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मुझ पर लगे सभी आरोप बेबुनियाद और राजनीतिक रूप से प्रेरित: मनन कुमार मिश्रा

नई दिल्ली, 22 अगस्त (आईएएनएस)। भाजपा सांसद और बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा ने अपने खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दायर जनहित याचिका (पीआईएल) और बीसीआई के पूर्व को-चेयरमैन सदाशिव रेड्डी की ओर से लगाए गए गंभीर आरोपों पर सफाई दी है। उन्होंने खुद को निर्वाचित प्रतिनिधि बताते हुए कहा कि बीसीआई एक वैधानिक संस्था है और इसके पदाधिकारी लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत चुने जाते हैं। उन्होंने अपने खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों को निराधार और राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया।
 

नई दिल्ली, 22 अगस्त (आईएएनएस)। भाजपा सांसद और बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा ने अपने खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दायर जनहित याचिका (पीआईएल) और बीसीआई के पूर्व को-चेयरमैन सदाशिव रेड्डी की ओर से लगाए गए गंभीर आरोपों पर सफाई दी है। उन्होंने खुद को निर्वाचित प्रतिनिधि बताते हुए कहा कि बीसीआई एक वैधानिक संस्था है और इसके पदाधिकारी लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत चुने जाते हैं। उन्होंने अपने खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों को निराधार और राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया।

मनन कुमार मिश्रा ने कहा कि वह बीसीआई में किसी नियुक्ति या नामांकन के जरिए नहीं पहुंचे हैं, बल्कि निर्वाचित प्रतिनिधि हैं। एडवोकेट्स एक्ट के तहत बार काउंसिल ऑफ इंडिया एक वैधानिक निकाय है, जिसमें देशभर के 25 लाख से अधिक वकील मतदाता हैं। सबसे पहले वकील अपने-अपने स्टेट बार काउंसिल के प्रतिनिधियों का चुनाव करते हैं। इसके बाद स्टेट बार काउंसिल के निर्वाचित प्रतिनिधि बीसीआई के लिए अपने प्रतिनिधि चुनते हैं। बीसीआई के सभी राज्यों से आए प्रतिनिधि मिलकर चेयरमैन और वाइस चेयरमैन का चुनाव करते हैं।

अपने कार्यकाल को लेकर मनन कुमार मिश्रा ने कहा कि यह उनका सातवां कार्यकाल है और इससे पहले छह कार्यकाल में वह निर्विरोध निर्वाचित होते रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि मौजूदा समय में भी बीसीआई के दो-तिहाई से अधिक सदस्य उनके साथ हैं। उन्होंने कहा कि यदि कुछ इक्के-दुक्के लोग उनके खिलाफ निराधार और बेबुनियाद बातें कर रहे हैं तो उससे बीसीआई की वास्तविक स्थिति नहीं बदलती। संस्था के भीतर आज भी उन्हें स्पष्ट बहुमत का समर्थन प्राप्त है।

मनन कुमार मिश्रा ने ट्रस्ट से जुड़े आरोपों को भी खारिज किया। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट का पूरा कामकाज पारदर्शी तरीके से होता है और उसमें बार काउंसिल के सदस्य तथा वरिष्ठ अधिवक्ता बतौर मैनेजिंग ट्रस्टी जुड़े हुए हैं। ट्रस्ट के कामकाज का लेखा-जोखा कोई भी देख सकता है। हर वर्ष ट्रस्ट का ऑडिट होता है और ऑडिट से संबंधित जानकारी गजट में प्रकाशित होती है और सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध रहती है। ऐसे में ट्रस्ट के फंड या उसके संचालन को लेकर लगाए जा रहे आरोपों को उन्होंने बेबुनियाद बताया।

मनन कुमार मिश्रा ने यह भी कहा कि कुछ लोगों ने वकीलों को कथित तौर पर 'लीगल कॉकरोच' जैसे शब्दों से संबोधित किया है, जिसे उन्होंने वकील समाज के लिए शर्मनाक बताया। उन्होंने कहा कि देश का वकील समुदाय इस तरह की निराधार और अपमानजनक टिप्पणियों को स्वीकार नहीं करेगा।

फंड के कथित दुरुपयोग और निजी तौर पर फंड डायवर्ट किए जाने के आरोप पर मिश्रा ने कहा कि आरोप लगाने वाले को इन्हें साबित करना चाहिए। उन्होंने खास तौर पर सदाशिव रेड्डी का जिक्र करते हुए कहा कि यदि उनके पास कोई ठोस प्रमाण है तो वह सामने लाएं। उन्होंने कहा कि सदाशिव रेड्डी पहले बीसीआई के सदस्य और को-चेयरमैन रहे हैं, लेकिन अब वह कर्नाटक स्टेट बार काउंसिल के सदस्य नहीं हैं। उन्होंने बताया कि कर्नाटक स्टेट बार काउंसिल का चुनाव परिणाम घोषित हो चुका है और रेड्डी उस चुनाव में नहीं लड़े।

उन्होंने रेड्डी द्वारा लगाए गए आरोपों को व्यक्तिगत और राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया। उन्होंने कहा कि रेड्डी लंबे समय से उनके राजनीतिक और संगठनात्मक विरोधी रहे हैं और बीसीआई में सदस्य रहते हुए भी उनका विरोध करते थे। उन्होंने कहा कि अब बीसीआई से बाहर होने के बाद भी रेड्डी की ओर से इस तरह के बयान दिए जा रहे हैं। मनन कुमार मिश्रा ने यह भी कहा कि यदि कोई व्यक्ति उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों को प्रमाणित कर देता है तो वह अपने पद से हटने के लिए तैयार हैं, लेकिन बिना प्रमाण के इस तरह के आरोप लगाना उचित नहीं है, खासकर जब आरोप लगाने वाला व्यक्ति वरिष्ठ वकील रहा हो।

अपने खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दाखिल पीआईएल पर मिश्रा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट सभी के लिए खुला है और कोई भी व्यक्ति कानून के तहत याचिका दाखिल कर सकता है। उन्होंने कहा कि यदि याचिकाकर्ता को लगता है कि एडवोकेट्स एक्ट के किसी प्रावधान का उल्लंघन हुआ है या उनके पद पर बने रहने को लेकर कानून में कोई स्पष्ट सीमा निर्धारित है, तो वह अदालत के सामने अपना पक्ष रख सकता है।

उन्होंने अपने विरोधियों को चुनाव मैदान में आने की चुनौती दी। उन्होंने कहा कि बीसीआई में चेयरमैन तक पहुंचने की प्रक्रिया कई चरणों में होती है। पहले स्टेट बार काउंसिल का चुनाव होता है, फिर बीसीआई के प्रतिनिधि चुने जाते हैं और उसके बाद बीसीआई के प्रतिनिधि चेयरमैन का चुनाव करते हैं। यदि किसी को उनसे राजनीतिक या संगठनात्मक विरोध है तो उसे चुनावी मैदान में आकर मुकाबला करना चाहिए। मनन कुमार मिश्रा ने कहा कि आमने-सामने चुनाव लड़कर उन्हें हराया जा सकता है, लेकिन सोशल मीडिया और पीआईएल के जरिए उन्हें हटाने की कोशिश सफल नहीं होगी।

उन्होंने कहा कि जब तक देश के वकील और बीसीआई के मतदाता उन्हें अपना प्रतिनिधि और चेयरमैन बनाए रखना चाहेंगे, तब तक वह पद पर बने रहेंगे। उन्होंने अपने खिलाफ चल रहे अभियान को चुनाव मैदान से बाहर की लड़ाई बताते हुए कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं में अंतिम फैसला मतदाताओं का होना चाहिए।

--आईएएनएस

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