चिट्ठी

मुंबई, 26 अक्टूबर (आईएएनएस)। मुंबई में बढ़ते वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए महाराष्ट्र सरकार के मंत्री और मुंबई उपनगर के पालकमंत्री आशीष शेलार ने बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) आयुक्त अश्विनी भिडे को पत्र लिखकर कई व्यापक उपायों का सुझाव दिया है। शेलार ने प्रस्ताव रखा है कि बीएमसी क्षेत्र में सप्ताह में एक दिन सभी निर्माण और ध्वस्तीकरण (डिमोलिशन) गतिविधियों को पूरी तरह बंद रखा जाए, ताकि प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सके।
 

मुंबई, 26 अक्टूबर (आईएएनएस)। मुंबई में बढ़ते वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए महाराष्ट्र सरकार के मंत्री और मुंबई उपनगर के पालकमंत्री आशीष शेलार ने बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) आयुक्त अश्विनी भिडे को पत्र लिखकर कई व्यापक उपायों का सुझाव दिया है। शेलार ने प्रस्ताव रखा है कि बीएमसी क्षेत्र में सप्ताह में एक दिन सभी निर्माण और ध्वस्तीकरण (डिमोलिशन) गतिविधियों को पूरी तरह बंद रखा जाए, ताकि प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सके।

शेलार ने अपने पत्र में कहा कि सर्दियों के मौसम में वायु प्रदूषण बढ़ने की आशंका को देखते हुए तत्काल और दीर्घकालिक कदम उठाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि नागरिकों की ओर से लगातार प्रदूषण को लेकर शिकायतें और सुझाव प्राप्त हो रहे हैं, वहीं बॉम्बे हाई कोर्ट ने भी मुंबई की खराब होती वायु गुणवत्ता पर चिंता व्यक्त की है।

आशीष शेलार ने प्रदूषण नियंत्रण के लिए बीएमसी द्वारा अब तक उठाए गए कदमों की सराहना की। उन्होंने निर्माण स्थलों पर प्रदूषण नियंत्रण उपाय, वार्ड स्तर की निरीक्षण टीमों, सेंट्रल एयर क्वालिटी डैशबोर्ड के माध्यम से 3,166 निर्माण स्थलों की निगरानी, निर्माण मलबा प्रबंधन प्रणाली, बेकरियों में स्वच्छ ईंधन के उपयोग और श्मशान घाटों में प्रदूषण नियंत्रण प्रणालियों का विशेष उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2017-18 की तुलना में मुंबई में पीएम-10 प्रदूषण स्तर में लगभग 48 प्रतिशत की कमी आई है, लेकिन वायु गुणवत्ता में और सुधार के लिए अधिक व्यापक एवं सख्त उपायों की आवश्यकता है।

शेलार ने दिल्ली की तर्ज पर मुंबई के लिए विशेष ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (ग्रैप) तैयार करने का सुझाव दिया। उनका कहना है कि वायु गुणवत्ता खराब होने पर पूर्व निर्धारित उपाय तुरंत लागू किए जाने चाहिए।

उन्होंने प्रदूषण प्रभावित क्षेत्रों और प्रमुख यातायात मार्गों पर उपचारित पानी से सड़कों की धुलाई, नियमित जल छिड़काव, रात के समय मशीनीकृत सड़क सफाई, गड्ढों की तत्काल मरम्मत और खुदाई के बाद सड़कों की समयबद्ध बहाली की भी मांग की।

शेलार ने कचरा जलाने, डंपिंग ग्राउंड में आग लगने और निर्माण मलबे की अवैध डंपिंग जैसी घटनाओं की शिकायत दर्ज कराने के लिए एक समर्पित हेल्पलाइन और सोशल मीडिया अकाउंट शुरू करने का सुझाव दिया।

उन्होंने कहा कि शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई हो, दोषियों पर दंडात्मक कार्रवाई की जाए और हर सप्ताह कार्रवाई रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए। साथ ही अधिक प्रदूषित क्षेत्रों और प्रमुख ट्रैफिक जंक्शनों पर एंटी-स्मॉग गन एवं मिस्ट स्प्रेयर तैनात किए जाएं।

मंत्री ने मुंबई ट्रैफिक पुलिस और क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) के संयुक्त अभियान चलाने का सुझाव दिया। उन्होंने प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (पीयूसी) की जांच बढ़ाने और वैध प्रमाणपत्र नहीं रखने वाले भारी वाहनों के बीएमसी क्षेत्र में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने की मांग की।

उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रदूषण नियंत्रण की ये कार्रवाई केवल मुंबई तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि पूरे मुंबई महानगर क्षेत्र (एमएमआर) की स्थानीय निकायों के साथ समन्वय बनाकर लागू की जानी चाहिए।

शेलार ने निर्माण स्थलों पर सेंसर आधारित वायु गुणवत्ता निगरानी प्रणाली जल्द स्थापित करने पर भी जोर दिया। इसके अलावा उन्होंने लकड़ी और कोयले का उपयोग करने वाली शेष 87 बेकरियों को स्वच्छ ईंधन में परिवर्तित करने की आवश्यकता बताई।

उन्होंने उद्योगों में कोयले की खपत पर भी चिंता व्यक्त की। शेलार के अनुसार, मुंबई महानगर क्षेत्र के उद्योग ऊर्जा और ईंधन के लिए बड़ी मात्रा में कोयले का उपयोग करते हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि उद्योगों को हरित ईंधन अपनाने के लिए कम ब्याज वाले ऋण, कर रियायतें और ग्रीन एनर्जी फंड के माध्यम से वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाए।

शेलार ने सार्वजनिक और निजी परिवहन के विद्युतीकरण को तेज करने के लिए विशेष प्रोत्साहन योजनाएं लाने की मांग की। उन्होंने कहा कि ऑटोमोबाइल उद्योग और निजी कंपनियों की सहभागिता से स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा दिया जा सकता है।

वायु प्रदूषण के खिलाफ जनभागीदारी को महत्वपूर्ण बताते हुए मंत्री ने बीएमसी के सभी 26 वार्डों में नागरिक समूहों, जनप्रतिनिधियों और संबंधित सरकारी विभागों की बैठकें आयोजित करने का सुझाव दिया। इन बैठकों में स्थानीय समस्याओं की पहचान कर उनके समाधान पर चर्चा की जा सकती है।

इसके अलावा उन्होंने उद्योग जगत की प्रमुख कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ अलग बैठक आयोजित कर प्रदूषण नियंत्रण अभियानों के लिए तकनीकी सहयोग और वित्तीय सहायता प्राप्त करने का भी प्रस्ताव रखा।

--आईएएनएस

एएमटी/डीकेपी