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मिट्टी के शिल्प को बाजार से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाएगी योगी सरकार, 48 हजार से अधिक कुम्हार परिवार चिह्नित

लखनऊ, 28 अक्टूबर (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश में पारंपरिक माटी कला को आधुनिक तकनीक, उद्यमिता और बाजार से जोड़कर शिल्पकारों की आय बढ़ाने की दिशा में सरकार प्रयास कर रही है। खादी एवं ग्रामोद्योग मंत्री राकेश सचान ने बुधवार को डालीबाग स्थित खादी भवन परिसर में 11 दिवसीय माटी कला महोत्सव-2026 एवं राज्य स्तरीय प्रदर्शनी का शुभारंभ करते हुए कहा कि सरकार का लक्ष्य पारंपरिक शिल्प को रोजगार और स्वरोजगार का मजबूत माध्यम बनाना है।
 

लखनऊ, 28 अक्टूबर (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश में पारंपरिक माटी कला को आधुनिक तकनीक, उद्यमिता और बाजार से जोड़कर शिल्पकारों की आय बढ़ाने की दिशा में सरकार प्रयास कर रही है। खादी एवं ग्रामोद्योग मंत्री राकेश सचान ने बुधवार को डालीबाग स्थित खादी भवन परिसर में 11 दिवसीय माटी कला महोत्सव-2026 एवं राज्य स्तरीय प्रदर्शनी का शुभारंभ करते हुए कहा कि सरकार का लक्ष्य पारंपरिक शिल्प को रोजगार और स्वरोजगार का मजबूत माध्यम बनाना है।

प्रदेश में अब तक 48 हजार से अधिक शिल्पकार परिवार चिह्नित किए गए हैं, जबकि लगभग 40 हजार शिल्पकारों को मिट्टी की उपलब्धता के लिए भूमि एवं पट्टा संबंधी सुविधाओं का लाभ दिया गया है। उत्तर प्रदेश माटी कला बोर्ड की ओर से आयोजित यह महोत्सव 28 अक्टूबर से सात नवंबर तक चलेगा। ‘मिट्टी से संस्कृति, संस्कृति से समृद्धि’ थीम पर आधारित प्रदर्शनी में प्रदेश के विभिन्न जिलों के शिल्पकारों द्वारा तैयार पारंपरिक और आधुनिक माटी कला उत्पादों, गृह-सज्जा की वस्तुओं तथा कलाकृतियों को प्रदर्शित किया जा रहा है। यहां उत्पादों की बिक्री भी की जा रही है, जिससे शिल्पकारों को अपने उत्पादों के विपणन और नए ग्राहकों तक पहुंचने का अवसर मिलेगा।

उद्घाटन समारोह में राकेश सचान ने कहा कि माटी कला प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत और ग्रामीण जीवन का अभिन्न हिस्सा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में सरकार शिल्पकारों को आधुनिक उपकरण, तकनीकी प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रही है।

उन्होंने कहा कि उत्पादों की गुणवत्ता, डिजाइन, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और डिजिटल विपणन में सुधार कर माटी कला को बदलती बाजार मांग के अनुरूप विकसित करना जरूरी है, ताकि कारीगरों को उनके श्रम का उचित मूल्य मिल सके। माटी कला के आधुनिकीकरण के तहत प्रदेश में अब तक 18,400 से अधिक विद्युत चालित चाक वितरित किए जा चुके हैं। चालू वित्तीय वर्ष में 2,740 अतिरिक्त विद्युत चालित चाक उपलब्ध कराने का लक्ष्य है। इसके साथ ही पॉटरी और दीया निर्माण से जुड़े आधुनिक उपकरण भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इनसे शिल्पकारों की उत्पादन क्षमता बढ़ाने और बाजार की जरूरतों के अनुसार उत्पाद तैयार करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

मुख्यमंत्री माटी कला रोजगार योजना के तहत वित्तीय सहायता और बैंक ऋण के माध्यम से अब तक 1,300 से अधिक उद्यम स्थापित किए गए हैं। चालू वित्तीय वर्ष में 300 अतिरिक्त उद्यम स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। वहीं, शिल्पकारों को आधुनिक तकनीक, उपकरण संचालन और उद्यम प्रबंधन का प्रशिक्षण देने के लिए लगभग 4,900 लोगों के कौशल उन्नयन की योजना है। शिल्पकारों को साझा तकनीकी और उत्पादन सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए पीलीभीत, रामपुर, कन्नौज, अमरोहा, बाराबंकी, फिरोजाबाद, बिजनौर, अमेठी, बरेली और जालौन में 10 कॉमन फैसिलिटी सेंटर स्थापित किए गए हैं। इसके अलावा शिल्पकारों को संगठित करने और सामूहिक उद्यमिता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 128 सहकारी समितियां पंजीकृत की गई हैं।

उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिल्पकारों को प्रोत्साहित करने के लिए मंडल और राज्य स्तर पर पुरस्कार देने की व्यवस्था भी की गई है। महोत्सव के उद्घाटन अवसर पर मंत्री ने पांच शिल्पकारों को निःशुल्क विद्युत चालित चाक और दो शिल्पकारों को पग मिल प्रदान किए। इसके साथ ही मुख्यमंत्री माटी कला रोजगार योजना के लाभार्थियों को ऋण स्वीकृति पत्र वितरित किए गए। इन सुविधाओं का उद्देश्य शिल्पकारों को व्यवसाय शुरू करने और उत्पादन बढ़ाने के लिए जरूरी संसाधन उपलब्ध कराना है। उत्तर प्रदेश माटी कला बोर्ड की स्थापना 19 जुलाई, 2018 को हुई थी।

बोर्ड के माध्यम से पारंपरिक माटी कला से जुड़े परिवारों को कच्चे माल, उपकरण, प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की पहल की जा रही है। इस अवसर पर खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग के प्रमुख सचिव अनिल कुमार सागर सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। मंत्री ने लोगों से स्थानीय शिल्पकारों के उत्पाद अपनाने और ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान को आगे बढ़ाने की अपील की।

--आईएएनएस

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