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मुंबई के झुग्गी-बस्ती वाले इलाकों में साल भर होगी नालियों की सफाई: गणेश कनेकर

मुंबई, 11 अगस्त (आईएएनएस)। महाराष्ट्र में भाजपा के बीएमसी (बृहन्मुंबई नगर निगम) नेता गणेश कनेकर ने सफाई कर्मचारियों का मानदेय बढ़ाने, झुग्गी-बस्ती वाले इलाकों में साल भर नालियों की सफाई, प्राइवेट लेआउट के लिए कॉरपोरेटर फंड, बीएमसी स्कूलों में स्कूल का सामान बांटने और बीएमसी की खुली जगहों के निजीकरण जैसे मुद्दों को लेकर अपनी बातें रखीं।
 

मुंबई, 11 अगस्त (आईएएनएस)। महाराष्ट्र में भाजपा के बीएमसी (बृहन्मुंबई नगर निगम) नेता गणेश कनेकर ने सफाई कर्मचारियों का मानदेय बढ़ाने, झुग्गी-बस्ती वाले इलाकों में साल भर नालियों की सफाई, प्राइवेट लेआउट के लिए कॉरपोरेटर फंड, बीएमसी स्कूलों में स्कूल का सामान बांटने और बीएमसी की खुली जगहों के निजीकरण जैसे मुद्दों को लेकर अपनी बातें रखीं।

उन्होंने मंगलवार को समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में कहा कि मुंबई महापालिका द्वारा सफाई कर्मचारियों को करीब 5,800 रुपए दिया जा रहा है। यह बिल्कुल भी ठीक नहीं है। इसके तुलना में उन्हें दोगुनी, करीब 11 से 12 हजार रुपए के बीच, मानदेय दिया जाना चाहिए, जिससे वह मन लगाकर और ठीक तरीके से काम कर सकें।

झुग्गी-बस्ती वाले इलाकों में पूरे साल नालियों की सफाई को लेकर उन्होंने कहा कि मुंबई में 10 वर्ष पहले तक साल भर छोटे-छोटे बस्तियों में नालों की सफाई करने का काम नियमित रूप से होता था। दत्तक वस्ती योजना आई, लेकिन न तो नालों की सफाई हो रही है और न ही कचरा उठाया जा रहा है, इसलिए हमने कचरा जमा करने का जो काम है, इसे अलग करवाया है और नालों की सफाई का काम वर्ष भर चलेगा ताकि बारिश के समय होने वाली असुविधाओं से बचा जा सके।

उन्होंने कहा कि 20-25 वर्ष पहले नालियों में पानी भरना एक सामान्य बात थी, लेकिन उस समय वर्ष भर नालियों की सफाई नियमित रूप से होती है। उसी समय को हम फिर से वापस ला रहे हैं, ताकि लोगों को साफ-सुधरा मुंबई मिले। उन्होंने आगे कहा कि हम चाहते हैं कि मध्यमवर्गीय परिवार जो सामान्य सोसाइटी में रहती है, वहां भी नगर सेवा नीति से विकास का काम हो। लोग मुंबई महापालिका को टैक्स देते हैं। ऐसे में अगर वे सुविधा और विकास चाहते हैं तो यह उनका हक है।

बीएमसी स्कूलों में सामान बांटने और छात्रों को छाता और ड्रेस देने को लेकर उन्होंने कहा कि इसके लेकर काम नियमित रूप से जारी है।

--आईएएनएस

डीके/डीकेपी