Aapka Rajasthan

एमएसएमई भारत की अर्थव्यवस्था की मजबूत नींव, रक्षा क्षेत्र में भी अपार संभावनाएं: राजनाथ सिंह

नोएडा, 1 सितंबर (आईएएनएस)। इंडियन इंडस्ट्री एसोसिएशन के एमएसएमई पुरस्कार समारोह में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने देश के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को विकसित भारत की मजबूत नींव बताते हुए कहा कि आने वाले वर्षों में देश की आर्थिक और रणनीतिक ताकत को बढ़ाने में एमएसएमई की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण होने वाली है।
 

नोएडा, 1 सितंबर (आईएएनएस)। इंडियन इंडस्ट्री एसोसिएशन के एमएसएमई पुरस्कार समारोह में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने देश के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को विकसित भारत की मजबूत नींव बताते हुए कहा कि आने वाले वर्षों में देश की आर्थिक और रणनीतिक ताकत को बढ़ाने में एमएसएमई की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण होने वाली है।

उन्होंने पुरस्कार पाने वाले उद्यमियों को बधाई देते हुए उनसे घरेलू बाजार तक सीमित न रहने और भारतीय उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने का आह्वान किया।

राजनाथ सिंह ने कार्यक्रम की शुरुआत जल संरक्षण के संकल्प के साथ किए जाने की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि यह पहल उद्योग जगत की समाज और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी को दर्शाती है। रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत के रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (डीपीएसयू) के साथ करीब 16 हजार एमएसएमई जुड़े हुए हैं। ऐसे में रक्षा विनिर्माण क्षेत्र छोटे और मध्यम उद्यमों के लिए बड़े अवसर उपलब्ध करा सकता है।

उन्होंने उद्यमियों से रक्षा क्षेत्र को केवल सरकारी खरीद का बाजार न समझने की अपील की। उनके मुताबिक ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, साइबर सुरक्षा, उन्नत इलेक्ट्रॉनिक्स, सेंसर, स्वायत्त प्रणालियां, उन्नत सामग्री, अंतरिक्ष और क्वांटम तकनीक जैसे क्षेत्रों में भविष्य की बड़ी संभावनाएं हैं।

उन्होंने कहा कि आज के वैश्विक प्रतिस्पर्धी माहौल में केवल अच्छी गुणवत्ता वाला उत्पाद बनाना पर्याप्त नहीं है। उद्योगों को यह भी देखना होगा कि वे अपने उत्पाद को और बेहतर, कम लागत वाला तथा नई तकनीक से लैस कैसे बना सकते हैं। इसके साथ ही उत्पाद को वैश्विक बाजार के लिए प्रतिस्पर्धी बनाना होगा।

रक्षा मंत्री ने एमएसएमई से अपने टर्नओवर का एक हिस्सा अनुसंधान एवं विकास और तकनीकी उन्नयन में निवेश करने की अपील की।

राजनाथ सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालयों, आईआईटी, अनुसंधान संस्थानों, डीआरडीओ प्रयोगशालाओं, स्टार्टअप और बड़ी औद्योगिक इकाइयों के साथ साझेदारी बढ़ाना समय की जरूरत है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि निजी क्षेत्र को रक्षा तकनीक की आवश्यकता होने पर डीआरडीओ से संपर्क करने में संकोच नहीं करना चाहिए। किसी प्रकार की समस्या आने पर उद्योग प्रतिनिधि उनसे भी संपर्क कर सकते हैं।

रक्षा मंत्री ने एमएसएमई के विकास के लिए पांच महत्वपूर्ण क्षेत्रों गुणवत्ता, कौशल विकास, तकनीकी उन्नयन, बाजार तक पहुंच और वित्त पर विशेष ध्यान देने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि वैश्विक बाजार में भारतीय एमएसएमई की पहचान गुणवत्ता और विश्वसनीयता के आधार पर बनेगी। रक्षा क्षेत्र में तो गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता।

राजनाथ ने ‘जीरो डिफेक्ट’ और ‘जीरो कॉम्प्रोमाइज ऑन क्वालिटी’ का लक्ष्य अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आधुनिक उद्योगों के लिए कुशल कार्यबल बेहद जरूरी है। युवाओं को उद्योग की जरूरत के अनुरूप कौशल से जोड़ने के साथ एमएसएमई को अपने कर्मचारियों के निरंतर अपस्किलिंग पर ध्यान देना होगा। डिजिटल मैन्युफैक्चरिंग, ऑटोमेशन, एआई और एडवांस्ड प्रोडक्शन टेक्नोलॉजी को एमएसएमई के लिए सुलभ और किफायती बनाने की आवश्यकता भी उन्होंने बताई।

उन्‍होंने कहा कि दुनिया तेजी से बदलती वैश्विक सप्लाई चेन के बीच भरोसेमंद मैन्युफैक्चरिंग पार्टनर की तलाश कर रही है और यह भारत के लिए बड़ा अवसर है। भारत ने कई महत्वपूर्ण वैश्विक साझेदारों के साथ मुक्त व्यापार समझौतों की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इन समझौतों से भारतीय एमएसएमई और उद्योगों के लिए निर्यात के नए अवसर खुलेंगे।

उन्होंने उद्यमियों से सरकार की क्रेडिट गारंटी, जीएसटी युक्तिकरण और अन्य योजनाओं का लाभ उठाकर भारतीय उत्पादों की पहचान दुनिया के कोने-कोने तक पहुंचाने की अपील की। उन्होंने कहा कि एमएसएमई को केवल घरेलू आपूर्तिकर्ता बनने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें वैश्विक उद्यमी, टेक्नोलॉजी डेवलपर, सिस्टम सप्लायर और निर्यातक बनने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।

एमएसएमई पुरस्कारों को लेकर रक्षा मंत्री ने कहा कि ये सम्मान केवल उपलब्धियों की मान्यता नहीं हैं, बल्कि उत्कृष्टता, नवाचार और मेहनत को प्रोत्साहित करने का संदेश भी देते हैं। उन्होंने सभी पुरस्कार विजेताओं और विशेष रूप से महिला उद्यमियों को बधाई दी।

उन्होंने पुरस्कार विजेताओं से कहा कि इस सम्मान के बाद उनकी यात्रा समाप्त नहीं होती, बल्कि एक नए लक्ष्य की शुरुआत होती है। उन्होंने उद्यमियों से अपने कारोबार का विस्तार करने और वैश्विक बाजार में पहचान बनाने का प्रयास करने को कहा। उन्होंने उम्मीद जताई कि अगली बार पुरस्कार विजेता केवल घरेलू बाजार के लीडर के रूप में नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने वाले उद्यमियों के रूप में सामने आएंगे।

राजनाथ सिंह ने उत्तर प्रदेश समेत उत्तर भारत के एमएसएमई क्षेत्र की क्षमता का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली और हरियाणा में मैन्युफैक्चरिंग, इंजीनियरिंग, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा, टेक्सटाइल, फूड प्रोसेसिंग और सर्विस सेक्टर में एमएसएमई का मजबूत आधार है।

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में रक्षा औद्योगिक गलियारा रक्षा विनिर्माण के लिए नए अवसर लेकर आया है। उन्होंने लखनऊ में करीब 2,000 करोड़ रुपये के निवेश से रक्षा क्षेत्र से जुड़ी प्रयोगशाला स्थापित करने की योजना का भी उल्लेख किया। उनके मुताबिक उत्तर प्रदेश केवल बड़ा बाजार नहीं, बल्कि भारत के मैन्युफैक्चरिंग और डिफेंस इकोसिस्टम का महत्वपूर्ण केंद्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

रक्षा मंत्री ने कहा कि देश के युवाओं को केवल नौकरी तलाशने वाला नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला उद्यमी बनाने की जरूरत है। एक उद्यमी सिर्फ अपना भविष्य नहीं बनाता, बल्कि कई परिवारों के भविष्य को भी मजबूत करता है। इसलिए उद्यमिता राष्ट्र निर्माण का प्रभावी माध्यम है।

उन्होंने कहा कि विकसित भारत केवल सरकार का लक्ष्य नहीं, बल्कि पूरे देश की सामूहिक आकांक्षा है। सरकार, उद्योग, एमएसएमई, स्टार्टअप, शिक्षा जगत और नागरिक समाज को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने कहा कि एक एमएसएमई की प्रगति वास्तव में भारत की प्रगति है।

राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत को केवल उत्पादों का निर्माण करने वाला देश नहीं, बल्कि तकनीक और बौद्धिक संपदा बनाने वाला देश बनना होगा। उन्होंने 2047 तक विकसित, समृद्ध, सुरक्षित और सशक्त भारत के निर्माण के लिए उद्योग जगत, युवाओं और उद्यमियों से मिलकर काम करने का आह्वान किया।

--आईएएनएस

पीकेटी/डीकेपी