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एमपी से राजस्थान के गांवों के पास पहुंचा चीता केपी-3, वन विभाग ने जारी किया अलर्ट

मुरैना, 27 अप्रैल (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क से निकलकर राजस्थान पहुंचे चीते केपी-3 की गतिविधियों ने वन विभाग और स्थानीय लोगों का ध्यान खींच लिया है। पिछले दो महीनों में यह चीता करीब 600 किलोमीटर का लंबा सफर तय करते हुए कई वन क्षेत्रों और रिहायशी इलाकों में घूमता रहा है।
 
एमपी से राजस्थान के गांवों के पास पहुंचा चीता केपी-3, वन विभाग ने जारी किया अलर्ट

मुरैना, 27 अप्रैल (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क से निकलकर राजस्थान पहुंचे चीते केपी-3 की गतिविधियों ने वन विभाग और स्थानीय लोगों का ध्यान खींच लिया है। पिछले दो महीनों में यह चीता करीब 600 किलोमीटर का लंबा सफर तय करते हुए कई वन क्षेत्रों और रिहायशी इलाकों में घूमता रहा है।

जानकारी के अनुसार, केपी-3 ने बारां जिले की किशनगंज, छीपाबड़ौद, अटरू, छबड़ा और अन्य वन रेंजों में भ्रमण किया है। इस दौरान वह कई बार गांवों के करीब भी पहुंचा, जिससे ग्रामीणों में उत्सुकता के साथ-साथ डर का माहौल भी देखने को मिला। एक मौके पर जब ग्रामीणों की भीड़ उसके करीब पहुंच गई, तो चीता आक्रामक हो गया, जिसके बाद वनकर्मियों को हस्तक्षेप कर लोगों को सुरक्षित हटाना पड़ा।

फिलहाल इसकी मौजूदगी राजस्थान के बारां जिले की विभिन्न रेंज में दर्ज की गई है, जहां वन विभाग की टीम लगातार इसकी निगरानी कर रही है।

वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, इस दौरान केपी-3 ने नीलगाय, बकरी, बछड़ा, खरगोश और जंगली सूअर समेत एक दर्जन से अधिक जानवरों का शिकार किया है। यह शिकार उसके जीवित रहने की प्राकृतिक प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन रिहायशी इलाकों के नजदीक उसकी मौजूदगी चिंता का विषय बनी हुई है।

वही, कुछ समय पहले चीते का जीपीएस कॉलर भीग जाने के कारण उसकी लोकेशन ट्रैक करने में दिक्कत आई थी। हालांकि बाद में नया सिग्नल मिलने पर उसकी गतिविधियों का फिर से पता लगाया गया। इस दौरान वह पार्वती नदी पार कर किशनगंज क्षेत्र में पहुंचा और कुछ दिन शेरगढ़ अभ्यारण्य में भी रहा।

इसी बीच, कूनो से निकला एक अन्य चीता केपी-2 भी राजस्थान में सक्रिय है और वह रणथंभौर टाइगर रिजर्व के आसपास देखा गया है। टाइगर रिजर्व जैसे क्षेत्र में चीते की मौजूदगी को लेकर वन्यजीव विशेषज्ञ भी सतर्क हैं, क्योंकि यह इलाका बाघों का प्रमुख निवास क्षेत्र है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इन चीतों का लंबी दूरी तय करना उनके स्वाभाविक व्यवहार का हिस्सा है, लेकिन मानव बस्तियों के पास उनका पहुंचना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। फिलहाल वन विभाग दोनों चीतों की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए है और लोगों से सतर्क रहने की अपील कर रहा है।

--आईएएनएस

एसएके/एएस