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मिडिल ईस्ट पर शिवसेना नेता शाइना एनसी का राज ठाकरे को जवाब, 'सरकार अपने बलबूते फैसले लेने में सक्षम'

मुंबई, 20 मार्च (आईएएनएस)। शिवसेना नेता शाइना एनसी ने मिडिल ईस्ट पर मनसे प्रमुख राज ठाकरे के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि राज ठाकरे को भारत सरकार के ऊपर भरोसा दिखाना चाहिए। सरकार अपने बलबूते फैसला लेने में सक्षम है।
 
मिडिल ईस्ट पर शिवसेना नेता शाइना एनसी का राज ठाकरे को जवाब, 'सरकार अपने बलबूते फैसले लेने में सक्षम'

मुंबई, 20 मार्च (आईएएनएस)। शिवसेना नेता शाइना एनसी ने मिडिल ईस्ट पर मनसे प्रमुख राज ठाकरे के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि राज ठाकरे को भारत सरकार के ऊपर भरोसा दिखाना चाहिए। सरकार अपने बलबूते फैसला लेने में सक्षम है।

राज ठाकरे ने अपने एक बयान में कहा कि भारत को ईरान का साथ देना चाहिए था। आईएएनएस से बात करते हुए शाइना एनसी ने जवाब देते हुए कहा, "राज ठाकरे से सलाह न लेते हुए सरकार अपने बलबूते फैसला लेने में सक्षम है। लेकिन जो सीख दे रहे हैं, उन्हें कहीं न कहीं सरकार के ऊपर भरोसा दिखाना चाहिए।"

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हमेशा माना है कि ईरान के साथ हमारा एक व्यापारिक ही नहीं, बल्कि एक गहरा रिश्ता रहा है। भारत का ईरान के साथ बासमती चावल निर्यात और चाबहार पोर्ट को लेकर संवाद रहा है।

इसी बीच, शाइना एनसी ने शशि थरूर के उस बयान का समर्थन किया, जिसमें कांग्रेस के हंगामे के बीच उन्होंने कहा कि संसद का इस्तेमाल हंगामा करने के लिए नहीं, बल्कि चर्चा और बहस के लिए होना चाहिए।

शाइना एनसी ने कहा, "शशि थरूर बिल्कुल सही बोल रहे हैं। संसद का काम चर्चा करना है। शशि थरूर से प्रेरित होकर बहुत सारे कांग्रेस नेता भी बात को कहना चाहते हैं। हालांकि, इनमें से कुछ नेताओं में बोलने की हिम्मत है और कुछ नेताओं में नहीं है। मगर यह सच्चाई है कि कांग्रेस की नैया डूब चुकी है।"

सीएम योगी के 'रामराज्य' वाले बयान पर शाइना एनसी ने कहा, "भारत में रामराज्य है। यहां आस्था और विश्वास है। इसलिए कहीं भी युद्ध नहीं, बल्कि सिर्फ सकारात्मक सोच और एक विश्वास है।"

नोरा फतेही के गाने पर विवाद को लेकर उन्होंने कहा, "बॉलीवुड को जिम्मेदार रहना चाहिए। भारतीय न्याय संहिता, आईटी एक्ट या पॉक्सो एक्ट और राष्ट्रीय महिला आयोग का यही काम है कि समाज में सही संदेश जाए। जहां गलत दृश्य या शब्द इस्तेमाल करते हैं, तो हमें सोचना पड़ेगा कि हम युवाओं को क्या सीख दे रहे हैं। हमारी संस्कृति और सभ्यता को बरकरार रखना है, तो राष्ट्रीय महिला आयोग को अपना काम करने दीजिए।"

--आईएएनएस

डीसीएच/