मोरक्को के प्रतिनिधिमंडल ने किया आर्मी बेस वर्कशॉप का दौरा
नई दिल्ली, 9 सितंबर (आईएएनएस)। मोरक्को के एक प्रतिनिधिमंडल ने भारतीय सेना की 505 आर्मी बेस वर्कशॉप का दौरा किया है। मोरक्को के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व ब्रिगेडियर जनरल अब्देल्लाह अथामानी कर रहे हैं। इस दौरान मोरक्को के अधिकारियों को आर्मी बेस वर्कशॉप की उन्नत तकनीकी क्षमताओं और विभिन्न सैन्य उपकरणों के रखरखाव एवं मरम्मत से जुड़ी विशेषज्ञता के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई।
प्रतिनिधिमंडल को विशेष रूप से टैंकों, इंजन और उनके विभिन्न कलपुर्जों की मरम्मत तथा बड़े स्तर पर सुधार की कार्यप्रणाली से अवगत कराया गया। इस दौरान कार्यशाला में तकनीक के समावेश, स्वचालन, नवाचार, स्वदेशीकरण और अत्याधुनिक तकनीक को आत्मसात करने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों पर फोकस रहा। रक्षा उपकरणों के रखरखाव और उनकी ऑपरेशन क्षमता बनाए रखने में कार्यशाला की भूमिका से प्रतिनिधिमंडल को अवगत कराया गया।
गौरतलब है कि मंगलवार को दोनों देशों के बीच पहली संयुक्त रक्षा समिति की बैठक हुई थी। नई दिल्ली में आयोजित इस बैठक में ट्रेनिंग और शिक्षा, शांति स्थापना मिशन, सैन्य अभ्यास, सैन्य चिकित्सा, साइबर रक्षा तथा रक्षा उद्योग सहित आपसी हित के कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में दोनों पक्षों ने भारत-मोरक्को रक्षा संबंधों को और व्यापक बनाने पर सहमति जताई।
वर्ष 2027 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय सहयोग को 70 वर्ष पूरे हो रहे हैं। ऐसे में रक्षा क्षेत्र में सहयोग को नई दिशा देने के लिए यह बैठक काफी महत्वपूर्ण है। भारत और मोरक्को के बीच रक्षा क्षेत्र में सहयोग को संस्थागत रूप देने की दिशा में सितंबर 2025 में महत्वपूर्ण पहल हुई थी।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की सितंबर 2025 में मोरक्को यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच रक्षा क्षेत्र में सहयोग को लेकर समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए थे। वहीं मंगलवार को हुई बैठक की सह-अध्यक्षता रक्षा मंत्रालय में अंतरराष्ट्रीय सहयोग के संयुक्त सचिव अमिताभ प्रसाद और मोरक्को के ब्रिगेडियर जनरल अब्देल्लाह अथ्मानी ने की। यहां दोनों देशों ने मौजूदा रक्षा संबंधों की समीक्षा के साथ-साथ भविष्य में सहयोग के नए क्षेत्रों की संभावनाओं पर भी विचार किया।
बैठक में भारत के रक्षा विभाग, तीनों सेनाओं, एकीकृत रक्षा स्टाफ मुख्यालय, रक्षा उत्पादन विभाग, सशस्त्र सेना चिकित्सा सेवा महानिदेशालय, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन तथा विदेश मंत्रालय के अधिकारी भी शामिल हुए।
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